Fri Sep 11, 2026 | 07:34 PM IST

Medically Reviewed by Dr Naveen Polavarapu , Gastroenterologist

किचन स्पंज बन सकता है बीमारियों की जड़, रोजाना इस्तेमाल से पहले जान लें खतरे

किचन स्पंज देखने में साफ लगता है, लेकिन इसमें खतरनाक बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इससे फूड पॉइजनिंग और पेट की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। जानें किचन स्पंज से होने वाले नुकसान और खतरे से बचने के आसान तरीके।

आज की तेज रफ्तार जि‍ंदगी में किचन स्पंज की मदद से हम आसानी से बर्तन और क‍िचन काउंटर साफ कर लेते हैं और क‍िचन में इसका होना बहुत जरूरी लगता है। अगर आपसे कहें क‍ि यही छोटा सा स्पंज चुपचाप खतरनाक बैक्टीरिया का घर बन सकता है और गंभीर बीमारियों की वजह भी बन सकता है तो क्‍या आप यकीन करेंगे? रिसर्च बताती है कि किचन स्पंज में टॉयलेट सीट से भी ज्‍यादा कीटाणु होते हैं। Dr. Naveen Polavarapu, Senior Consultant, Medical Gastroenterologist, Liver Specialist, Lead-Advanced Endoscopic Interventions & Training, Clinical Director, Yashoda Hospitals, Hyderabad ने बताया क‍ि एक वर्ग सेंटीमीटर में लगभग 45 अरब बैक्टीरिया। इनमें ई. कोलाई (E. Coli), साल्मोनेला (Salmonella) और एंटीबायोटिक-रेजि‍स्टेंट बैक्टीरिया तक शामिल हो सकते हैं। इस लेख में जानेंगे क‍िचन स्‍पंज से जुड़े सेहत के खतरों के बारे में।

क‍िचन स्‍पंज में टॉयलेट सीट से ज्‍यादा बैक्‍टीर‍िया हो सकते हैं

स्पंज हमेशा गीला रहता है, उसमें छोटे-छोटे छेद होते हैं और खाने के कण चिपके रहते हैं। यह बैक्टीरिया बढ़ने के लिए सबसे अच्छा माहौल है इसल‍िए कुछ र‍िसर्च में यह कहा गया है क‍ि क‍िचन स्‍पंज में टॉयलेट सीट से भी ज्‍यादा बैक्‍टीर‍िया हो सकते हैं। Dr. Naveen Polavarapu ने बताया क‍ि बर्तन धोने का पानी, बचा हुआ खाना और सिंक की गर्मी बैक्टीरिया को तेजी से बढ़ने में मदद करती है। ये कीटाणु सिर्फ स्पंज तक सीमित नहीं रहते, बल्कि प्लेट, चम्मच और हाथों पर फैल जाते हैं और खाने के साथ या छोटे कट के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

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फूड पॉइजनिंग और स्‍टमक फ्लू का खतरा- Kitchen Sponge May Cause Food Poisoning And Stomach Flu

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सेहत पर क‍िचन स्‍पंज के इस्‍तेमाल का गंभीर असर हो सकता है-

  • क‍िचन स्‍पंज के बार-बार संपर्क से फूड पॉइजनिंग और स्‍टमक फ्लू जैसी बीमारियां हो सकती हैं, जिनमें उल्टी, दस्त और पेट दर्द शामिल हैं।
  • बच्चों, बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों (जैसे डायबिटीज या कैंसर के मरीज) में यह समस्या और गंभीर हो सकती है, जिससे डिहाइड्रेशन, किडनी की दिक्कत या खून में इंफेक्शन तक हो सकता है।
  • लंबे समय तक हल्का इंफेक्‍शन पेट के गुड बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम और इम्यूनिटी कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है।

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बीमार‍ियों से बचने के ल‍िए क‍िचन स्‍पंज का इस्‍तेमाल कैसे करें?- How To Use Kitchen Sponge To Prevent Diseases

  • स्पंज को हर हफ्ते या ज्‍यादा इस्तेमाल के बाद बदल दें।
  • रोज गीले स्पंज को एक मिनट माइक्रोवेव में रखें या डिशवॉशर के सैनिटाइज मोड में धोएं। इससे 99% बैक्टीरिया मर जाते हैं।
  • कच्चे मांस के लिए सिलिकॉन स्क्रबर या पेपर टॉवल का इस्तेमाल करें।
  • सब्जि‍यों और मांस के लिए अलग-अलग स्पंज रखें और इस्तेमाल के बाद स्पंज को अच्छी तरह सुखाएं।

न‍िष्‍कर्ष:

छोटी-सी आदत बदलकर आप अपने परिवार की सेहत सुरक्षित रख सकते हैं। साफ स्पंज मतलब स्वस्थ किचन। इस रोजमर्रा की चीज को अपनी सेहत पर भारी न पड़ने दें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jan 07, 2026 14:17 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jan 07, 2026 14:17 IST

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