Leech Therapy: आयुर्वेद में शरीर में होने वाली खून की अशुद्धियों को कम करने के लिए नेचुरल थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें लीच थेरेपी सबसे ज्यादा कॉमन है, जिसे जलौकावचारण कहा जाता है। आयुर्वेद के साथ-साथ लीच थेरेपी में एफडीए (FDA) से भी अप्रूव है और इसे मेडिकल प्रैक्टिस में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इसे कई बीमारियों को मैनेज करने के लिए किया जाता है, लेकिन लीच थेरेपी में कई तरह की जटिलताएं भी आती हैं। इसलिए इसका इस्तेमाल करते समय अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में ही करना चाहिए। लीच थेरेपी के फायदे और नुकसान के बारे में जानने के लिए हमने फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल के सीनियर आयुर्वेदिक पंचकर्मा कंसल्टेंट डॉ. चेतन शर्मा (Dr. Chetan Sharma, Sr. Ayurveda Panchakarma Consultant, Sarvodaya Hospital, Faridabad & Noida) से बात की। उन्होंने बताया कि हजारों सालों से जलौकावचारण यानी लीच थेरेपी जरिए स्किन, सूजन और ब्लड के रोग ठीक किए जा रहे हैं।
जलौकावचारण में जोंक की लार क्यों होती है खास?
डॉ. चेतन कहते हैं, “जलौकावचारण में औषधीय जोंक को शरीर के संक्रमित भाग पर लगाया जाता है। इसके बाद जोंक दूषित खून को चूस लेता है और अपनी लार को शरीर में छोड़ देता है। जोंक की लार में कई नेचुरल एंटीकोएगुलेंट, एंटी इंफ्लेमेंटरी और दर्द कम करने वाले तत्व पाए जाते हैं, जिससे ब्लड को जमने से रोकता है और ब्लड फ्लो को बेहतर करता है। सूजन कम होती है। आचार्य सुश्रुत ने इसे खासतौर से कोमल प्रकृति वाले रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए लींच थेरेपी को सेफ बताया है।”

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जलौकावचारण के फायदे क्या है?
डॉ. चेतन ने बताया कि सोरायसिस, एक्जिमा, वैरिकोज, अर्थराइटिस और कुछ न्यूरोवास्कुलर जैसी बीमारियों में जलौकावचारण का इस्तेमाल किया जाता है। NCBI की रिपोर्ट के अनुसार, लीच थेरेपी से जुड़े कुल 12 ट्रायल किए गए और उसके परिणामों को स्टडी किया गया। स्टडी में पाया गया कि लीच थेरेपी के रिजल्ट अलग-अलग कंडीशन्स में सफल रहे हैं। इसमें हार्मोनल और मेटाबॉल्कि जटिलताएं, हार्ट संबंधी रोग और इंफ्लेमेशन से जुड़े रोग शामिल है।
- दूषित ब्लड को निकालकर ब्लड प्यूरीफिकेशन करता है।
- सूजन और दर्द से तुरंत राहत देता है।
- सोरायसिस, एक्जिमा और मुहांसों में बहुत फायदेमंद है।
- वैरिकोज वेन्स और लोकल ब्लड कंजेशन में राहत देता है।
- जख्म भरने के प्रोसेस को तेज करता है।
- माइक्रोसर्कुलेशन सुधारकर टिश्यू हीलिंग बढ़ाता है।
- जोड़ों के दर्द और अर्थराइटिस में आराम देता है।
जलौकावचारण थेरेपी किन्हें नहीं करवानी चाहिए?
डॉ. चेतन ने कहा, “हालांकि, लीच थेरेपी काफी बीमारियों में सेफ होती है, लेकिन कुछ कंडीशन्स में जलौकावचारण नहीं किया जाना चाहिए।
- बहुत ज्यादा कमजोरी या एनीमिया वाले मरीजों को थेरेपी नहीं करानी चाहिए।
- हेमोफिलिया जैसे ब्लीडिंग डिसऑर्डर में लीच थेरेपी नहीं करानी चाहिए।
- प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए जलौकावचारण थेरेपी सेफ नहीं है।
- जिन मरीजों का खून बहुत पतला होता है, उनके लिए यह थेरेपी कारगर नहीं है।
- लो ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह थेरेपी सेफ नहीं है।
- छोटे बच्चों को लीच थेरेपी कराने से डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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जलौकावचारण थेरेपी में क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
डॉ. चेतन ने कहा कि जलौकावचारण थेरेपी करते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए ताकि इंफेक्शन न हो।
- लीच थेरेपी हमेशा प्रशिक्षित आयुर्वेदाचार्य से ही करानी चाहिए।
- स्टरलाइजेशन और मेडिकल ग्रेड जोंक का ही इस्तेमाल करना जरूरी है।
- हर मरीज के लिए अलग जोंक का इस्तेमाल होना चाहिए ताकि इंफेक्शन का डर न रहे।
- इलाज के बाद ड्रेसिंग और डॉक्टर की निगरानी रखना बहुत जरूरी है।
निष्कर्ष
डॉ. चेतन कहते हैं कि जलौकावचारण न सिर्फ आयुर्वेद में, बल्कि वैज्ञानिक तौर पर भी मान्यता प्राप्त है। अगर सही बीमारी के लिए सही थेरेपी की जाए, तो बहुत फायदेमंद होती है। इसके साथ मरीजों को पहले आयुर्वेदाचार्य से इसके रिस्क फैक्टर्स और परिणाम के बारे में जरूर जानना चाहिए।
FAQ
जलोका क्या होता है?
आयुर्वेद में जोंक को जलयुका भी कहा जाता है। जोंक पानी में रहते हैं और पित्त विकार होने पर इसका इस्तेमाल किया जाता है।जोंक को खून खींचने में कितना समय लगता है?
जलौकावचारण थेरेपी में करीब 45 मिनट तक जोंक को छोड़ दिया जाता है ताकि वे दूषित खून चूस सके और करीब 15 मिली खून निकाला जाता है।क्या डॉक्टर इलाज के लिए जोंक का इस्तेमाल करते हैं?
आधुनिक चिकित्सा में लीच थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसके लिए अनुभवी डॉक्टर का होना बहुत जरूरी है।
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Feb 26, 2026 15:56 IST
Modified By : Aneesh Rawat Feb 26, 2026 15:56 IST
Modified By : Aneesh RawatFeb 26, 2026 15:56 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Chetan Sharma