Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

हेल्‍थ के चक्‍कर में ज्‍यादा फल खाना पड़ न जाए भारी, एक्‍सपर्ट से जानें सही मात्रा

सेहत के ल‍िए फलों का सेवन फायदेमंद होता है। इसमें पाए जाने वाले व‍िटाम‍िन और म‍िनरल शरीर को हेल्‍दी रखते हैं, लेक‍िन जरूरत से ज्‍यादा फल खाना भी सेहत को खराब कर सकता है। जानें क्‍या है सही मात्रा?

गर्मि‍योंं में फलों का सेवन सेहत के ल‍िए फायदेमंद होता है। फलों में व‍िटाम‍िन, म‍िनरल, फाइबर, एंटीऑक्‍सीडेंट जैसे पोषक तत्‍व पाए जाते हैं ज‍िससे शरीर को कई बीमार‍ियों से बचाने में मदद म‍िलती है। इम्‍यून‍िटी हो या वेट लॉस सेहत के ल‍िए फलोंं का सेवन फायदेमंद होता है। फलों के फायदे देखते हुए कुछ लोग ज्‍यादा फल खाने लगते हैं। इससे सेहत को नुकसान हो सकता है क्‍योंक‍ि जरूरत से ज्‍यादा फल खाने से शरीर में शुगर और कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है। ज्‍यादा फल खाने के नुकसान और फल खाने की सही मात्रा जानने के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

ज्यादा फल खाने से क्या नुकसान हो सकते हैं?

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  • फल में नेचुरल शुगर होती है। जरूरत से ज्‍यादा फल खाने से शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ सकती है। खासतौर पर डायब‍िट‍िक मरीजों को ज्‍यादा मीठे फल खाने से बचना चाह‍िए।
  • फलों में फाइबर की मात्रा ज्‍यादा होती है। जरूरत से ज्‍यादा फाइबर लेने से पेट में गैस, पेट फूलना, ऐंठन, दस्‍त जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • कुछ लोग वेट लॉस के ल‍िए ज्‍यादा फलोंं का सेवन करते हैं, इससे शरीर में प्रोटीन, हेल्‍दी फैट और अन्‍य जरूरी पोषक तत्‍वों की कमी हो सकती है।
  • अगर व्‍यक्‍त‍ि हेल्‍दी डाइट नहीं लेता है और ज्‍यादा मीठे फलों का सेवन करता है, तो वजन भी बढ़ सकता है। साल 2016 में Nutrients नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, फलोंं में फाइबर, व‍िटाम‍िन, म‍िनरल्‍स पाए जाते हैं। हालांंक‍ि, जरूरत से ज्‍यादा फलोंं का सेवन मोटापे का जोख‍िम बढ़ा सकता है। स्‍टडी में यह भी बताया गया है क‍ि संतुल‍ित मात्रा में ही प्रोसेस्‍ड शुगर और फलों का सेवन करना चाह‍िए।

जूस के बजाय फल खाएं

कई लोग फल खाने के बजाय जूस का सेवन करना पसंद करते हैं, लेक‍िन चाहे पैक्‍ड जूस हो या होममेड जूस, वह फल ज‍ितना सेहतमंद नहीं होता है क्‍योंक‍ि फल में फाइबर ज्‍यादा होता है। फलों का जूस शुगर लेवल बढ़ा सकता है। साथ ही पैकेज्‍ड जूस में अत‍िर‍िक्‍त चीनी भी होती है ज‍िससे सेहत को नुकसान हो सकता है।

दिनभर में फलों के दो से तीन पोर्शन खा सकते हैं

  • एक मध्‍यम आकार का फल खा सकते हैं।
  • एक कप कटे हुए फल खा सकते हैं।
  • आधा कप बेरीज का सेवन कर सकते हैं।

फल खाने का सही तरीका क्‍या है?

  • एक ही फल खाने के बजाय अलग-अलग मौसमी फलों को डाइट का ह‍िस्‍सा बनाएं।
  • फलों को नट्स और प्रोटीन युक्‍त चीजों के साथ खाएं।
  • रात में फलों का सेवन करने से बचें।
  • फलों को अच्‍छी तरह से धोकर खाएं।

निष्कर्ष:

फलों का सेवन सेहत के ल‍िए फायदेमंद है, लेक‍िन जरूरत से ज्‍यादा फल खाने से पाचन समस्‍याएं हो सकती हैं और ज्‍यादा मीठे फल खाने से शुगर लेवल बढ़ सकता है, हालांक‍ि फलों में नेचुरल शुगर होती है इसलि‍ए शुगर लेवल तेजी से नहीं बढ़ता है।

FAQ

  • क्‍या डायब‍िटीज में आम खा सकते हैं?

    डायब‍िटीज में आम खा सकते हैं, लेक‍िन जरूरत से ज्‍यादा मात्रा में आम नहीं खाना चाह‍िए इसमें नेचुरल शुगर होती है ज‍िससे शुगर लेवल बढ़ सकता है। हालांक‍ि, डायब‍िटीज में एक्‍सपर्ट आम से परहेज करने की सलाह नहीं देते हैं।
  • क्‍या डायब‍िटीज में केला खा सकते हैं?

    डायब‍िटीज में केला खा सकते हैं, लेक‍िन ज्‍यादा पका हुआ केला न खाएं। केवल केला खाने के बजाय उसे सादे दही, नट्स या प्रोटीन वाली चीजों के साथ खाएं।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 25, 2026 11:29 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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