मछली खाने वाले आंख मूंद कर न खाएं हर किस्म की मछली, कहीं हो न जाएं आप फिश पॉइजनिंग के शिकार

ज्यादातर लोग ये तो जानते हैं कि मछली खाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन ये नहीं जानते हैं कि कौन सी मछली खाना चाहिए और कौन सी नहीं।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Jul 14, 2020
मछली खाने वाले आंख मूंद कर न खाएं हर किस्म की मछली, कहीं हो न जाएं आप फिश पॉइजनिंग के शिकार

मछली खाना स्वास्थ्य के लिए हमेशा से फायदेमंद रहा है। इसे दिमाग को तेज करने से लेकर स्किन और बालों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। मछली ओमेगा-3, हाई-क्वालिटी प्रोटीन, आयरन और मिनरल्स से भरपूर होती है, जिसका शरीर पर एक व्यापक असर होता है। इसके अलावा मछलियों में भरपूर मात्रा में विटामिन डी और DHA मौजूद होता है, जिसे बच्चों के स्वास्थ्य और दिमागी विकास के लिए जरूरी माना जाता है। पर क्या हर किस्म की मछली खाना फायदेमंद है? तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है। मछली की हर प्रजाति खाने योग्य नहीं होती है और इससे खाने से शरीर में पॉइजनिंग (Fish Poisoning) तक हो सकती है। तो आइए सबसे पहले जानते हैं क्या है फिश पॉइजनिंग (Fish Poisoning) और फिर जानेंगे कि हमें कौन सी मछली खाने लायक होती हैं और कौन सी नहीं। 

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क्या है फिश पॉइजनिंग (Fish Poisoning)

फिश पॉइजनिंग (Fish Poisoning) खराब और दूषित किस्म की मछली खाने से होती है। इन मछलियों में सिगुएटेरा नामक एक दूषित पदार्थ पाया जाता है, जिस खाने पर पेट से जुड़ी समस्याएं होती है। इन तरीकों के मछली खाने से पाचन तंत्र, मांसपेशियों और नसों को नुकसान पहुंचता है। सिगुएटेरा मछलियों की 400 प्रजातियां होती हैं, जो उष्णकटिबंधीय इलाकों में पाया जाता है। ये दूषित तत्व आमतौर पर इन मछलियों में पाया जा सकता है

  • -बाराकुडा
  • -ग्रॉपर
  • -लाल स्नैपर
  • -ईल
  • -स्पैनिश मैकेरल मछली
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फिश पॉइजनिंग के लक्षण

आमतौर पर दूषित मछली खाने के छह से आठ घंटे बाद  सिगुएटेरा  के जहर के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं:

  • -जी मिचलाना
  • -उल्टी
  • -दस्त
  • -मांसपेशियों में दर्द
  • -सुन्न होना
  • -झुनझुनी
  • -पेट में दर्द
  • -चक्कर आना
  • -गर्म और ठंडी सनसनी

सिगारूटा पॉइजनिंग के गंभीर मामलों में आंखें फड़कना, ठंड लगना, त्वचा पर चकत्ते, खुजली, सांस की तकलीफ, डकार आना और लकवा हो सकता है। दिल या श्वसन विफलता के कारण दुर्लभ मामलों में मौत भी हो सकती है।

मरकरी वाली ये मछलियां भी हैं खतरनाक

मछलियों में मरकरी पाया जाता है, जो शरीर के लिए बहुत हानिकारक होता है खासकर मां बनने वाली महिलाओं के लिए और बच्चों के लिए। ऐसे में शार्क और माही माही जैसी मछलियों को खाने से बचें। दरअसल मछलियों में सबसे ज्यादा मरकरी शार्क में पाई जाती है। इसीलिए इन्हें ना ही खाएं तो बेहतर है। वहीं खाने में मक्खन जैसा स्वाद और होटलों में लजीज टॉपिंग के साथ सर्व होने वाली इस मछली माही माही में भी मरकरी होता है, जो आपकी सेहत के लिए अच्छा नहीं। मां बनने वाली महिलाओं के लिए ये और भी खतरनाक है। इसके बजाय सैलमॉन मछली का सेवन करें।

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कौन सी मछली खाने के लिए है उपयुक्त

विश्व में लगभग 20,000 प्रजातियां हैं व भारत वर्ष में 2200 प्रजातियां पाई जाती हैं। गंगा नदी प्रणाली जो कि भारत की सबसे बड़ी नदी प्रणाली है में लगभग 375 मत्स्य प्रजातियां उपलब्ध हैं। अकेले उत्तर प्रदेश व बिहार में 111 मछली की प्रजातियों की उपलब्ध हैं, जिनमें से ये कुछ मछलियां खाने लायक हैं :

-इडियन मेजर कार्प (रोहू, कतला और नैन)

-सिंघी

-मांगुर

-सिंधरी

-पुठिया

-चेलवा

- टैंगन

-सौल

-गिरई

हार्ट पेशेंट्स के लिए ये सभी मछली बहुत फायदेमंद है। इसमें पाए जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल और उसकी मांस-पेशि‍यों को मजबूत बनाता है। मछली में लो फैट होता है जिससे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा सही रहती है। मछलियों में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड दिल की सुरक्षा में मदद करता है। वहीं अगर आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है तो आपको अभी दूसरे मांसाहार छोड़कर मछली खाना शुरू कर देना चाहिए। मछली में लो फैट होता है, जिसकी वजह से हाई-ब्लड प्रेशर की समस्या कम होने लगती है।

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