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पेट में कब्‍ज, गले की खराश जैसी इन 5 समस्‍याओं को दूर करता है ह‍िंगोट फल, जानें फायदे

ह‍िंगोट के फल से मुंहासे, कब्‍ज की समस्‍या आद‍ि दूर होती है, जानें अन्‍य फायदे

कई देशों में ह‍िंगोट (Hingot) का पेड़ पाया जाता है पर भारत की बात करें तो ये दक्ष‍िण भारत में ज्‍यादा पाया जाता है। ह‍िंगोट का पेड़ लगभग 33 फ‍ीट लंबा होता है। ह‍िंगोट के पेड़ की छाल, पत्‍ते और फल का इस्‍तेमाल आयुर्वेद में बीमार‍ियों को दूर करने के ल‍िए क‍िया जाता है। ह‍िंगोट का फल स्‍वाद में कड़वा और हल्‍का तीखा होता है। ह‍िंगोट के फल के गूदे से भी शरीर की कई समस्‍याओं का इलाज क‍िया जाता है जैसे कब्‍ज की समस्‍या, डायर‍िया, मुंहासे आद‍ि। इस लेख में हम हिंगोट के फल के फायदों पर चर्चा करेंगे। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के व‍िकास नगर में स्‍थित प्रांजल आयुर्वेद‍िक क्‍लीन‍िक के डॉ मनीष स‍िंह से बात की।

hingot fruit 

(image source:combonimissionaries)

1. हिंगोट से दूर होती है कब्‍ज की समस्‍या (Hingot fruit cures constipation)

कब्‍ज की समस्‍या होने पर आप ह‍िंगोट के फल का गूदा खाएं तो पेट में कब्‍ज, गैस आद‍ि समस्‍याएं नहीं होंगी। कब्‍ज की समस्‍या दूर करने के ल‍िए आप ह‍िंगोट के गूदे को दही में म‍िलाकर सुबह-सुबह इसका सेवन कर सकते हैं। हिंगोट का फल एंटी-डायब‍िटीक माना जाता है, इससे ब्‍लड शुगर लेवल भी कंट्रोल होता है, अगर आपको डायब‍िटीज है और शुगर लेवल कंट्रोल करना है तो इस फल का सेवन कर सकते हैं।

2. मुंहासे की समस्‍या दूर करने ह‍िंगोट (Hingot fruit cures acne)

स्‍क‍िन में बढ़ते मुंहासे का उपाय ढूंढ रहे हैं तो ह‍िंगोट का इस्‍तेमाल करें। ह‍िंगोट के फल के गूदे को ठंडे पानी में म‍िलाकर मुंहासे पर लगाएं तो कुछ द‍िन में मुंहासे ठीक हो जाएंगे। आप ह‍िंगोट के गूद में पपीते का गूदा और हल्‍दी म‍िलाकर लगाएं तो मुंहासे के न‍िशान भी ठीक हो जाते हैं। स्‍क‍िन से जुड़ी अन्‍य समस्‍याओं को दूर करने के ल‍िए भी ह‍िंगोट फायदेमंद माना जाता है जैसे ड्राय स्‍क‍िन, स्‍किन रैश आदि।

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3. हिंगोट से दूर होती है गले की खराश (Hingot fruit cures sore throat)

गले में खराश या खांसी की समस्‍या होने पर आप ह‍िंगोट के फल का गूदा खाएं इससे गले की खराश ठीक होती है। ह‍िंगोट के फल के गूदे को गुनगुने पानी में म‍िलाकर पीने से भी खराश दूर होती है। ज‍िन लोगों को फैटी लिवर की श‍िकायत होती है वो भी हिंगोट के फल का सेवन कर सकते हैं। 

4. आंखों से पानी आने की समस्‍या दूर करे ह‍िंगोट (Hingot fruit cures watery eyes)

hingot fruit benefits

(image source:imimg.com)

आंख से पानी आ रहा है तो ह‍िंगोट के फल के गूदे को पानी में घ‍िसकर आंख पर लगाएं इससे आंख से पानी आने की समस्‍या दूर हो जाएगी। आपको गूदे को आंख पर ऐसे लगाना है जैसे काजल लगाते हैं यानी वॉटर लाइन पर एप्‍लाई करें। ह‍िंगोट के फल के गूदे को आंख के आसपास के एर‍िया में सूजन को दूर करने के ल‍िए भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं, लेक‍िन आपको गूदे को आंख के अंदर लगाने से बचना है।

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5. त्‍वचा में जलन होने पर इस्‍तेमाल करें ह‍िंगोट (Hingot fruit cures burnt skin)

अगर आपकी त्‍वचा जल गई है तो ह‍िंगोट के फल का गूदा त्‍वचा पर लगा लें, इससे आराम म‍िलेगा या ह‍िंगोट की गुठली से निकलने वाला तेल भी लगाएंगे तो जलन होने पर रेडनेस और दर्द से राहत म‍िलेगी। त्‍वचा जल जाने पर आप हिंगोट के फल के गूदे को शहद के साथ म‍िलाकर त्वचा पर लगाकर छोड़ दें, आधे घंटे बाद ठंडे पानी से त्‍वचा को साफ कर लें, इससे जलन चली जाएगी। हिंगोट के फल के बीज से न‍िकलने वाले तेल से घाव भी ठीक हो जाते हैं।

अगर आप क‍िसी गंभीर बीमारी या स्‍किन ड‍िसीज के मरीज हैं तो आपको हिंगोट का सेवन डॉक्‍टर की सलाह लेकर ही करना चाह‍िए।

(main image source:squarespace,wikimedia)

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 27, 2021 00:00 IST

    Published By : Yashaswi Mathur

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