Panchakarma For Cancer: आजकल लोग डिटॉक्स को लेकर काफी ज्यादा जागरूक हो गए है, जिसमें लिवल डिटॉक्स से लेकर बॉडी डिटॉक्स तक किया जा रहा है। आयुर्वेद में भी शरीर और मन की शांति के लिए पंचकर्म किया जाता है। इसमें शरीर में मौजूद पित्त, वात और कफ को बैलेंस करने की कोशिश की जाती है और शरीर में मौजूद ‘आम’ यानी कि विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाला जाता है। अगर शरीर और मन को डिटॉक्स कर दिया जाए, तो क्या इससे कैंसर के रिस्क को कम किया जा सकता है। ये सवाल कई लोगों के मन में उठता है, इसलिए हमने फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल के सीनियर आयुर्वेदिक पंचकर्मा कंसल्टेंट डॉ. चेतन शर्मा (Dr. Chetan Sharma, Sr. Ayurveda Panchakarma Consultant, Sarvodaya Hospital, Faridabad & Noida) से इस बारे में बात की। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में पंचकर्म करीब हफ्ते से लेकर महीने तक चलता है।
आयुर्वेद के अनुसार पंचकर्म क्या करता है?
डॉ. चेतन कहते हैं, “जब खराब लाइफस्टाइल और खानपान होता है, तो शरीर की अग्नि कमजोर हो जाती है और शरीर में ‘आम’ जमा होने लगता है, जो शरीर में सूजन बनाने लगता है। अगर शरीर में सूजन ज्यादा समय के लिए रहे, तो कई बीमारियां होने का रिस्क बना रहता है। इसलिए शरीर और मन को शुद्ध करने के लिए पंचकर्म किया जाता है। पंचकर्म करते समय पांच क्रियाओं वमन, विरेचन, बस्ति, नस्य और रक्तमोक्षण का ध्यान रखा जाता है। इससे शरीर की कई समस्याओं से छुटकारा मिलता है।” कुछ ऐसा ही Journal of Ayurveda and Integrated Medical Sciences भी कहती है। इसके अनुसार, पंचकर्म से शरीर डिटॉक्स होता है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ त्रिदोष को बैलेंस करने में मदद करता है।
- डाइजेशन को सुधारने में मदद मिलती है।
- मोटापा कम करने में असरदार होता है।
- जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।
- एसिडिटी या स्किन संबंधी समस्याओं को मैनेज करने में मदद मिलती है।
- माइग्रेन और सिरदर्द की समस्याएं कम होती है।
- इम्यूनिटी बेहतर होती है।

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क्या पंचकर्म से कैंसर के रिस्क को कम किया जा सकता है?
इस बारे में डॉ. चेतन कहते हैं, “फिलहाल जितनी भी आयुर्वेद की स्टडी है, उसमें ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता कि पंचकर्म सीधे तौर पर कैंसर के रिस्क को कम कर सकता है। इसे कैंसर का इलाज बिल्कुल भी नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन जैसा मैंने पहले कहा है कि पंचकर्म से मोटापा, सूजन कम होना, हार्मोन बैलेंस और इम्यूनिटी बढ़ती है, तो ये लंबे समय तक कैंसर के रिस्क को कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन पंचकर्म से कैंसर न हो, इसकी कोई गारंटी नहीं है। पंचकर्म को एक प्रिवेंटिव हेल्थ केयर टूल की तरह लिया जा सकता है, लेकिन कैंसर की रोकथाम के लिए रेगुलर मेडिकल चेकअप ही कराने चाहिए।”
कैंसर के रिस्क को कम करने के लिए क्या करना चाहिए?
डॉ. चेतन कहते हैं कि कैंसर के रिस्क को कम करने के लिए लोगों को तंबाकू और शराब के सेवन से बिल्कुल दूर रहना चाहिए। फिजिकल एक्टिव रहना बहुत महत्वपूर्ण है और वजन को कंट्रोल करने की सख्त जरूरत है। इसके अलावा, अगर किसी की फैमिली हिस्ट्री कैंसर की रही है, तो उसे समय पर मेडिकल चेकअप और डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। साथ ही, बैलेंस्ड डाइट और वॉक का खास ख्याल रखें। लाइफस्टाइल को हेल्दी रखकर ही कैंसर के रिस्क को कम किया जा सकता है।
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निष्कर्ष
डॉ. चेतन कहते हैं कि पंचकर्म आयुर्वेद के अनुसार ही कराना चाहिए क्योंकि गलत तरीके से किया गया पंचकर्म शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। इसे किसी अनुभवी आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह पर ही करना चाहिए। पंचकर्म करते समय हल्का खानपान रखें और अगर साल में एक बार पंचकर्म किया जाए, तो यह शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही पंचकर्म से कैंसर का इलाज या रिस्क कम होने जैसे मिथकों से दूर रहें। अगर किसी को गंभीर बीमारी है या कैंसर है, तो समय पर डॉक्टर से इलाज कराएं।
FAQ
पंचकर्म में क्या खाना चाहिए?
पंचकर्म कराने से पहले ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज जैसा सात्विक भोजन करना चाहिए। इस थेरेपी में कैफीन और शराब से परहेज करना चाहिए।पंचकर्म में कितने दिन लगते हैं?
पंचकर्म का समय रोगी की मेडिकल कंडीशन के अनुसार ही किया जाता है। आमतौर पर पंचकर्म सात दिन से लेकर 21 दिन तक किया जा सकता है।पंचकर्म कितनी बार करना चाहिए?
पंचकर्म साल में एक या दो बार किया जा सकता है।
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Feb 16, 2026 14:16 IST
Modified By : Aneesh Rawat Feb 16, 2026 14:16 IST
Modified By : Aneesh RawatFeb 16, 2026 14:16 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Chetan Sharma