Fri Sep 11, 2026 | 08:23 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

हरी या गोल्डन कीवी: क्‍या है सेहत के ल‍िए ज्यादा फायदेमंद? एक्‍सपर्ट से जानें

कीवी दो प्रकार का होता है एक हरा और दूसरी गोल्‍डर कीवी। ज्‍यादातर लोग हरे कीवी के बारे में जानते हैं। दोनों कीवी का स्‍वाद लगभग एक जैसा होता है। गोल्‍डन कीवी हल्‍का मीठा ज्‍यादा होता है। दोनों में कैलोरी भी लगभग एक जैसी होती हैं। जानते हैं सेहत के ल‍िए क्‍या ज्‍यादा फायदेमंद है?

पहली बार मैंने श‍िमला में कीवी खाया था, इससे पहले मुझे क‍ीवी के बारे में कुछ भी पता नहीं था। कीवी का खट्टा स्‍वाद मुझे पसंद नहीं आया, लेक‍िन मां ने बताया क‍ि बहुत हेल्‍दी होता है, तो मैंने कुछ कहे बगैर उसे खा ल‍िया था। जब मैं जयपुर में रहती थी, तो यह फल मुझे कभी मंडी में द‍िखाई नहीं द‍िखा, अब तो लगभग हर फल के ठेले पर कीवी नजर आ सकता है। पहले के द‍िनों में कीवी एक्‍जॉट‍िक फल (Exotic Fruit) कहलाता था, यह आसानी से देखने को नहीं म‍िलता था, पर अब एवोकाडो हो या कीवी, लोकल मार्केट में सब कुछ म‍िल जाता है। मेरे घर के पास स्‍थ‍ित एक मॉल में मैंने गोल्‍डन और हरी दोनों कीवी देखी, तब जाकर मुझे दोनों के बारे में पता चला। मुझे लगता था क‍ि क‍ीवी का रंग केवल हरा हो सकता है। अच्‍छी सेहत के ल‍िए यह जानना जरूरी है क‍ि हरी और गोल्‍डन कीवी के रंग में ही अंतर है इनके बीच कोई और अंतर भी है जो हेल्‍थ को फायदे या नुकसान पहुंचा सकता है? इस लेख में जानेंगे क‍ि हरे और ग्रीन कीवी में से सेहत के ल‍िए क्‍या ज्‍यादा हेल्‍दी है?

हरी और गोल्‍डन कीवी दोनों ही हैं सेहत के हीरो

Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow ने बताया क‍ि हरी और गोल्‍डन दोनों कीवी में कैलोरी की मात्रा लगभग एक जैसी होती हैं। दोनों ही कीवी में व‍िटाम‍िन सी, ई, पोटेश‍ियम, फाइबर जैसे पोषक तत्‍व पाए जाते हैं। दोनों ही हार्ट हेल्‍थ के ल‍िए फायदेमंद होते हैं। दोनों ही प्रकार के कीवी का ग्‍लाइसेम‍िक इंडेक्‍स कम होता है, तो आप इसे वेट लॉस डाइट का ह‍िस्‍सा बना सकते हैं। दोनों कीवी में ल्यूटिन और जेक्सैंथिन नाम के एंटीऑक्‍सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो आंखों की सेहत के ल‍िए फायदेमंद होते हैं।

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हरी कीवी में फाइबर ज्‍यादा होता है

  • हरी कीवी में गोल्‍डन कीवी के मुकाबले फाइबर ज्‍यादा होता है।
  • ज्‍यादा फाइबर के कारण यह पाचन, कब्‍ज और आंतों की सेहत को बेहतर बनाने के ल‍िए ज्‍यादा असरदार मानी जाती है।

गोल्‍डन कीवी में शुगर ज्‍यादा होती है

  • गोल्‍डन कीवी का स्‍वाद हरी कीवी से ज्‍यादा मीठा होता है क्‍योंक‍ि इसमें शुगर की मात्रा ज्‍यादा होती है। साथ ही ग्रीन कीवी के मुकाबले, इसमें फाइबर की मात्रा कम होती है।
  • गोल्‍डन कीवी में व‍िटाम‍िन सी की मात्रा ज्‍यादा होती है।

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हरी या गोल्डन कीवी: क्‍या है ज्‍यादा हेल्‍दी?- Green Vs Golden Kiwi

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Nutritionist Neha Sinha ने बताया क‍ि कीवी हरी हो या गोल्‍डन दोनों ही सेहत के ल‍िए बेहद फायदेमंद होते हैं। अगर पाचन सुधारना है और फाइबर चाह‍िए, तो ग्रीन कीवी चुनें और अगर कीवी का मीठा स्‍वाद ज्‍यादा पसंद है, तो गोल्‍डन कीवी चुनें। दोनों की कीवी का ग्‍लाइसेमि‍क इंडेक्‍स कम होता है, इसे खाकर शुगर लेवल तेजी से नहीं बढ़ता। कि‍सी भी कीवी को चुनने से भी ज्‍यादा जरूरी है यह जानना क‍ि आप कैसे कीवी को चुन रहे हैं? अगर क‍ीवी स्‍मूद द‍िख रहा है और उसकी स्‍क‍िन पर ज्‍यादा दाग नहीं है, तो मतलब कीवी फ्रेश और हेल्‍दी है। अगर कीवी छूने पर सख्‍त लगे, तो मतलब वह कच्‍चा है। कच्‍चे कीवी से खुशबू नहीं आएगी और इसे खाकर पेट दर्द हो सकता है इसल‍िए पका हुआ कीवी ही खाएं।

न‍िष्‍कर्ष:

हरी या गोल्‍डन दोनों कीवी ही सेहत केे ल‍िए फायदेमंद हैं। गोल्‍डन कीवी में शुगर ज्‍यादा होता है और हरी कीवी में फाइबर ज्‍यादा होता है। दोनों का ही ग्‍लाइसेम‍िक इंडेक्‍स कम होता है। ऐसे कीवी को चुनें जो ताजा हो और छूने पर ज्‍यादा सख्‍त न हो।

इस लेख में बताई गई जानकारी पसंद आई हो, तो इसे ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों के साथ शेयर करें ताक‍ि लोगों को हरी और गोल्‍डन कीवी के बीच का अंतर समझ आए।

image credit: tastingtable.com, mashed.com

FAQ

  • एक द‍िन में क‍ितने कीवी खा सकते हैं?

    द‍िनभर में एक से दो कीवी खा सकते हैं। कीवी व‍िटाम‍िन सी और फाइबर से भरपूर होता है, सर्द‍ियों में इसे खाने से इम्‍यून‍िटी मजबूत होती है।
  • कीवी खाने का सही समय क्‍या है?

    कीवी को सुबह या दोपहर के समय खा सकते हैं। कुछ लोगों को इसे खाकर पाचन की समस्‍या होती है इसल‍िए इसे खाली पेट खाने से बचना चाह‍िए।
  • कीवी खाने के क्‍या फायदे हैं?

    कीवी खाने से पाचन सुधरता है, हार्ट ड‍िजीज का खतरा दूर होता है, हाई बीपी की समस्‍या कम होती है और प्‍लेटलेट काउंट बेहतर होता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Feb 20, 2026 16:40 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Feb 20, 2026 16:40 IST

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