हाई ब्लड प्रेशर सिर्फ वयस्कों की समस्या नहीं है। हाल के सालों में बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत देखने को मिलती है। हालांकि, यह अजीब लगता है, लेकिन बदलता खानपान, खराब जीवनशैली और खेलकूद की कमी के कारण बच्चों में इस तरह की परेशानी बढ़ रही है। चिकित्सीय भाषा में इसे पीडियाट्रिक हाइपरटेंशन कहा जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि छोटे बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर क्यों होता है और इस संबंध में माता-पिता को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस लेख में दिए गए सभी तथ्यों की पुष्टि नई दिल्ली के पंजाबी बाग स्थित cloudnine hospital में Pediatrician & Neonatologist डॉ. अभिषेक चोपड़ा ने की है।
बच्चों में ब्लड प्रेशर की नॉर्मल रेंज क्या है?
बच्चों का सामान्य ब्लड प्रेशर उनकी आयु और हाइट पर निर्भर करता है। छोटे बच्चों में बीपी कम होता है, जो उम्र के साथ बढ़कर किशोरावस्था तक वयस्कों (120/80 mmHg) के करीब पहुंच जाता है।
| उम्र (Age) | सिस्टोलिक (Systolic) | डायस्टोलिक (Diastolic) |
| 1-12 माह | 75 - 100 | 50 - 70 |
| 1-5 साल | 80 - 110 | 50 - 80 |
| 6-13 साल | 90 - 120 | 60 - 80 |
| 14-18 साल | 110 - 120 | 70 - 80 |
बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर का कारण
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प्राइमरी हाइपरटेंशन
प्राइमरी हाइपरटेंशन होने के पीछे जीवनशैली और आनुवंशिक कारणों से जोड़कर देखा जाता है, जैसे-- मोटापाः 2024 Clinical Hypertension में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार अधिक वजन वाले बच्चों में हाइपरटेंशन खतरा सबसे ज्यादा होता है। दरअसल, जब शरीर का वजन अधिक होता है, तो हृदय को शरीर के अंगों तक खून पहुंचाने के लिए सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे धमनियों पर दबाव बढ़ जाता है। नतीजतन, बीपी हाई हो जाता है। यही नहीं, फैट सेल्स ऐसे हॉर्मोन और रसायन भी छोड़ती हैं, जो रक्त वाहिकाओं में सूजन पैदा कर सकते हैं और उन्हें सिकोड़ सकते हैं, जिससे स्थिति और भी जटिल हो जाती है।
- पारिवारिक इतिहासः 1993 में Pediatric Clinics of North America में प्रकाशित स्टडी की मानें, अगर माता-पिता को बीपी की समस्या है, तो बच्चों में इसकी संभावना बढ़ जाती है। असल में, कुछ आनुवंशिक बदलाव शरीर में सोडियम (नमक) के संतुलन, हॉर्मोन के स्तर और रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता को बिगाड़ देते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
- खराब डाइटः खराब खान-पान बच्चों में बीपी बढ़ाता है। दरअसल, जो बच्चे जंक फूड और पैक्ड स्नैक्स का सेवन अधिक करते हैं, उनमें हाई बीपी की समस्या देखने को मिल सकती है। पैक्ड फूड या जंक फूड में नमक (सोडियम) की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर में पानी को रोकता है और धमनियों पर दबाव बढ़ाता है।
- एक्सरसाइज न करनाः ज्यादातर बच्चे एक्सरसाइज नहीं करते हैं, लेकिन खेलकूद में इन्वॉल्व रहते हैं। हाल के सालों में देखने को मिला है कि बच्चों में आउटडोर एक्टिविटी कम हो गई है। इसके बजाय घंटों स्क्रीन (मोबाइल/टीवी) के सामने बैठे रहते हैं। बच्चों के हार्ट पर इसका नेगेटिव असर पड़ता है। हार्ट कमजोर हो जाता है, जिससे ब्लड पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। ऐसे में धमनियों का लचीलापन कम हो जाता है और वे सख्त होने लगती हैं। यही नहीं, खेलकूद नहीं करने की वजह से बच्चों में मोटापा भी बढ़ जाता है, जो बीपी का एक अन्य कारण है।
सेकेंडरी हाइपरटेंशन
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- किडनी की बीमारीः National Kidney Foundation के अनुसार किडनी में खराबी या संक्रमण बच्चों में बीपी होने का एक कारण बन सकता है। दरअसल, जब किडनी ठीक से काम नहीं करती है, तो वे शरीर से अतिरिक्त नमक और पानी नहीं निकाल पाती है। ऐसे में ब्लड वॉल्यूम बढ़ जाता है। इसके अलावा, किडनी रेनिन नामक हॉर्मोन अधिक छोड़ने लगती है, जो रक्त वाहिकाओं को सिकोड़कर बीपी बढ़ा देता है।
- दिल की बीमारियांः American Heart Association की मानें, तो बच्चों में हृदय रोग (जैसे जन्मजात हृदय दोष) के कारण ब्लड फ्लो बाधित होता है। जब हृदय की बनावट में गड़बड़ी होती है, तो शरीर के सभी अंगों तक आसानी से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है। इस स्थिति में हार्ट को एक्स्ट्रा काम करना पड़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
- हार्मोनल असंतुलनः 2025 में Endotext पर प्रकाशित Endocrine Hypertension in Children and Adolescence किताब में इस बात का जिक्र मिलता है कि हार्मोनल इंबैलेंस भी ब्लड प्रेशर के स्तर को बढ़ा सकता है। असल में, एड्रिनल ग्रंथि से एल्डोस्टेरोन और कोर्टिसोल जैसे हॉर्मोन अधिक निकलने पर शरीर में नमक और पानी की मात्रा बढ़ जाती है। इससे रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और हृदय की धड़कन तेज हो जाती है, जिससे रक्तचाप बढ़ जाता है।
- दवाइयों के साइड इफेक्टः कुछ दवाएं बच्चों के शरीर में नमक और पानी का संतुलन बिगाड़कर या रक्त वाहिकाओं को सिकोड़कर ब्लड प्रेशर बढ़ा देती हैं। स्टेरॉयड, एडीएचडी के लिए दी जाने वाली दवाएं और कुछ जुकाम-खांसी की दवाएं हृदय गति तेज कर देती हैं, जिससे धमनियों पर दबाव बढ़ जाता है।
बच्चों में हाई बीपी के लक्षण
वयस्कों की तरह बच्चों में भी हाई बीपी के लक्षण शुरुआती स्तर में दिखाई नहीं देते हैं, इसलिए इसे साइलेंट किलर कहा जाता है। हालांकि, कुछ सामान्य संकेत जो नजर आते हैं, वे इस प्रकार हैं-- बार-बार सिरदर्द होना।
- जल्दी थकान महसूस होना या सांस फूलना।
- धुंधला दिखाई देना।
- अचानक नाक से खून आना।
- चिड़चिड़ापन।
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई।
- दिल की धड़कन का तेज होना।
बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर का निदान
बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर का निदान उनकी आयु, लंबाई और लिंग पर निर्भर करता है। निदान की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में होती है-- नियमित स्क्रीनिंगः डॉ. अभिषेक चोपड़ा की मानें, तो 3 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों का हर साल बीपी चेक किया जाना चाहिए। अगर बच्चा पहले से मोटापे से ग्रस्त है या उसे किडनी की बीमारी है, तो डॉक्टर नियमित रूप से बच्चों का बीपी चेक करते हैं।
- बार-बार बीपी का मापः अगर एक बार बच्चे का बीपी बढ़ा हुआ आता है, तो डॉक्टर तुरंत दवा नहीं देते हैं। वे अलग-अलग समय पर कम से कम 3 बार रीडिंग लेते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बच्चे को वाकई बीपी है।
- अन्य कारणों की जांचः बच्चों में बीपी क्यों बढ़ रहा है, इसके कारणों की जांच करने के लिए ब्लड टेस्ट (किडनी फंक्शन, कोलेस्ट्रॉल), यूरिन टेस्ट और हृदय की जांच के लिए इकोकार्डियोग्राम किया जाता है।
बच्चों को कब ले जाएं डॉक्टर के पास
अगर आपके बच्चे में नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह हाइपरटेंसिव क्राइसिस हो सकता है-- अचानक से तेज सिरदर्द होना।
- दौरे पड़ना।
- चेहरे या हाथों-पैरों में सूजन।
- छाती में दर्द या बहुत ज्यादा घबराहट।
- उल्टी होना और भ्रम की स्थिति।
माता-पिता के लिए जरूरी सुझाव
बच्चों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी पेरेंट्स की होती है। अगर बच्चा ब्लड प्रेशर का शिकार है, तो पेरेंट्स यहां बताए गए सुझावों का ध्यान रखकर स्थिति को नियंत्रित कर सकते हैं-- आहार में बदलावः बच्चों की डाइट में नमक कम करें। इसके लिए उन्हें पैकेट बंद फूड, सॉस, अचार और नमकीन जैसी चीजें खाने के लिए न दें। इसके बजाय, उनकी डाइट में ताजे फल और हरी सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं।
- शुगर कम करेंः छोटे बच्चों को शुगर युक्त चीजें जैसे कोल्ड ड्रिंक और मीठे जूस पीना काफी पसंद होता है। यह भी ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है। बच्चों को शुगर युक्त चीजें खाने के लिए कम दें।
- शारीरिक गतिविधिः बच्चे को कम से कम 60 मिनट रोजाना बाहर खेलने या शारीरिक गतिविधि के लिए प्रोत्साहित करें। इससे बच्चा फिजिकली एक्टिव रहता है और उनकी सेहत में भी सुधार होता है।
- स्क्रीन टाइम कम करें: डॉ. अभिषेक चोपड़ा का कहना है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम एक दिन में सिर्फ एक घंटे का होना चाहिए। इससे ज्यादा स्क्रीन टाइम उनके लिए सही नहीं है।
- वजन प्रबंधनः अगर बच्चा ओवरवेट है, उसके वजन को कंट्रोल करने की कोशिश करें। हालांकि, कुछ पेरेंट्स ओवर कॉन्शस होते हैं और बच्चों को तुरंत क्रैश डाइटिंग पर डाल देते हैं। यह सही नहीं है। इसके बजाय बच्चे को हेल्दी ईटिंग और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह दें।
- नियमित चेकअपः पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे अपने बच्चों का नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करवाएं। डॉ. अभिषेक चोपड़ा कहते हैं कि 3 साल की उम्र के बाद, हर साल बच्चे का ब्लड प्रेशर चेक करवाना चाहिए। खासकर, अगर बच्चे का जन्म समय से पहले हुआ है या उसे कोई हृदय संबंधी समस्या है, तो चेकअप और भी जरूरी है।
निष्कर्ष
बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर चिंता का विषय है, लेकिन अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान और सही जीवनशैली से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। पेरेंट्स को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए और समय-समय पर बच्चे में बीपी की जांच करवाते रहना चाहिए। ऐसा करने से समय पर ही समस्या का पता चल सकता है और समय पर इलाज शुरू हो सकता है।
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FAQ
बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर का सबसे मुख्य कारण क्या है?
खराब जीवनशैली, मोटापा और जंक फूड (अधिक नमक) बच्चों में हाई बीपी के प्राथमिक कारणों में माने जाते हैं।बच्चों में हाई बीपी के शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं?
आमतौर पर बीपी के शुरुआत लक्षण नजर नहीं आते हैं, लेकिन जो थोड़े बहुत लक्षण दिखते हैं, उसमें बच्चों में बार-बार सिरदर्द, थकान या धुंधली दृष्टि की शिकायत हो सकती है।क्या बच्चों में हाई बीपी जानलेवा हो सकता है?
अगर लंबे समय तक बीपी का इलाज न किया जाए, तो यह हृदय, गुर्दे और मस्तिष्क को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।क्या केवल मोटे बच्चों को ही हाई बीपी की समस्या होती है?
ऐसा नहीं है कि सिर्फ मोटापा ही बच्चों में हाई बीपी का कारण बनता है। दुबले बच्चों में आनुवंशिक कारणों, किडनी की बीमारी या हृदय से जुड़ी समस्या के कारण भी हाई बीपी हो सकता है।
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Current Version
May 06, 2026 09:58 IST
Modified By : Meera Tagore May 06, 2026 09:58 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Abhishek Chopra
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