Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

आयुर्वेदिक ‘रसायन’ थेरेपी एडवांस पैंक्रियाटिक कैंसर के इलाज में हो सकती है मददगार, स्टडी में खुलासा

हाल ही में पुणे की एक स्टडी में आयुर्वेदिक रसायन थेरेपी से एडवांस पैंक्रियाटिक कैंसर मरीजों के ल‍िए फायदेमंद पाई गई। यह स्‍टडी कैंसर मरीजों के इलाज में उम्‍मीद की नई क‍िरण साब‍ित हो सकती है।

पैंक्रियाटिक कैंसर (Pancreatic Cancer) दुन‍िया के सबसे घातक कैंसर में ग‍िना जाता है। हाल ही में एक स्‍टडी प्रकाश‍ित हुई है ज‍िसमें आयुर्वेदिक रसायन थेरेपी को इस जानलेवा कैंसर के इलाज में असरदार पाया गया। स्‍टडी में देखा गया क‍ि इस थेरेपी को लेने से मरीजों की उम्र बढ़ने के संंकेत म‍िले और क्वालिटी ऑफ लाइफ में भी सुधार देखा गया। यह अध्ययन Rasayu Cancer Clinic के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया। ‘रसायन’ थेरेपी को समझने के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

आयुर्वेदिक ‘रसायन’ थेरेपी क्‍या होती है?

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Dr. Shrey Sharma ने बताया क‍ि आयुर्वेदिक ‘रसायन’ थेरेपी आयुर्वेद की एक विशेष उपचार पद्धति है, जिसकी मदद से सेहत को बेहतर बनाया जाता है और इम्‍यून‍िटी भी मजबूत होती है। इसमें जड़ी-बूटियों, पोषक तत्वों और जीवनशैली में सुधार करके शरीर को स्‍वस्‍थ बनाया जाता है। रसायन थेरेपी का फोकस केवल बीमारी को दबाना नहीं, बल्कि शरीर की प्राकृतिक हील‍िंग क्षमता को बढ़ाना होता है। इसे खासतौर पर क्रॉनिक बीमारियों, कमजोरी और उम्र से संबंध‍ित समस्याओं में असरदार माना जाता है।

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क्‍या कहती है स्‍टडी?

यह रिसर्च पुणे के Rasayu Cancer Clinic में की गई, जिसकी अगुवाई Dr. Yogesh Bendale ने की। स्‍टडी में एडवांस स्टेज के पैंक्रियाटिक कैंसर के 17 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया, जो सर्जरी, कीमोथेरेपी या अन्य इलाज के लिए योग्य नहीं थे। आमतौर पर इस स्‍टेज के मरीजों की उम्र तीन से छह महीनों की होती है, लेक‍िन स्‍टडी में पाया गया क‍ि रसायन थेरेपी लेने वाले मरीजों में अव‍ध‍ि बढ़कर लगभग 10 से 11 महीने पाई गई। करीब 12 प्रत‍िशत मरीजों में ट्यूमर का आकार कम होने के संंकेत म‍िले।

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क‍ितना खतरनाक होता है पैंक्रियाटिक कैंसर?

पैंक्र‍ियाट‍िक कैंसर को दुन‍िया के सबसे खतरनाक कैंसर में ग‍िना जाता है। ऐसा इसल‍िए है क्‍योंक‍ि शुरू के चरण में इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं। इस बीमारी का पता अक्‍सर तब चलता है जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। इसी वजह से इलाज के सीमि‍त वि‍कल्‍प रह जाते हैं। ऐसे मरीजोंं के ल‍िए उम्र बढ़ जाना क‍िसी वरदान से कम नहींं। ऐसे मरीजों के ल‍िए ‘रसायन’ थेरेपी उम्‍मीद की क‍िरण साब‍ित हो सकती है।

न‍िष्‍कर्ष:

पुणे की इस स्टडी से पता चलता है क‍ि आयुर्वेदिक रसायन थेरेपी उन मरीजोंं के ल‍िए फायदेमंद है जो पैंक्रियाटिक कैंसर से जूझ रहे हैं और जि‍नके पास इलाज के सीमि‍त व‍िकल्‍प मौजूद है। ऐसे में रसायन थेरेपी उम्मीद की नई किरण बन सकती है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 05, 2026 19:29 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 05, 2026 19:29 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

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