Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

हर दिन चावल खाने वालों को नहीं करनी चाहिए ये 3 गलतियां, सेहत को हो सकता है नुकसान

अगर आप रोजाना चावल खाते हैं, तो सिर्फ चावल खाना ही काफी नहीं है। यह भी जरूरी है कि आपकी थाली संतुलित हो। आइए जानते हैं ऐसी 3 गलतियों के बारे में जिनसे बचना चाहिए।

ज्‍यादातर घरों में चावल सबसे ज्यादा खाए जाने वाली चीज है। कई लोगों के लिए दिन का कोई न कोई मील चावल के बिना अधूरा लगता है। चावल एनर्जी का अच्छा स्रोत है और संतुलित मात्रा में इसका सेवन स्वस्थ आहार का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, समस्या तब पैदा होती है जब लोग चावल खाते समय कुछ गलतियां करने लगते हैं। ये गलतियां समय के साथ वजन बढ़ने, बार-बार भूख लगने, ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव और पोषण से जुड़ी कमियों का कारण बन सकती हैं। रोजाना चावल खाते हैं, तो जानें वो तीन गलत‍ियां कौन सी हैं ज‍िनसे बचना चाह‍िए? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

1. प्रोटीन स्रोत के बगैर खाते हैं चावल?

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कई लोग चावल के साथ सिर्फ आलू, ग्रेवी या किसी सामान्‍य सब्जी का सेवन करते हैं, लेकिन प्रोटीन का ध्यान नहीं रखते। चावल मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है। अगर भोजन में पर्याप्त प्रोटीन न हो, तो पेट जल्दी खाली हो सकता है और कुछ ही समय बाद फिर से भूख लग सकती है। इसलिए चावल के साथ दाल, राजमा, छोले, पनीर, दही, अंडे, मछली या चिकन जैसे प्रोटीन स्रोत जरूर शामिल करें। इससे भोजन ज्‍यादा संतुलित और पौष्टिक बनता है।

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2. चावल की मात्रा पर कंट्रोल नहीं रखते?

चावल से जुड़ी सबसे आम गलती है जरूरत से ज्यादा मात्रा में खाना। कई लोग अपनी प्लेट का ज्‍यादा हिस्सा चावल से भर लेते हैं और सब्जियों या प्रोटीन के लिए बहुत कम जगह छोड़ते हैं। ज्‍यादा मात्रा में चावल खाने से कैलोरीज बढ़ जाती हैं, जिससे वजन बढ़ने का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा, एक बार में बहुत ज्यादा कार्बोहाइड्रेट लेने से कुछ लोगों में ब्लड शुगर लेवल भी तेजी से बढ़ सकता है। बेहतर होगा कि चावल को सीमित मात्रा में लें और थाली का संतुलन बनाए रखें।

साल 2015 में ARYA Atherosclerosis नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, चावल को अध‍िक मात्रा में नहीं खाना चाह‍िए वरना टाइप 2 डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा बढ़ सकता है।

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3. चावल के साथ डाइट में फाइबर नहींं बढ़ाते?

  • सफेद चावल में फाइबर की मात्रा कम होती है। अगर भोजन में पर्याप्त फाइबर न हो, तो पाचन पर असर पड़ सकता है और पेट जल्दी खाली होने के कारण भूख भी जल्दी लग सकती है।
  • फाइबर पाचन को बेहतर बनाने, पेट भरा रखने और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसलिए चावल के साथ भरपूर मात्रा में सलाद, हरी सब्जियां, दालें और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।
  • अगर संभव हो, तो कभी-कभी सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस या अन्य साबुत अनाज भी चुन सकते हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

रोजाना चावल खाना बुरा नहीं है, लेक‍िन चावल खाने के दौरान तीन गलत‍ियों से बचना चाह‍िए जैसे- डाइट में प्रोटीन शामिल न करना, चावल के साथ डाइट में फाइबर न बढ़ाना और चावल की मात्रा पर कंट्रोल न रखना। इन तीन बातोंं का ध्‍यान रखेंगे, तो चावल को हेल्‍दी डाइट का ह‍िस्‍सा बना सकते हैं।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 09, 2026 18:27 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 09, 2026 18:27 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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