गिलोय एक ऐसी बेल जिसे आयुर्वेद में अमृत कहा गया है। इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर बुखार, डेंगू, एलर्जी और कमजोर पाचन तक, गिलोय के फायदे हर जगह बताए जाते हैं। शायद यही वजह है कि आजकल लोग इसे बिना सोचे-समझे अपनी डेली रूटीन में शामिल करने लगे हैं। कोई गिलोय की कच्ची डंडी चबा रहा है, तो कोई उसका ताजा रस निकालकर पी रहा है लेकिन सवाल यह है कि क्या गिलोय को कच्चा खाना वाकई सुरक्षित है? सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप फॉरवर्ड्स में गिलोय को नेचुरल इम्यूनिटी बूस्टर बताकर इसके कच्चे सेवन की सलाह दी जाती है। लोग सोचते हैं कि अगर कोई चीज प्राकृतिक है, तो उसे कच्चा खाने में क्या नुकसान हो सकता है लेकिन आयुर्वेदिक औषधियां सामान्य सब्जी या फल नहीं होतीं। इनका गलत तरीका और गलत मात्रा में सेवन फायदे की जगह नुकसान भी कर सकता है। इस लेख में मेवाड़ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एवं प्राकृतिक चिकित्सालय बापू नगर, जयपुर की वरिष्ठ चिकित्सक योग, प्राकृतिक चिकित्सा पोषण और आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. किरण गुप्ता से जानिए, क्या गिलोय को कच्चा खाया जा सकता है?
क्या गिलोय को कच्चा खाया जा सकता है?
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. किरण गुप्ता बताती हैं कि आयुर्वेद में गिलोय को अमृत के समान कहा जाता है। यह त्रिदोष वात, पित्त और कफ को संतुलित करने वाली औषधि मानी जाती है। डॉक्टर किरण गुप्ता के अनुसार, ''गिलोय का सही तरीके से और सही मात्रा में सेवन किया जाए तो यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत करता है और कई पुरानी बीमारियों में सहायक होता है।''
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- डॉक्टर किरण गुप्ता बताती हैं कि कच्चे गिलोय का सेवन सीधे तौर पर करना सुरक्षित नहीं माना जाता।
- कच्चे गिलोय में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो संवेदनशील पेट वाले लोगों में उल्टी, दस्त या एलर्जी की समस्या पैदा कर सकते हैं।
- इसके अलावा, कच्चा गिलोय ठीक से पचता नहीं है और इससे पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
गिलोय का सही सेवन कैसे करें
आयुर्वेद में गिलोय को आमतौर पर काढ़ा, चूर्ण, टैबलेट या घनवटी के रूप में लेने की सलाह दी जाती है। गिलोय का काढ़ा बनाकर पीने से इसके विषैले तत्व कम हो जाते हैं और यह शरीर के लिए सुरक्षित बनता है। डॉक्टर किरण गुप्ता बताती हैं कि उबालकर लिया गया गिलोय शरीर में आसानी से अवशोषित होता है और इसके लाभ भी बेहतर मिलते हैं।
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किन लोगों को गिलोय से परहेज करना चाहिए?
हर औषधि हर व्यक्ति के लिए समान रूप से सुरक्षित नहीं होती। प्रेग्नेंट महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं, डायबिटीज और ऑटोइम्यून रोग से पीड़ित लोगों को गिलोय का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। साथ ही, जो लोग पहले से इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं ले रहे हैं, उनके लिए गिलोय नुकसानदायक हो सकता है।
कितनी मात्रा में गिलोय लेना सुरक्षित है?
आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर किरण गुप्ता के अनुसार, गिलोय का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में करना चाहिए। गिलोय काढ़ा दिन में एक बार, लगभग 20-30 मिलीलीटर पर्याप्त होता है। टैबलेट या चूर्ण की मात्रा भी व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय की जानी चाहिए। ज्यादा मात्रा में सेवन फायदे की जगह नुकसान कर सकता है।
निष्कर्ष
गिलोय एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि है, लेकिन इसका कच्चा सेवन करना हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है। सही तरीका, सही मात्रा और एक्सपर्ट की सलाह के साथ लिया गया गिलोय ही फायदा पहुंचाता है। आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर किरण गुप्त के अनुसार, ''प्राकृतिक चीज होने का मतलब यह नहीं कि उसे बिना जानकारी के इस्तेमाल किया जाए।'' इसलिए सेहत के लिए किसी भी आयुर्वेदिक औषधि को अपनाने से पहले सही जानकारी लेना बेहद जरूरी है।
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FAQ
गिलोय का जूस रोज पी सकते हैं?
रोज और ज्यादा मात्रा में गिलोय का रस पीना नुकसानदायक हो सकता है। इसे सीमित मात्रा में और डॉक्टर की सलाह से ही लें।गिलोय की तासीर गर्म है या ठंडी?
गिलोय की तासीर गर्म होती है इसलिए आहार को आसानी से पचाती है और भूख को भी बढ़ाती है।क्या गिलोय का काढ़ा खाली पेट पीना चाहिए?
सुबह खाली पेट गिलोय का काढ़ा पिया जा सकता है, यह इम्यूनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने और स्किन को ग्लोइंग बनाने में बेहद फायदेमंद होता है।
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Current Version
Jan 30, 2026 16:05 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Jan 30, 2026 16:05 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Kiran Gupta