पैंक्रियाटिक कैंसर (Pancreatic Cancer) दुनिया के सबसे घातक कैंसर में गिना जाता है। हाल ही में एक स्टडी प्रकाशित हुई है जिसमें आयुर्वेदिक रसायन थेरेपी को इस जानलेवा कैंसर के इलाज में असरदार पाया गया। स्टडी में देखा गया कि इस थेरेपी को लेने से मरीजों की उम्र बढ़ने के संंकेत मिले और क्वालिटी ऑफ लाइफ में भी सुधार देखा गया। यह अध्ययन Rasayu Cancer Clinic के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया। ‘रसायन’ थेरेपी को समझने के लिए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।
आयुर्वेदिक ‘रसायन’ थेरेपी क्या होती है?

Dr. Shrey Sharma ने बताया कि आयुर्वेदिक ‘रसायन’ थेरेपी आयुर्वेद की एक विशेष उपचार पद्धति है, जिसकी मदद से सेहत को बेहतर बनाया जाता है और इम्यूनिटी भी मजबूत होती है। इसमें जड़ी-बूटियों, पोषक तत्वों और जीवनशैली में सुधार करके शरीर को स्वस्थ बनाया जाता है। रसायन थेरेपी का फोकस केवल बीमारी को दबाना नहीं, बल्कि शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को बढ़ाना होता है। इसे खासतौर पर क्रॉनिक बीमारियों, कमजोरी और उम्र से संबंधित समस्याओं में असरदार माना जाता है।
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क्या कहती है स्टडी?
यह रिसर्च पुणे के Rasayu Cancer Clinic में की गई, जिसकी अगुवाई Dr. Yogesh Bendale ने की। स्टडी में एडवांस स्टेज के पैंक्रियाटिक कैंसर के 17 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया, जो सर्जरी, कीमोथेरेपी या अन्य इलाज के लिए योग्य नहीं थे। आमतौर पर इस स्टेज के मरीजों की उम्र तीन से छह महीनों की होती है, लेकिन स्टडी में पाया गया कि रसायन थेरेपी लेने वाले मरीजों में अवधि बढ़कर लगभग 10 से 11 महीने पाई गई। करीब 12 प्रतिशत मरीजों में ट्यूमर का आकार कम होने के संंकेत मिले।
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कितना खतरनाक होता है पैंक्रियाटिक कैंसर?
पैंक्रियाटिक कैंसर को दुनिया के सबसे खतरनाक कैंसर में गिना जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि शुरू के चरण में इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं। इस बीमारी का पता अक्सर तब चलता है जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। इसी वजह से इलाज के सीमित विकल्प रह जाते हैं। ऐसे मरीजोंं के लिए उम्र बढ़ जाना किसी वरदान से कम नहींं। ऐसे मरीजों के लिए ‘रसायन’ थेरेपी उम्मीद की किरण साबित हो सकती है।
निष्कर्ष:
पुणे की इस स्टडी से पता चलता है कि आयुर्वेदिक रसायन थेरेपी उन मरीजोंं के लिए फायदेमंद है जो पैंक्रियाटिक कैंसर से जूझ रहे हैं और जिनके पास इलाज के सीमित विकल्प मौजूद है। ऐसे में रसायन थेरेपी उम्मीद की नई किरण बन सकती है।
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May 05, 2026 19:29 IST
Modified By : Yashaswi Mathur May 05, 2026 19:29 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Shrey Sharma