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गन्ने का जूस पीने के बाद भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, बि‍गड़ सकता है पाचन

गन्ने का जूस पीने के बाद तला-भुना, खट्टे फल, दही, मिठाई और ठंडी चीजें न खाएं, वरना पाचन बिगड़ सकता है और गैस या दस्त जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।

गर्मी के मौसम में गन्ने का रस एक बेहतरीन प्राकृतिक ड्रिंक है, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि थकान, डिहाइड्रेशन और पाचन की समस्याओं में भी राहत देता है। गन्ने का जूस मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है, जो शरीर एनर्जी को तेजी से बढ़ाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गन्ने का रस पीने के तुरंत बाद कुछ चीजें खाना आपके पाचन को बिगाड़ सकता है? कई लोग इसे हेल्दी मानकर बिना सोचे-समझे साथ में कोई भी खाना खा लेते हैं, जिससे पेट में एसिडिटी, पेट फूलना, गैस या डायरिया जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। खासकर जिन लोगों का पाचन पहले से कमजोर है, उन्हें गन्ने का रस पीने के बाद कुछ चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। इस लेख में हम बताएंगे कि गन्ने का रस पीने के बाद किन 5 चीजों को तुरंत खाने से परहेज करना चाहिए ताकि आपका पाचन संतुलित बना रहे। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के व‍िकास नगर में स्‍थ‍ित‍ न्‍यूट्र‍िवाइज क्‍लीन‍िक की न्‍यूट्र‍िशन‍िस्‍ट नेहा स‍िन्‍हा से बात की।

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1. ऑयली और तला भुना भोजन- Oily and Fried Foods

गन्ने का जूस अपने आप में मीठा और भारी होता है। ऐसे में इसके बाद ऑयली या तला-भुना खाना खाने से पाचन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। शरीर को एक साथ इतनी एनर्जी और फैट को पचाने में दिक्कत होती है, जिससे पेट में एसिडिटी और पेट दर्द की श‍िकायत हो सकती है।

इसे भी पढ़ें- क्या गर्मियों में रोज गन्ने का जूस पीना सही है? जानें एक्सपर्ट से

2. खट्टे फल और जूस- Citrus Fruits and Juices

गन्ने के रस में प्राकृतिक शुगर होती है। अगर इसके तुरंत बाद नींबू, संतरा या मौसमी जैसे खट्टे फल या उनके रस का सेवन किया जाए, तो ये पेट में एसिड का असंतुलन हो सकता है। इससे पेट में गैस, जलन या उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

3. दही या छाछ- Curd or Buttermilk

हालांकि दही और छाछ पाचन के लिए अच्छे माने जाते हैं, लेकिन गन्ने के रस के बाद इनका सेवन तुरंत करना फायदेमंद नहीं होता। गन्ने का रस शरीर को ठंडक देता है और दही भी ठंडी तासीर का होता है। इन दोनों के साथ सेवन से पाचन तंत्र ब‍िगड़ सकता है और कब्ज की समस्या हो सकती है।

4. भारी भोजन या मिठाइयां- Heavy Meals or Sweets

गन्ने का जूस अपने आप में कैलोरीज और शुगर से भरपूर होता है। इसके तुरंत बाद कोई भारी खाना या मिठाई खाने से पाचन पर दबाव पड़ता है। इससे शरीर में इंसुलिन का लेवल तेजी से बढ़ सकता है और थकान के लक्षण या सुस्ती महसूस हो सकती है।

5. आइसक्रीम या कोल्ड ड्रिंक्स- Ice Cream or Cold Drinks

गन्ने का रस पहले से ही ठंडा होता है। अगर उसे पीने के बाद अन्‍य ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम या कोल्ड ड्रिंक ले ली जाएं, तो पेट में ठंडक बढ़ जाती है, जिससे पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। इससे पेट में गैस, पेट दर्द या दस्त की समस्या हो सकती है।

गन्ने का रस गर्मी में सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, लेकिन उसे सही तरीके से लेना जरूरी है। गन्ने का रस पीने के बाद ऑयली, खट्टी या ठंडी चीजों से परहेज करें।

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FAQ

  • गन्ने का जूस पीने के बाद पेट में दर्द क्यों होता है?

    गन्ने का जूस बासी हो सकता है, जिससे पेट में गैस, मरोड़ या दर्द हो सकता है। साथ ही, कुछ लोगों को इसकी मिठास से पाचन में दिक्कत हो सकती है।
  • गन्ने का रस पीने के नुकसान

    ज्‍यादा मात्रा में गन्ने का रस पीने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है, पेट फूल सकता है और दांतों में सड़न की संभावना रहती है। गंदी जगह से रस पीने के कारण इंफेक्‍शन भी हो सकता है।
  • गन्ने का रस कब नहीं पीना चाहिए?

    डायबिटीज के मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के गन्ने का रस नहीं पीना चाहिए। बुखार, सर्दी या दस्त के समय भी इसका सेवन करने से हालत बिगड़ सकती है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 14, 2025 17:30 IST

    Published By : Yashaswi Mathur

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