Fri Sep 11, 2026 | 06:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr Kapil Sharma , Group Director - Gastroenterology & Advanced Endoscopy

हाई यूर‍िक एस‍िड में चावल खाना चाह‍िए या नहींं? डॉक्‍टर से जानें

हाई यूर‍िक एस‍िड की समस्या होने पर कई बार लोगों के मन में सवाल आता है कि‍ चावल का सेवन करना ठीक है या नहीं। चूंक‍ि चावल कार्ब्स र‍िच फूड है और इससे मोटापा बढ़ सकता है, ऐसे में जानते हैं क‍ि इसे हाई यूर‍िक एस‍िड में खाना चाह‍िए या नहीं।

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हाई यूर‍िक एस‍िड या हाइपरयूरिसीमिया (Hyperuricemia) के मरीजोंं को डाइट का खास ख्‍याल रखना जरूरी होता है क्‍योंक‍ि गलत खानपान या प्‍यूर‍ीन र‍िच फूड्स का सेवन करने से यूर‍िक एस‍िड बढ़ सकता है। ऐसी स्‍थि‍त‍ि में कई लोगों के द‍िमाग में यह सवाल आता है क‍ि क्‍या हाई यूरि‍क एस‍िड में चावल खाना चाह‍िए? यह जानने के ल‍िए हमने Dr. Kapil Sharma, Gastroenterologist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।

हाई यूर‍िक एस‍िड की स्‍थि‍त‍ि क्‍या होती है?

Mayo Clinic के मुताब‍िक, यूरिक एसिड का लेवल ज्‍यादा होने का मतलब है ब्‍लड में यूरिक एसिड की मात्रा ज्‍यादा होना। यूरिक एसिड प्यूरीन के टूटने से बनता है। प्यूरीन कुछ खास तरह के खाने में पाए जाते हैं और शरीर भी इन्हें बनाता है। ब्‍लड यूरिक एसिड को किडनी तक पहुंचाता है। किडनी ज्‍यादातर यूरिक एसिड को पेशाब के रास्ते से बाहर निकाल देती है, जो शरीर से बाहर चला जाता है। गाउट या किडनी में पथरी होने पर यूरिक एसिड का लेवल बढ़ सकता है।

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प्‍यूरीन क्‍या होता है?

प्यूरीन एक प्रकार का प्राकृतिक रासायनिक पदार्थ है जो हमारे शरीर की कोशिकाओं में पाया जाता है। जब शरीर प्यूरिन को तोड़ता है, तो एक पदार्थ बनता है जिसे यूरिक एसिड कहते हैं।

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यूरिक एसिड में चावल खाना चाहिए या नहीं?

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Dr. Kapil Sharma ने बताया क‍ि चावल सीधे तौर पर यूरिक एसिड नहीं बढ़ाता, लेकिन लंबे समय तक अध‍िक चावल का सेवन करने से मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं जो हाई यूर‍िक एस‍िड के कारण माने जाते हैं। जिन लोगों का यूरिक एसिड बढ़ा हुआ होता है, उनके लिए चावल का गलत तरीके से सेवन करना, चावल खाने से भी ज्‍यादा नुकसानदायक हो सकता है।

चावल कार्बोहाइड्रेट से भरपूर फूड है, जो मुख्य रूप से स्टार्च से बना होता है। सीधे तौर पर चावल हाई यूर‍िक एस‍िड का कारण नहीं हो सकता, लेक‍िन ज‍िन लोगोंं को पहले से हाई यूर‍िक एस‍िड की समस्‍या है, उनके ल‍िए चावल का सेवन सीम‍ित करना सेहतमंद हो सकता है। ज‍िनके शरीर में पहले से अत‍िर‍िक्‍त प्‍यूरीन मौजूद है, वो शरीर के जोड़ों में इकट्ठा हो सकता है ज‍िससे गाउट का दर्द तेज हो सकता है। ऐसी स्‍थि‍त‍ि में चावल का सेवन नुकसानदायक हो सकता है क्‍योंक‍ि यह एक कार्ब्स र‍िच फूड है जो मेटाबॉल‍िज्‍म को धीमा करता है ज‍िससे गाउट की समस्‍या बढ़ सकती है। इसके साथ ही चावल का सेवन करने से वजन तेजी से बढ़ सकता है ज‍िसके कारण गाउट में दर्द और सूजन की समस्‍या बढ़ सकती है। इसल‍िए हाई यूर‍िक एस‍िड में चावल का सीम‍ित सेवन करना ज्‍यादा फायदेमंद है और आप हेल्‍दी व‍िकल्‍प जैसे ब्राउन राइस चुन सकते हैं।

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क्‍या चावल में प्‍यूर‍ीन होता है?

Dr. Kapil Sharma ने बताया क‍ि चावल में प्‍यूरीन कम मात्रा में मौजूद होता है। हाई यूर‍िक एस‍िड में प्‍यूरीन युक्‍त चीजें जैसे रेड मीट, सी फूड्स वगैरह से परहेज करने की सलाह दी जाती है। सीधे तौर पर चावल यूर‍िक एस‍िड बढ़ाने के ल‍िए ज‍िम्‍मेदार नहींं हो सकता है, लेक‍िन इसका सेवन सीम‍ित करना ही फायदेमंंद है।

व्‍हाइट और ब्राउन दोनों ही राइस में प्‍यूरीन की मात्रा कम मानी जाती है। इसल‍िए एक्‍सपर्ट्स मानते हैं क‍ि चावल सीधे तौर पर यूर‍िक एस‍िड नहीं बढ़ाता है। यह गाउट के मरीजों के ल‍िए सुरक्ष‍ित माना जाता है, लेक‍िन बहुत ज्‍यादा मात्रा में इसे खाने से इंंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस पर बुरा असर पड़ सकता है ज‍िससे यूर‍िक एस‍िड प्रभाव‍ित हो सकता है।

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चावल और रोटी में से यूर‍िक एस‍िड के ल‍िए क्‍या ज्‍यादा सुरक्षि‍त है?

सीधे तौर पर यह नहीं कहा जा सकता है क‍ि चावल खाने से यूर‍िक एस‍िड बढ़ता है या रोटी खाने से यूर‍िक एस‍िड बढ़ता है। दरअसल रोटी और चावल खाने के गलत तरीके के कारण यूरि‍क एस‍िड बढ़ सकता है। अक्‍सर लोग गेहूं की रोटी का सेवन करते हैं और उसमें कार्ब्स की मात्रा मौजूद होती है। ज्‍यादा कार्ब्स का सेवन करने से वजन बढ़ सकता है और मोटापे के कारण इंंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस बढ़ सकता है ज‍िससे हाई यूर‍िक एस‍िड की समस्‍या हो सकती है।

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कितना चावल एक दिन में खाना ठीक है?

एक द‍िन में करीब आधा कटोरी चावल खा सकते हैं। चावल की मात्रा द‍िनभर में 90 से 100 ग्राम से ज्‍यादा नहीं होनी चाह‍िए। ICMR की 2024 Dietary Guidelines के मुताब‍िक, एक संतुलित आहार में अनाज और मोटे अनाजों से 45% से ज्‍यादा कैलोरी नहीं मिलनी चाहिए।

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हाई यूर‍िक एस‍िड में सफेद चावल और ब्राउन राइस में से क्‍या ज्‍यादा हेल्‍दी है?

Dr. Kapil Sharma ने बताया क‍ि सफेद चावल और ब्राउन राइस दोनोंं में ही प्‍यूर‍ि‍न का स्‍तर कम होता है, लेक‍िन सफेद चावल के मुकाबले, ब्राउन राइस का ग्‍लाइसेम‍िक इंडेक्‍स कम होता है और इसका सेवन करने से इंंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस तेजी से बढ़ने का खतरा भी सफेद चावल के मुकाबले कम हो सकता है इसल‍िए ब्राउन राइस का सेवन ज्‍यादा सेहतमंंद व‍िकल्‍प हो सकता है। 2019 में Nutrients नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक प्‍लांट बेस्‍ड डाइट ज‍िसमें होल ग्रेन्‍स जैसे ब्राउन राइस भी शाम‍िल है, हाई यूर‍िक एस‍िड की स्‍थि‍त‍ि में फायदेमंद माने जा सकते हैं। साथ ही स्‍टडी में यह भी बताया क‍ि फाइबर, व‍िटाम‍िन और प्‍लांट-बेस्‍ड फूड्स म‍िलकर यूर‍िक एस‍िड को कम करने में मदद कर सकते हैं।

क्या रात में चावल खाने से यूरिक एसिड बढ़ता है?

Dr. Kapil Sharma ने बताया क‍ि चावल का गलत ढंग से सेवन चाहे द‍िन में हो या रात में वो सेहत के ल‍िए हान‍िकारक हो सकता है। व्‍हाइट या ब्राउन राइस दोनोंं में ही प्‍यूरीन की मात्रा कम मानी जाती है और हाई प्‍यूरीन फूड्स जैसे रेड मीट या अल्‍कोहल का सेवन, हाई यूर‍िक एसि‍ड में हान‍िकारक माना जाता है। चावल का सेवन रात को करने से इंंसुल‍िन तेजी से बढ़ सकता है और लंंबे वक्‍त तक ऐसी स्‍थ‍ित‍ि का असर यूर‍िक एस‍िड पर हो सकता है। अगर आप हाई यूर‍िक एस‍िड के मरीज हैं, तो रात को सफेद चावल खाने के बजाय ब्राउन राइस चुन सकते हैं। चावल के एक बाउल में सब्‍जी या दाल की मात्रा ज्‍यादा रखें, इस तरह लंंबे समय में यूर‍िक एस‍िड का सही स्‍तर बरकरार रखने में मदद मि‍ल सकती है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • अगर आप सीमित मात्रा में चावल खा रहे हैं, फिर भी यूरिक एसिड लेवल बार-बार बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
  • अगर चावल खाने के बाद पैरों या उंगलियों में दर्द, सूजन या अकड़न महसूस होती है, तो यह संकेत हो सकता है कि आपकी बॉडी उस डाइट को सही से हैंडल नहीं कर रही है, ऐसे में डॉक्‍टर से सलाह लें।
  • ज्यादा मात्रा में सफेद चावल खाने से वजन बढ़ सकता है, जो यूरिक एसिड को और बिगाड़ सकता है इसल‍िए ऐसी स्थिति में डाइट प्लान के लिए डॉक्टर या न्‍यूट्र‍िशन‍िस्‍ट से मिलें।
  • कई मामलों में, सिर्फ खान-पान या जीवनशैली में बदलाव करने से, गंभीर गाउट वाले मरीजों को राहत नहींं म‍िलती है। ऐसी स्‍थ‍ित‍ि में दवाओं की जरूरत भी पड़ सकती है जो आप डॉक्‍टर की सलाह पर ले सकते हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

Gastroenterologist Dr. Kapil Sharma से हुई बातचीत और स्‍टडीज के आधार पर हमें इस लेख में पता चला क‍ि चावल लो प्‍यूरीन फूड माना जाता है इसल‍िए सीधे तौर पर इसका सेवन करने से यूर‍िक एस‍िड का स्‍तर नहींं बढ़ता, लेक‍िन चावल का ज्‍यादा सेवन करने से इंंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस और मोटापा बढ़ सकता है जो लंबे समय में हाई यूर‍िक एस‍िड का कारण बन सकता है इसल‍िए सीमि‍त मात्रा में और सही ढंंग से चावल का सेवन करना चाह‍िए। हाई यूर‍िक एस‍िड के मरीजों को सफेद की जगह ब्राउन चावल खाने की सलाह दी जाती है।

FAQ

  • किन चीजों के सेवन से यूरिक एसिड का लेवल बढ़ता है?

    जिन खाद्य पदार्थों से यूरिक एसिड का लेवल सबसे ज्‍यादा बढ़ता है, उनमें कुछ खास तरह के सीफूड, रेड मीट, अल्‍कोहल‍िक ड्र‍िंक्‍स, कुछ चीनी वाले पेय और फ्रुक्टोस वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
  • क्या सिर्फ डाइट में बदलाव करके हाई यूरिक एसिड को कंट्रोल करना मुमकिन है?

    कुछ मामलों में खान-पान में बदलाव और जीवनशैली में अन्य बदलाव बढ़े हुए यूरिक एसिड के लेवल को कंट्रोल कर सकता है लेक‍िन गंभीर मामलोंं में डॉक्‍टर की सलाह पर दवाओं का सेवन भी जरूरी हो सकता है।
  • हाई प्‍यूरीन फूड्स कौन से हैं?

    हाई प्यूरीन फूड्स वो होते हैं जिनमें प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है। प्यूरीन कोशिकाओं में पाए जाने वाले प्राकृतिक केम‍िकल हैं। प्यूरीन र‍िच फूड्स में रेड मीट, मटन, अल्‍कोहल, कुछ मीठे ड्र‍िंंक्‍स वगैरह शाम‍िल हैं। 
  • हाई यूर‍िक एस‍िड में क्‍या न खाएं?

    हाई यूर‍िक एस‍िड में मटन, बीफ, पोर्क, अल्‍कोहल, मीठे ड्र‍िंक्‍स, फास्‍ट फूड्स, प्रोसेस्‍ड फूड्स, र‍िफाइंड कार्ब्स जैसे मैदा वगैरह का सेवन सीम‍ित करना चाह‍िए।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 17, 2026 17:19 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Apr 17, 2026 17:19 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Kapil Sharma

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