सफेद चावल, कार्ब्स से भरपूर होते हैं और इनकी प्रकृति ठंडक प्रदान करने वाली हो सकती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अस्थमा में आप इसका सेवन करना बंद कर देंगे। यह हम नहीं बल्कि, Ms. Edwina Raj, Head of Services - Clinical Nutrition & Dietetics, Aster CMI Hospital, Bangaluru का कहना है। हालांकि, Ms. Aditi Prasad Apte, Senior - Clinical Nutritionist, Aster RV Hospital, Bangaluru ने सफेद चावल की तुलना में दूसरा हेल्दी ऑप्शन भी बताया है लेकिन पहले समझते हैं इस सावल का जवाब कि अस्थमा में चावल खाना चाहिए या नहीं?
दमा (अस्थमा) के मरीजों के लिए चावल का सेवन: सही या गलत?
Ms. Aditi Prasad Apte कहती हैं कि अस्थमा के मरीज चावल खा सकते हैं तो डाइट एक्सपर्ट Ms. Edwina Raj कहती हैं कि आम तौर पर अस्थमा वाले लोगों को चावल से परहेज करने की जरूरत नहीं होती है हालांकि, आयुर्वेद में बताया है कि अस्थमा में चावल खाने से कफ की समस्या बढ़ सकती हैं। साइंस इसे नहीं मानता बल्कि, चावल कार्बोहाइड्रेट का एक स्रोत है और अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति के संतुलित आहार का हिस्सा हो सकता है। ऐसा कोई पक्का सबूत नहीं है कि साधारण पके हुए चावल खाने से लोगों में सीधे तौर पर अस्थमा का दौरा पड़ता है।
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क्या चावल खाने से कफ बनता है या अस्थमा के लक्षण बढ़ते हैं? जानें साइंटिफिक सच
डाइट एक्सपर्ट एडविना कहती हैं कि चावल खाने से कफ नहीं बनता लेकिन कुछ लोगों को मानना है कि अस्थमा में लोग ठंडी चीजों को खाने से बचते हैं और चावल ठंडा माना जाता है जिससे कफ की समस्या बढ़ सकती है। हालांकि, आयुर्वेद में बताया गया है कि कफ दोष बढ़ने से लोगों को सर्दी-जुकाम और अस्थमा की समस्या हो जाती है। ऐसे में चावल जिसे शीतल गुणों वाला माना जाता है कफ दोष को और बढ़ा सकता है जिससे अस्थमा की समस्या बढ़ सकता है।
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गर्म चावल या ठंडा चावल: अस्थमा के मरीजों के लिए कौन-सा है सुरक्षित?
यह सवाल पूछने पर डाइट एक्सपर्ट एडविना कहती हैं कि अस्थमा के मरीजों को ठंडा चावल खाने से बचना चाहिए। हालांकि, आप गर्म चावल खा सकते हैं। इसके अलावा डाइट एक्सपर्ट एडविना कहती हैं कि अगर आप ब्राउन राइस का इस्तेमाल करें तो कफ बनने का डर भी खत्म हो जाएगा। दरअसल, ब्राउन राइस या कम रिफाइन किए गए अनाज में सफेद चावल की तुलना में ज्यादा फाइबर और पोषक तत्व होते हैं हालांकि, सफेद चावल भी सेहतमंद आहार का हिस्सा हो सकते हैं, बशर्ते उनकी मात्रा और बाकी खाने का ध्यान रखा जाए।
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अस्थमा के मरीजों को किन-किन चीजों से करना चाहिए परहेज?
डाइट एक्सपर्ट कहती हैं कि सबसे जरूरी बात यह है कि खान-पान अस्थमा की बताई गई दवा या इनहेलर ट्रीटमेंट की जगह नहीं ले सकता। अस्थमा को अच्छी तरह कंट्रोल करने के लिए जरूरी है कि आप उन चीजों की पहचान करें जिनसे आपको तकलीफ होती है जैसे
- किसी प्रकार के धूम्रपान से बचें क्योंकि यह फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है और अस्थमा को ट्रिगर कर सकती है।
- परागकण, धूल के कण, फफूंद और पालतू जानवरों की रूसी से अस्थमा ट्रिगर हो सकता है और वायुमार्गों में सूजन आ सकती है।
- सिगरेट का धुआं और तेज सुगंध फेफड़ों में जलन का कारण बन सकती है।
- ठंडी हवा और तापमान में अचानक बदलाव भी इसकी वजह बन सकती है
हालांकि, Maedica जर्नल में प्रकाशित यह शोध बताती है कि हेल्दी डाइट, विशेष रूप से पश्चिमी आहार (Western Diet) और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) का अस्थमा के विकास और उसे नियंत्रित करने में होने वाली कठिनाइयों के साथ गहरा संबंध है इसलिए घर का बना गर्म खाना खाएं और ज्यादा ऑयली और प्रोसेस्ड फूड्स के सेवन से बचें।
निष्कर्ष:
अंत में डाइट एक्सपर्ट एडविना कहती हैं कि ज्यादा जरूरी बात यह है कि आप कुल मिलाकर कैसा खाना खाते हैं और यह आपकी सेहत और बीमारी को कैसे प्रभावित करती है, इस बात पर निर्भर करती है। डाइट में सब्जियों, फलों, साबुत अनाज, दालों, नट्स और दूसरे पोषक तत्वों को शामिल करने से इस समस्या से बचा जा सकता है।
इसके अलावा इलाज के प्लान का पालन करें और लक्षण बिगड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें। कुछ लोगों को खाने की चीजो से अलग-अलग तरह की एलर्जी हो सकती है जिससे अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अस्थमा के मरीजो के लिए चावल ही नुकसानदायक है। अगर कोई खास खाना खाने के बाद बार-बार घरघराहट, खांसी या सांस लेने में तकलीफ होती है, तो बिना वजह खाने की चीजो को छोड़ने के बजाय एलर्जी की जांच करवानी चाहिए।
FAQ
अस्थमा किसकी वजह से होता है?
अस्थमा, असल में सांस नलियों में सूजन की वजह से होता है। यह धूल, प्रदूषण और पराग के कणों की वजह से ट्रिगर हो सकती है।क्या अस्थमा ठीक होता है?
अस्थमा जड़ से खत्म नहीं होता, लेकिन आप लाइफस्टाइल को सही करके इसे कंट्रोल कर सकते हैं। साथ ही इसके ट्रिगर को भी कंट्रोल करके इस समस्या से बचा जा सकता है।
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Current Version
Oct 01, 2026 17:29 IST
Published By : Pallavi Kumari
Reviewed By : Edwina Raj
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