क्यों होता है घेंघा रोग? जानें 12 लक्षण और बचाव

घेंघा रोग (Goiter) होने पर व्यक्ति को निगलने में दिक्कत, गले में दर्द, खांसी आदि लक्षण महसूस होते हैं। जानते हैं इसके कारण, प्रकार और बचाव..

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Jun 03, 2021
क्यों होता है घेंघा रोग? जानें 12 लक्षण और बचाव

अकसर आपने देखा होगा कि खराब दिनचर्या और गलत आदतों के कारण कई रोग पैदा हो जाते हैं। आज हम बात कर रहे हैं घेंघा रोग की। इस रोग में गले में थायराइड ग्रंथि यानी ग्लैंड विकसित होने लगता है और वहां सूजन आ जाती है। यही कारण होता है कि अन्नप्रणाली या सांस नली पर काफी दबाव पड़ने लगता है और कई लक्षण जैसे पानी निगलने में मुश्किल, खांसी, खराश आदि नजर आने लगते हैं। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि घेंघा रोग किस कारण (goiter causes) होता है साथ ही इसके लक्षण (goiter symptoms) और बचाव के बारे में भी जानेंगे। पढ़ते हैं आगे...

घेंघा रोग के प्रकार (types of goiter)

घेंघा रोग मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है। साधारण घेंघा रोग, इसमें थायराइड ग्रंथि बढ़ने लगती है और आयोडीन की कमी होने लगती है। लेकिन कोई ट्यूमर नहीं बनता। डिफ्यूज टॉक्सिक गोइटर में थायराइड ग्रंथि बढ़ती है और डिप्रेशन और दिल की समस्या भी हो सकती है। इस समस्या में थायरोस्टैटिक सही से काम नहीं करती। नॉनटॉक्सिक गोइटर में सूजन के साथ-साथ थायराइड ग्रंथि का विकास होता है। टॉक्सिक नोड्यूलर गोइटर प्रकार 55 साल से अधिक वाले लोगों को होता है, इसमें थायराइड ग्रंथि बढ़ती है और ग्लैंड का आकार बढ़ने लगता है और गांठ बनने लगती है।

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घेंघा रोग के लक्षण (symptoms of goiter)

1 - अधिक मात्रा में पसीना आना

2 - ज्यादा भूख लगना

3 - गर्मी सहन न कर पाना

4 - सुस्ती, थकान या कमजोरी महसूस करना

5 - गले के अंदरूनी हिस्से में दर्द महसूस करना

7 - गला खराब होना

8 - खांसी होना

9 - सांस लेने में दिक्कत महसूस करना

10 - वजन कम होना

11 - घबराहट महसूस करना है

12 - सांस लेते वक्त आवाज महसूस करना।

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घेंघा रोग के कारण (causes of goiter)

1 - शरीर में आयोडीन की कमी हो जाना

2 - किसी संक्रमण का शिकार हो जाना

3 - धूम्रपान करने के कारण

4 - थायराइड हॉर्मोन ना बनने के कारण

5 - कुछ दवाइयों के सेवन के कारण

6 - गर्भावस्था के दौरान ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (Human Chorionic Gonadotropin) हार्मोन बनता है तो उसके कारण भी थायराइड ग्रंथि बढ़ने लगती है।

घेंघा रोग से इलाज और बचाव ( treatment of goiter)

  • घेंघा रोग से बचने के लिए आहार में बदलाव करके इस समस्या को रोका जा सकता है। हार्मोन थायराइड हार्मोन के लिए आयोडीन जरूरी तत्व है। ऐसे में अपने आहार में आयोडीन युक्त भोजन जोड़ें। उदाहरण के तौर पर मछली, कॉर्न, सूखी आलू बुखारा, सेब का जूस, मटर, अंडा, दूध, दही, चीज, सेब, केला आदि।
  • धूम्रपान करने से बचें। धूम्रपान करने से समस्या और बढ़ सकती है।
  • सफाई का ध्यान रखें।
  • अपनी दिनचर्या में व्यायाम और मेडिटेशन को जोड़ें।
  • उचित मात्रा में पानी चाहिए।
  • आयोडीन की अधिकता भी घेंघा रोग को जन्म दे सकती है।

नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि घेंघा रोग आम से कब गंभीर बना जाता है पता ही नहीं चलता। ऐसे में इसके लक्षण, कारण और बचाव को समझना जरूरी है। अगर इस रोग के बारे में शुरू में पता चल जाए तो कुछ घरेलू उपाय के माध्यम से इस समस्या को रोका जा सकता है।

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