Fri Sep 11, 2026 | 08:19 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

गर्मियों में ज्यादा गन्ने का जूस पीना पड़ सकता है भारी, जानें छिपे नुकसान

गर्मि‍यों में शरीर को ठंडक देने के ल‍िए गन्ने का जूस खूब प‍िया जाता है। इसे पीते ही ताजगी महसूस होती है। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच गन्ने का जूस शरीर को तुरंत राहत देता है, लेक‍िन यह पेट के ल‍िए नुकसानदायक भी हो सकता है। जानते हैं कैसे?

गन्ने का जूस सेहत के ल‍िए फायदेमंद माना जाता है। गन्ने के जूस में कार्ब्स, कैल्‍श‍ियम, पोटैश‍ियम जैसे पोषक तत्‍व पाए जाते हैं। इसे पीकर शरीर में इंस्‍टेंट एनर्जी आ जाती है। इसी वजह से लोग गर्मि‍यों में इसे पीना पसंद करते हैं। एक्‍सपर्ट्स मानते हैं क‍ि जरूरत से ज्‍यादा गन्ने के जूस का सेवन पेट की समस्‍याओं का कारण बन सकता है। गन्ने का जूस अक्‍सर सड़क क‍िनारे ठेलों पर ब‍िकता नजर आता है, जहां हाइजीन की कमी हो सकती है ज‍िसके कारण पेट दर्द, फूड पॉइजन‍िंग और पेट में इंफेक्‍शन जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। पेट के ल‍िए गन्ने के जूस के नुकसान जानने के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

गर्मि‍यों में पेट की सेहत के ल‍िए क्‍यों हान‍िकारक है गन्ने का जूस?

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अगर आप सड़क क‍िनारे ब‍िकने वाला गन्ने का जूस पीते हैं, तो सावधान हो जाएं। ऐसे ठेलों या दुकानों पर सफाई की कमी हो सकती है ज‍िससे जूस में बैक्‍टीर‍िया पनप सकते हैं और इससे पेट दर्द, उल्‍टी, डायर‍िया, फूड पॉइजन‍िंग वगैरह का खतरा बढ़ जाता है। अगर गन्ने का जूस खुला रखा हो या गन्ना या जूस की मशीन साफ न हो, तो पेट में इंफेक्‍शन, पेट में ऐंठन और कमजोरी महसूस हो सकती है। बच्‍चों और बुजुर्गों में यह समस्‍या ज्‍यादा गंभीर हो सकती है।

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गंदे पानी और अस्‍वच्‍छ वातावरण के कारण दूष‍ित हो जाता है गन्ने का जूस

2024 में International Journal Of Home Science नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, गुजरात के आनंद शहर के अलग-अलग इलाकों से गन्ने के जूस के 30 सैंपल ल‍िए गए। जांच में बैक्‍टीर‍िया और फंगस की पुष्टि हुई। स्‍टडी में ई.कोलई (E.coli) और बैसिलस सेरेस (Bacillus cereus) जैसे हान‍िकारक बैक्‍टीर‍िया भी म‍िले। स्‍टडी में यह भी बताया गया क‍ि सड़कोंं पर ब‍िकने वाला गन्ने का जूस हाइजीन की कमी, गंदे पानी का इस्‍तेमाल और अस्‍वच्‍छ मशीनों के कारण पीने लायक नहीं है। जो लोग इसका अध‍िक सेवन करते हैं उनमें पेट का इंफेक्‍शन और फूड पॉइजन‍िंग जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।

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सुरक्ष‍ित ढंग से गन्ने का जूस कैसे प‍िएं?

  • द‍िनभर में एक से दो ग‍िलास से ज्‍यादा गन्ने का जूस न पि‍एं।
  • गन्ने का जूस केवल भरोसेमंद दुकान से लेकर प‍िएं।
  • गन्ने का जूस बर्फ के बगैर प‍िएं।
  • दुकान, मशीन और जूस की क्वालिटी चेक करें।
  • खाली पेट गन्ने का जूस पीने से बचें।
  • अगर पेट दर्द या डायर‍िया जैसे लक्षण नजर आएं, तो जूस का सेवन न करें।

न‍िष्‍कर्ष:

गंदे पानी और अस्‍वच्‍छ वातावरण के कारण गर्मि‍योंं में गन्ने के जूस का सेवन पेट के ल‍िए हान‍िकारक हो सकता है। गंदगी के कारण इसमें पनपने वाले बैक्‍टीर‍िया पेट में इंफेक्‍शन, फूड पॉइजन‍िंग, पेट दर्द जैसी समस्‍याओं का कारण बन सकते हैं।

FAQ

  • गन्ने का जूस पीने के क्‍या फायदे हैं?

    गन्ने का जूस पीकर थकान और कमजोरी दूर होती है, लू और ड‍िहाइड्रेशन से बचाव के ल‍िए यह जूस फायदेमंद होता है। इसमें मौजूद नेचुरल शुगर शरीर को तुरंत एनर्जी देते हैं। 
  • गन्ने का जूस क‍िसे नहीं पीना चाह‍िए?

    डायब‍िटीज, हाई शुगर लेवल, खराब पाचन, मोटापे से पीड़ि‍त लोग, बच्‍चे और बुजुर्गों को ज्‍यादा मात्रा में गन्ने का जूस पीने से बचना चाह‍िए।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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