बरसात के मौसम में इसलिए जल्दी खराब होता है पाचन तंत्र, ऐसे रखें दुरुस्त

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 16, 2018
Quick Bites

  • बरसात में पाचक एंजाइमों की कार्य प्रणाली भी प्रभावित होती है। 
  • बरसात में पाचन तंत्र से संबंधित कई समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।
  • बरसात में हाजमा या पाचन तंत्र की सक्रियता में कमी आ जाती है।

बरसात का मौसम दस्तक दे चुका है। बदलते मौसम के प्रभाव से हमारा शरीर भी प्रभावित  होता है। मौसम में बदलाव के साथ शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) और पाचन तंत्र में बदलाव होने लगता है। बरसात में पाचन तंत्र से संबंधित कई समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। इस दौरान लोगों को अपच या बदहजमी से लेकर फूड प्वॉयजनिंग और डायरिया जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बरसात में सेहतमंद रहने के लिए आपको विशेष सजगताएं बरतनी होंगी और इसके लिए यह जानना जरूरी है कि इस मौसम में पाचन तंत्र से संबंधित कौन सी समस्याएं अधिक होती हैं और इनसे कैसे निपटा जाए।

पचाने की क्षमता में कमी 

बरसात में हाजमा या पाचन तंत्र की सक्रियता में कमी आ जाती है। बरसात के पानी और कीचड़ से बचने के लिए लोग घरों में रहना कहीं अधिक पसंद करते हैं। इस कारण शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है, जो पाचन तंत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। 

ऐसे मिलेगी राहत 

  • हल्का और पोषक तत्वों से युक्त भोजन ग्रहण करें। 
  • चिकनाईयुक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करें। 
  • शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। बारिश के कारण अगर आप टहलने नहीं जा पा रहे हैं या जिम जाने में परेशानी हो रही है तो घर पर ही वर्क आउट करें। 

बदहजमी 

बरसात में पाचक एंजाइमों की कार्य प्रणाली भी प्रभावित होती है। इस कारण खाना ठीक प्रकार से नहीं पचता। इस मौसम में तैलीय, मसालेदार भोजन और चाय व काफी का सेवन भी बढ़ जाता है। इससे भी अपच या बदहजमी  की समस्या उत्पन्न हो जाती है। नम मौसम में सूक्ष्म जीव अधिक मात्रा में पनपते हैं, इनसे होने वाले संक्रमण से भी बदहजमी की समस्या बढ़ जाती है। 

क्या करें: बदहजमी में भारी या गरिष्ठ भोजन न करें। इस समस्या में डॉक्टर एंटासिड नामक दवाएं देते हैं। डॉक्टर से सलाह लिए बगैर कोई दवा किसी के कहने पर न लें।

डायरिया 

यह मर्ज दूषित खाद्य पदार्थों और प्रदूषित जल के सेवन से होता है। वैसे तो यह समस्या किसी को कभी भी हो सकती है, लेकिन बरसात में इनके मामले काफी बढ़ जाते हैं। दस्त लगना इसका सबसे प्रमुख लक्षण है। पेट में दर्द और मरोड़, बुखार, मल में रक्त आना, पेट फूलना जैसे लक्षण भी प्रकट होते हैं। फूड प्वॉयजनिंग के कारण भी डायरिया हो सकता है। 

मिलेगा लाभ: डायरिया होने पर ओआरएस का घोल पिएं। नारियल पानी पीना भी लाभप्रद है। 

पर्याप्त पर्याप्त में पानी पिएं, क्योंकि डायरिया में दस्त के जरिए शरीर से पानी काफी मात्रा में बाहर निकल जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है। स्थिति में सुधार न होने पर डॉक्टर से परामर्श लें। 

फूड प्वॉयजनिंग 

फूड प्वॉयजनिंग तब होती है जब हम ऐसे भोजन का सेवन करते हैं जो बैक्टीरिया, वायरस और  जीवाणुओं से संक्रमित होते हैं। बरसात के मौसम में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण  वायरस और जीवाणुओं को पनपने का  एक उपयुक्त वातावरण मिल जाता है। इसके अलावा बरसात में कीचड़ और कचरे के कारण जगह-जगह गंदगी फैल जाती है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बरसात में फूड प्वॉयजनिंग के मामले भी बढ़ जाते हैं। 

सजग रहें: इस मौसम में बाहर का बना हुआ खाना खाने या फिर अधिक ठंडे पदार्थों के सेवन से भी फूड प्वॉयजनिंग की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। फूड प्वॉयजनिंग  के साथ अगर बुखार तेज बना रहता है, तब एंटीबॉयटिक दवाएं डॉक्टर के परामर्श से लें। 

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खानपान का रखें खास ध्यान 

  • संतुलित, पोषक और सुपाच्य भोजन का सेवन करें। 
  • कच्चे खाद्य पदार्थ नमी को बहुत शीघ्रता से अवशोषित कर लेते हैं। इसलिए ये बैक्टीरिया के पनपने के लिए आदर्श स्थान होते हैं। इसलिए यही बेहतर रहेगा कि कच्ची सब्जियां वगैरह न खाएं, सलाद के रूप में भी नहीं। 
  • इस मौसम में फफूंदी जल्दी पनपती है। इसलिए ब्रेड-पाव आदि खाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसमें कहीं फफूंदी तो नहीं लगी है। 
  • बाजार में खुले में बिकने वाली वस्तुओं और ढाबों पर न खाएं, क्योंकि इस तरह के खाद्य पदार्र्थों से संक्रमण का खतरा अधिक होता है। 
  • ऐसा खाना खाएं, जिससे एसिडिटी कम से कम हो। 
  • बारिश के मौसम में मांस, मछली और मीट खाने से फूड प्वॉयजनिंग की आशंका बढ़ जाती है। इस मौसम में कच्चा अंडा और मशरूम खाने से भी बचें। 
  • बरसात में तले हुए भोजन को खाने का मन तो बहुत करता है, लेकिन इनसे दूर रहना ही बेहतर है क्योंकि इससे पाचन क्षमता कम होती है। कम मसाले और कम तेल वाला भोजन पाचन संबंधी समस्याओं से बचाता है। 
  • अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ जैसे अचार, सॉस आदि न खाएं या कम खाएं । 
  • ओवर ईटिंग (भूख से अधिक खाना) से बचें और तभी खाएं जब आप भूखा महसूस करें। 
  • ठंडे और कच्चे भोजन की बजाए गर्म भोजन जैसे सूप, पका हुआ खाना खाएं। फिल्टर किए हुए या उबले पानी को ठंडा करके ही सेवन करें।

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