Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

ब‍िस्‍तर गीला कर देते हैं बच्‍चे, कहीं कारण डाइट से जुड़ी ये गलतियां तो नहीं?

कई बच्‍चे रात को सोते समय ब‍िस्‍तर ग‍ीला कर देते हैं। ऐसा क‍िसी भी उम्र के बच्‍चे के साथ हो सकता है। ज्‍यादातर मामलों में डाइट से संंबध‍ित गलत आदतें इसका कारण होती हैं। जानें ऐसी कुछ गलत आदतों के बारे में।

कई बच्‍चे रात को सोते समय ब‍िस्‍तर पर ही पेशाब कर देते हैं। पैरेंट्स इसे गलत आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेक‍िन इसके पीछे डाइट से संबंध‍ित गलत‍ियां हो सकती हैं। खासतौर पर अगर बच्‍चा बार-बार रात को ब‍िस्‍तर गीला कर रहा है, तो उसकी डाइट और लाइफस्‍टाइल पर गौर करना जरूरी है। डाइट से जुड़ी ऐसी कुछ गलत‍ियों के बारे में आगे जानते हैं जो बच्‍चों में बेडवेट‍िंग की वजह बन सकती हैं। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

सोने से पहले लिक्विड का ज्‍यादा सेवन करना

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अगर आप भी बच्‍चे को सोने से पहले दूध, जूस, पानी जैसी लिक्विड चीजें ज्‍यादा देते हैं, तो यह हो सकता है क‍ि वह रात को ब‍िस्‍तर पर ही पेशाब कर दे। सोने से पहले ज्‍यादा मात्रा में पानी या अन्‍य तरल पदार्थ देने से ब्‍लैडर जल्‍दी भर सकता है और बच्‍चे को पेशाब कंट्रोल करने में द‍िक्‍कत हो सकती है। द‍िनभर में हाइड्रेशन का ख्‍याल रखें, लेक‍ि‍न रात में लिक्विड की मात्रा कंट्रोल करना जरूरी है।

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कैफीन वाली चीजों का ज्‍यादा सेवन

अगर बच्‍चे को कोल्‍ड कॉफी, चॉकलेट या कैफीन युक्‍त अन्‍य ड्र‍िंक्‍स देंगे, तो ब्‍लैडर ज्‍यादा एक्‍ट‍िव रहेगा। इससे बार-बार पेशाब आने की समस्‍या बढ़ सकती है। अगर बच्‍चा रात को ब‍िस्‍तर गीला करता है, तो शाम के बाद उसे चॉकलेट ड्र‍िंक्‍स या कैफीन युक्‍त ड्र‍िंक्‍स न दें।

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ज्‍यादा मीठा खाना

कैंडी, म‍िठाई, मीठे सीर‍ियल या पैकेज्‍ड जूस जैसी चीजें शरीर में शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा देते हैं। इससे कुछ बच्‍चों को ज्‍यादा प्‍यास लग सकती है और बार-बार यूर‍िन आने की समस्‍या हो सकती है। रात के खाने के बाद मीठी चीजें देने के बजाय संतुल‍ित स्नैक्स दें। फल, दही या हल्‍का घर का बना स्नैक बच्‍चों को ख‍िलाएं।

डाइट में फाइबर की कमी होना

अगर बच्‍चे ब‍िस्‍तर गीला करते हैं, तो इसका एक कारण डाइट में फाइबर की कमी भी हो सकती है। जब पेट साफ नहीं होता है, तो आंतों का दबाव ब्‍लैडर पर पड़ सकता है ज‍िससे पेशाब कंट्रोल करना मुश्‍क‍िल हो जाता है। बच्‍चों की डाइट में ताजे फल और सब्‍ज‍ियों को शाम‍िल करें, लेक‍िन बच्‍चों को रॉ सलाद देने से बचें।

डॉक्‍टर से सलाह कब लें?

  • अगर बच्‍चा पांच से छह साल तक ब‍िस्‍तर गीला कर रहा है।
  • पेशाब करते समय दर्द होना।
  • बहुत ज्‍यादा प्‍यास लगना।
  • पेशाब कंट्रोल न करना।

न‍िष्‍कर्ष:

बच्‍चों में बेडवेट‍िंग हमेशा क‍िसी बड़ी बीमारी का संकेत नहीं होता है, लेक‍िन खानपान से जुड़ी गलत‍ियां इसे बढ़ा सकती हैं। डाइट में फाइबर की कमी होना, ज्‍यादा मीठी और कैफीन युक्‍त चीजें खाना या सोने से पहले ज्‍यादा लिक्विड का सेवन करने से बच्‍चों में ब‍िस्‍तर गीला करने की समस्‍या हो सकती है। इससे बचने के ल‍िए एक्‍सपर्ट की सलाह लें।

FAQ

  • रात को ब‍िस्‍तर क्‍यों गीला करते हैं बच्‍चे?

    डाइट से जुड़ी गलत‍ियां जैसे रात को ज्‍यादा तरल चीजें लेना, कब्‍ज, यूटीआई, नींद में सांस की समस्‍या इसका कारण बन सकती हैं।
  • रात को ब‍िस्‍तर गीला करने की समस्‍या से बच्‍चे को कैसे बचाएं?

    सोने से पहले बच्‍चे को बाथरूम भेजें ताक‍ि ब्‍लैडर खाली हो सके, बच्‍चे को डांटने के बजाय प्‍यार से समझाएं और बच्‍चे का स्‍लीप रूटीन फ‍िक्‍स करें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 22, 2026 13:20 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 22, 2026 13:20 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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