ऑनलाइन मेडिकल रिसोर्स StatPearls में प्रकाशित किताब Alcohol-Associated Liver Disease में बताया है कि अल्कोहल जरूरत से ज्यादा लेने पर समय के साथ अल्कोहोलिक फैटी लिवर की समस्या हो सकती है और समय के साथ फैटी लिवर अल्कोहोलिक हेपाटाइटिस में बदल सकता है। समय पर इलाज न कराया जाए, तो अल्कोहोलिक सिरोसिस हो सकता है। इस कंडीशन में मरीज की होने वाली लिवर की खराबी को रिवर्स नहीं किया जा सकता। इस कंडीशन में बहुत ज्यादा शराब पीने से लिवर की कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं और लिवर में फाइब्रोसिस और गांठें बन जाती हैं। अल्कोहोलिक लिवर सिरोसिस की पूरी जानकारी लेने के लिए हमने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट, लैप्रोस्कोपिक, लेजर और जनरल सर्जन डॉ. नीरज धमीजा से बात की। उन्होंने बताया कि अल्कोहोलिक लिवर सिरोसिस में लिवर में इतने ज्यादा स्कार टिश्यू बनने के कारण उसका नॉर्मल तरीके से काम मुश्किल हो जाता है।
अल्कोहोलिक लिवर सिरोसिस के लक्षण
डॉ. नीरज धमीजा कहते हैं, "जो लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, उन्हें लिवर से जुड़ी बीमारियों के लक्षणों पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है। अल्कोहल की वजह से लिवर सिरोसिस होना बहुत ही गंभीर स्थिति है और इस स्थिति से बचाव के लिए मरीज को लक्षणों की जानकारी होना बहुत महत्वपूर्ण है।" Mayo Clinic के अनुसार, अल्कोहोलिक सिरोसिस में ये लक्षण होते हैं।
- मरीज को हर समय बहुत ज्यादा थकान महसूस होना
- शरीर पर बिना किसी चोट के नीले निशान पड़ना
- खाने की बिल्कुल इच्छा न होना और मतली महसूस होना
- पैरों, पंजों या टखनों में तरल जमा होने के कारण सूजन आना
- बिना किसी कारण वजन कम होने लगना
- शरीर पर खुजली महसूस होना
- स्किन और आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ना
- पेट का फूलना
- स्किन पर मकड़ी के जाले जैसी ब्लड वेसेल्स दिखना
- हथेलियों का लाल होना
- नाखूनों का पीला या सफेद पड़ना
- बहुत ज्यादा नींद आना
- बोलने में लड़खड़ाहट महसूस होना
- पुरुषों में ब्रेस्ट का बढ़ना
- महिलाओं में समय से पहले मेनोपॉज होना
- महिलाओं में ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकता है

यह भी पढ़ें- क्या फैटी लिवर में फिश खाना चाहिए?
अल्कोहोलिक लिवर सिरोसिस होने के कारण
डॉ. नीरज कहते हैं, "अल्कोहल की वजह से फैटी लिवर होने पर लिवर टॉक्सिन्स को फिल्टर नहीं कर पाता, इसलिए लिवर शराब को लेकर बहुत ज्यादा सेंसेटिव हो सकता है। जो लोग बहुत ज्यादा मात्रा में शराब पीते हैं, उनका लिवर तेजी से क्षतिग्रस्त हो सकता है। दरअसल, लगातार शराब पीने से इम्यून सिस्टम असामान्य रूप से एक्टिव हो जाता है। इस वजह से न्यूट्रोफिल्स और इंटरल्यूकिन्स लिवर के टिश्यू को डैमेज करने लगते हैं, जिससे लिवर में सूजन आ सकती है और अगर इसका समय पर इलाज न हो, तो परमानेंट डैमेज होने से लिवर सिरोसिस हो सकता है।"
बहुत ज्यादा अल्कोहल से होने वाली जटिलताएं
NHS के अनुसार, जो लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, उन्हें लिवर की बीमारियों की जटिलताएं जानलेवा तक हो सकती हैं।
- पोर्टल हाइपरटेंशन - जब लिवर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो ब्लड के लिए फ्लो करना मुश्किल हो जाता है, ऐसे में लिवर के अंदर और आंतों में ब्लड का प्रेशर बढ़ जाता है। प्रेशर बढ़ने पर खून की उल्टी हो सकती है।
- वारिसेस - ब्लड को वापस हार्ट तक लौटने के लिए छोटी-छोटी ब्लड वेसल्स की जरूरत पड़ती है। जब ब्लड फ्लो बाधित हो जाता है, तो ये छोटी-छोटी नसें फूल जाती हैं और कमजोर होने लगती हैं। इस कंडीशन में मरीज को काले रंग का स्टूल आता है।
- पेट में पानी भरना - हालांकि, पेट में पानी भरने के शुरुआती स्टेज में इसे दवाओं से ठीक किया जा सकता है, लेकिन अगर पेट में पानी ज्यादा भर जाए, तो इसे सुई से निकालना पड़ता है। इस कंडीशन में पानी जमा होने पर इंफेक्शन का रिस्क बढ़ सकता है और किडनी फेलियर का खतरा बढ़ सकता है।
- दिमाग पर असर पड़ना - अगर लिवर टॉक्सिन्स को बाहर नहीं निकाल पाता, तो मरीज के दिमाग पर इसका असर पड़ने लगता है। मरीजों को घबराहट, बोलने में दिक्कत, मांसपेशियों में अकड़न और अगर ज्यादा कंडीशन खराब हो जाए, तो मरीज कोमा में भी जा सकता है।
- लिवर कैंसर - जो लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, उन्हें लिवर कैंसर का रिस्क बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। आंकड़ों के अनुसार, सिरोसिस से पीड़ित 3% से 5% लोगों को हर साल लिवर कैंसर होने की संभावना रहती है।
यह भी पढ़ें- शराब से फैटी लिवर क्यों होता है?
कितनी मात्रा में शराब पीना ज्यादा माना जाता है?
CDC के अनुसार, बहुत ज्यादा शराब पीने के कारण जान गंवाने वाले लोगों की उम्र करीब 30 साल कम हो जाती है। इसमें सबसे खास बात यह है कि बहुत ज्यादा शराब पीने वाले ज्यादातर लोग पूरी तरह से शराब पर निर्भर नहीं होते। इसके अनुसार, ज्यादा शराब पीने वाले लोगों को चार भागों में बांटा है।
- बिंज ड्रिंकिंग - इसमें कहा गया है कि महिलाओं का किसी एक ही मौके पर 4 या उससे ज्यादा ड्रिंक लेना और पुरुषों का 5 या उससे ज्यादा ड्रिंक्स लेना
- हैवी ड्रिंकिंग - पूरे हफ्ते में महिलाओं का 8 या उससे ज्यादा ड्रिंक्स लेना और पुरुषों का पूरे हफ्ते के दौरान 15 या उससे ज्यादा ड्रिंक्स लेना
- प्रेग्नेंट महिलाओं का किसी भी मात्रा में शराब पीना
- 21 साल के कम उम्र के लोगों का किसी भी तरह की शराब पीना
अल्कोहोलिक लिवर सिरोसिस में कौन-से टेस्ट कराने चाहिए?
डॉ. नीरज कहते हैं, "लिवर सिरोसिस की पहचान के लिए कुछ लैब टेस्ट और अल्ट्रासाउंड किए जा सकते हैं। डॉक्टर लगातार मरीज की कंडीशन पर नजर रखता है, इसलिए सिरोसिस में बीमारी की कंडीशन और जटिलताओं को चेक करने के लिए रेगुलर टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है।"
- लिवर के चेकअप के लिए बिलिरुबिन का हाई लेवल होना चेक किया जा सकता है।
- किडनी के फंक्शन के लिए क्रिएटिनिन चेकअप की सलाह दी जा सकती है।
- ब्लड काउंट चेक करना और साथ ही हेपेटाइटिस वायरस की स्क्रीनिंग की जा सकती है।
- प्रोथ्रोम्बिन टेस्ट के जरिए ब्लड में थक्के जमने की जांच की जा सकती है।
- 'मॉडल फॉर एंड-स्टेज लिवर डिजीज' (MELD) स्कोर के जरिए लिवर के फंक्शन को चेक किया जाता है।
- MRI, CT स्कैन और अल्ट्रासाउंड से लिवर का चेकअप किया जाता है।
- अगर लिवर ज्यादा डैमेज या लिवर में कैंसर का रिस्क हो, तो बायोप्सी कराने की सलाह दी जा सकती है।
अल्कोहोलिक लिवर सिरोसिस का इलाज
डॉ. नीरज कहते हैं, "सिरोसिस की समय पर पहचान होने पर इसे मैनेज किया जा सकता है और मरीज कई सालों तक सामान्य जीवन बिता सकते हैं। जिन लोगों को शराब की वजह से लिवर सिरोसिस हुआ है, उन्हें शराब पूरी तरह से बंद करने की सलाह दी जाती है। शराब की थोड़ी सी भी मात्रा लिवर के लिए खतरनाक हो सकती है। अगर लिवर ट्रांसप्लांट होता है, तो भी शराब को पूरी तरह से बंद करना जरूरी होता है। इसके अलावा, दवाओं के जरिए भी सिरोसिस को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। सिरोसिस में होने वाली खुजली, थकान और दर्द जैसे लक्षणों के लिए भी दवाएं दी जा सकती हैं।"

यह भी पढ़ें- फैटी लिवर और लिवर सिरोसिस में क्या अंतर होता है? डॉक्टर से जानें
सिरोसिस से होने वाली जटिलताओं का इलाज
Mayo Clinic के अनुसार, अगर शरीर में पानी भरने लगता है, तो डाइट में नमक की मात्रा कम करने को कहा जा सकता है और साथ ही पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं दी जा सकती हैं।
- पोर्टल हाइपरटेंशन में नसों के प्रेशर को कम करने के लिए ब्लड प्रेशर की दवाएं दी जा सकती हैं। इसके अलावा, एंडोस्कोपी के जरिए खाने की नली में फूली हुई नसों को चेक किया जा सकता है।
- इंफेक्शन को रोकने के लिए एंटीबायोटिक्स और इंफ्लुएंजा, निमोनिया और हेपाटाइटिस के टीके लगवाने की सलाह दी जा सकती है।
- अगर लिवर बिल्कुल काम करना बंद कर देता है, तो लिवर ट्रांसप्लांट ही ऑप्शन होता है। इसमें जो लोग शराब छोड़ चुके होते हैं, उनका भी लिवर ट्रांसप्लांट किया जा सकता है।
शराब से होने वाले सिरोसिस से कैसे करें बचाव?
डॉ. नीरज कहते हैं, "जिन लोगों का लिवर शराब की वजह से क्षतिग्रस्त हुआ है, उनके लिए सबसे जरूरी है कि शराब का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। अगर किसी को शराब पीने की आदत पर कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा है, तो उसे डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। शराब की लत छोड़ने के लिए नशा मुक्ति केंद्र की मदद ली जा सकती है। इसके अलावा, फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। सही न्यूट्रिशन की मदद से लिवर को रिकवर होने में मदद मिलती है। फैटी लिवर से बचाव के लिए रोजाना एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी है। अगर किसी को लिवर सिरोसिस की दिक्कत है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर कसरत जरूर करें। बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर दवाएं बिल्कुल न लें और स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए मेडिटेशन और योग जरूर करना चाहिए।"
डॉक्टर से कब मिलें?
डॉ. नीरज कहते हैं कि जो लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, उन्हें अगर कोई भी लक्षण दिखाई देता है, तो डॉक्टर को तुरंत दिखाना चाहिए।
- आंखों या स्किन में पीलापन दिखना
- पेट और पैरों में सूजन दिखना
- खून की उल्टी या काला स्टूल दिखना
- शरीर पर बिना दाने होने पर लगातार खुजली होना
- शरीर पर बिना किसी चोट के नील पड़ना
यह भी पढ़ें- फैटी लिवर ग्रेड 1, 2 और 3 में क्या अंतर है? जानें इनके लक्षण, कारण, जांच और इलाज के बारे में
निष्कर्ष
शराब से होने वाले सिरोसिस की पहचान अगर शुरुआती स्टेज पर ही हो जाए, तो तुरंत शराब छोड़ने से लिवर की क्षति को रोका जा सकता है, लेकिन सिरोसिस में इसे पूरी तरह से ठीक करना मुश्किल होता है। दवाओं के जरिए इसकी जटिलताओं के रिस्क को कम किया जा सकता है। जो लोग सिरोसिस होने के बाद भी शराब पीते हैं, तो उनकी सिरोसिस की बीमारी तेजी से बढ़ने लगती है और लिवर कैंसर व लिवर फेलियर के रिस्क को कई गुना तक बढ़ा सकती है। लिवर सिरोसिस अगर आखिरी स्टेज पर पहुंच गया है और शराब छोड़ने के बावजूद लिवर काम नहीं कर रहा, तो लिवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी जा सकती है। इसलिए लिवर को सेहतमंद रखने के लिए शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।
FAQ
क्या अल्कोहोलिक लिवर डिजीज पूरी तरह ठीक हो सकती है?
अगर फैटी लिवर शुरुआती स्टेज पर है, तो शराब को पूरी तरह से बंद करके और सेहतमंद लाइफस्टाइल अपनाकर लिवर की क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर कंडीशन लिवर सिरोसिस तक पहुंच चुकी है, तो लिवर के लक्षणों को मैनेज करके जटिलताओं के रिस्क को कम करने की कोशिश की जाती है।अगर मुझे अल्कोहोलिक लिवर डिजीज है, तो क्या मैं कम मात्रा में शराब पी सकता हूं?
शराब पीने के कारण लिवर की बीमारी होने पर शराब का कम मात्रा में पीना भी जानलेवा हो सकता है। इससे लिवर तेजी से डैमेज हो सकता है। इसलिए डॉक्टर शराब का बिल्कुल सेवन बंद करने की सलाह देते हैं।क्या लिवर डैमेज होने पर भी लिवर फंक्शन टेस्ट नॉर्मल आ सकता है?
कई मामलों में शुरुआती अल्कोहोलिक लिवर डिजीज में लिवर टेस्ट में थोड़ा-बहुत बदलाव देखने को मिल सकता है। इसलिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट के साथ अल्ट्रासाउंड या फाइब्रोस्कैन कराने की भी सलाह देते हैं।शराब पीने वाले मरीजों के पेट में पानी भरने का क्या मतलब है?
जो लोग शराब पीते हैं या फिर नहीं भी पीते हैं, लेकिन पेट में पानी भर रहा है, तो इसका मतलब है कि सिरोसिस एडवांस स्टेज में पहुंच चुका है। इसके इलाज के लिए डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।लिवर सिरोसिस का मरीज कितने समय तक जीवित रह सकता है?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज का सिरोसिस किस स्टेज पर है। अगर मरीज ने शराब छोड़ दी है और सही इलाज हो रहा है, तो 10 से 12 साल या उससे भी ज्यादा जीवित रह सकता है। अगर पेट में पानी भरना या खून की उल्टी हो रही है, तो बिना ट्रांसप्लांट के दवाओं के सहारे मरीज दो साल तक जीवित रह सकता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण मरीज की कंडीशन है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Apr 25, 2026 16:43 IST
Modified By : Aneesh Rawat Apr 25, 2026 16:43 IST
Modified By : Aneesh RawatApr 25, 2026 16:43 IST
Modified By : Aneesh RawatApr 25, 2026 16:43 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Neeraj Dhamija