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थायराइड ग्रंथि की असामान्य वृद्धि है घेंघा रोग या गोइटर, आयुर्वेदाचार्य से जानें घेंघा का आयुर्वेदिक इलाज

Goiter Treatment In Ayurveda: घेंघा रोग या गोइटर थायराइड संबंधी एक विकार है। इस लेख में जानें गोइटर के लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक उपचार।

Vineet Kumar
Written by: Vineet KumarPublished at: Apr 11, 2022Updated at: Apr 11, 2022
थायराइड ग्रंथि की असामान्य वृद्धि है घेंघा रोग या गोइटर, आयुर्वेदाचार्य से जानें घेंघा का आयुर्वेदिक इलाज

घेंघा रोग या गोइटर (Goiter) जिसे गलगंड या गंडमाला भी कहा जाता है, एक बढ़ी हुई थायराइड ग्रंथि है जो गले में सूजन का कारण बनती है। यह अनियमित कोशिका में वृद्धि का परिणाम भी हो सकता है जिससे थायराइड में एक या अधिक गांठ बनती हैं। अक्सर जब लोगों में थायराइड संबंधी किसी समस्या (Thyroid Related Problems) का निदान होता है, तो वह इसको लेकर काफी चिंतित महसूस करते हैं, क्योंकि ज्यादातर लोग सोचते हैं थायराइड का निदान होने के बाद उन्हें जिंदगी भर दवाओं का सेवन करना पड़ेगा। लेकिन यह सच नहीं हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. दिक्सा भावसार, बीएएमएस आयुर्वेद की मानें तो आयुर्वेद निश्चित रूप से आपके थायराइड विकार (Thyroid Disorder) को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है (Goiter or Galganda Treatment In Ayurveda)। उनकी मानें तो जीवन शैली में कुछ सामान्य बदलाव करके थायरॉयड संबंधी समस्याओं से आसानी राहत पाई जा सकती है। लेकिन इसके लिए पहले उसके संभावित कारणों के बारे में पता होना जरूरी है। इस लेख में हम आपको गोइटर के लक्षण और कारण के साथ ही इसके आयुर्वेदिक उपचार के बारे में बता रहे हैं (Goiter Symptoms, Causes And Treatment In Hindi)।

घेंघा या गोइटर क्या है? (What Is Goiter In Hindi)

घेंघा या गलगंड (Goiter) वह स्थिति है जिसमें आपकी थायराइड ग्रंथि में असामान्य रूप से वृद्धि होती है। इसे गंडमाला या गोइटर भी कहा जाता है। थायराइड एक तितली के आकार की ग्रंथि है जो आपकी गर्दन पर कंठ के ठीक नीचे स्थित होती है। गोइटर थायराइड के कामकाज में कोई बदलाव नहीं होने या थायराइड हार्मोन में वृद्धि या कमी के साथ जुड़ा हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि थायराइड गलत तरीके से काम कर रहा है। लेकिन कुछ मामलों में यह एक अंतर्निहित थायराइड रोग का संकेत हो सकता है जिसके लिए उपचार की आवश्यकता होती है। गोइटर अक्सर हानिरहित होते हैं और बिना उपचार के थोड़े समय के बाद ठीक हो सकते हैं। लोगों को आमतौर पर इसके लिए उपचार की तब तक आवश्यकता नहीं होती है जब तक कि गलगंड बड़ा न हो और इससे किसी तरह की कोई परेशानी ना हो।

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गोइटर के लक्षण क्या हैं? (Goiter Symptoms In Hindi)

घेंघा रोग या गोइटर के प्राथमिक लक्षण में आपकी गर्दन में कंठ के नीचे सूजन होना शामिल है। यदि आपके थायराइड पर नोड्यूल हैं, तो वे आकार में बहुत छोटे से लेकर बहुत बड़े तक हो सकते हैं। नोड्यूल की उपस्थिति सूजन की उपस्थिति को बढ़ा सकती है। इसके अन्य लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • कुछ भी पीते या खाते समय निगलने या सांस लेने में कठिनाई
  • खांसना
  • आपकी आवाज बैठना या आवाज में कर्कशता
  • हाथ को अपने सिर के ऊपर समय चक्कर आना

घेंघा या गोइटर के कारण (Causes Of Goiter In Hindi)

  • गतिहीन जीवन शैली
  • जंक और प्रोसेस्ड फूड्स का ज्यादा सेवन
  • तनाव
  • पर्याप्त नींद न लेना
  • मोटापा
  • भोजन करने, व्यायाम करने और सोने का कोई निश्चित समय नहीं होना
  • शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं होना
  • अनुवांशिक

गोइटर का आयुर्वेदिक इलाज (Galganda or Goiter Treatment In Ayurveda In Hindi)

आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. दिक्सा भावसार की मानें तो आयुर्वेदिक जीवन शैली, आहार और पूरक आहार को फॉलो करके बिना किसी दवा के अपने गोइटरन को ठीक किया किया जा सकता है। उनके अनुसार थायराइड को उलटने के लिए आपको पहले उनके कारणों पर ध्यान देने की जरूरत है जो थायराइड असंतुलन के लिए जिम्मेदार हैं। उसके बाद उन खाद्य पदार्थों और गतिविधियों को खत्म करना शुरू करें जो हमारे लिए काम नहीं करते हैं या हमारे खिलाफ काम करते हैं। आपको अपनी जीवनशैली में कुछ मामूली बदलाव करने की जरूरत है जैसे-

  • नियमित व्यायाम करें
  • जंक और प्रोसेस्ड फूड्स के सेवन से बचें
  • अपने तनाव का प्रबंधन करें
  • समय पर सोएं और एक अच्छी नींद लें
  • अपना वजन को नियंत्रण में रखें
  • समय पर भोजन करें
  • अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें

यह भी ध्यान रखें

यदि आप पहले से कोई दवा ले रहे हैं तो आपको दवा से बाहर निकलने में कुछ समय लग सकता है, लेकिन यकीन मानिए जीवनशैली में बदलाव के साथ बिना दवाइयों के आसानी से थायराइड संबंधी विकारों से राहत पा सकते हैं।

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