आयुर्वेद में गंध प्रसारिणी के पौधे का है विशेष महत्व, इन 5 समस्याओं में दिलाता है तुरंत आराम

आयुर्वेद में गंध प्रसारिणी की पत्तियों का इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है। इससे स्वास्थ्य को कई लाभ होते हैँ। आइए जानते हैं इस बारे में-

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Jul 21, 2021Updated at: Jul 21, 2021
आयुर्वेद में गंध प्रसारिणी के पौधे का है विशेष महत्व, इन 5 समस्याओं में दिलाता है तुरंत आराम

गंध प्रसारिणी एक आयुर्वेदिक औषधि है। यह एक लता है, जिसमें ढेर सारी पत्तियां और फूल होते हैं। पहाड़ी इलाकों में गंध प्रसारिणी बहुतायत में पाया जाता है। इसमें बहुत ही तीव्र और उग्र गंध आती है। इसलिए इसे उग्र प्रसारिणी भी कहते हैं। आयुर्वेद में इसके इस्तेमाल से कई तरह की परेशानियों को दूर किया जा सकता है। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल सर्वोत्तम औषधि के रूप में किया जाता है। इस बारे में गाजियाबाद स्वर्ण जयंती के आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर राहुल चतुर्वेदी बताते हैं कि गंध प्रसारिणी के इस्तेमाल से आप आमबात की शिकायत को दूर कर सकते हैं। इसके इस्तेमाल से पेट में मरोड़, अफरा, अर्थराइटिस जैसी परेशानियों को दूर किया जा सकता है। चलिए विस्तार से जानते हैं गंध प्रसारिणी के फायदों के बारे में- 

1. पेट में मरोड़ 

डॉक्टर राहुल चतुर्वेदी का कहना है कि अगर आपको पेट में मरोड़, गैस, उल्टी या मतली जैसी शिकायत है, तो गंध प्रसारिणी की पत्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए इसकी कुछ पत्तियों को लें। इन पत्तियों को भुनकर साग की तरह अपने भोजन में शामिल करें। इन पत्तियों को पकाने के बाद इसकी गंध समाप्त हो जाती है। इस साग का सेवन करने से पेट में होने वाली शिकायत दूर हो सकती है। 

आयुर्वेदाचार्य का कहना है कि अगर आप दिन में 2 से 3 चम्मच साग का सेवन करते हैं, तो इससे आंतों में जमा मल साफ हो जाएगा और आपको पेट में होने वाली परेशानियों से आराम मिल सकता है।

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2. लिवर सूजन से दिलाए राहत

गंध प्रसारिणी का साग लिवर के सूजन से भी राहत दिला सकता है। यह आपके लिवर में मौजूद वायरस-बैक्टीरिया को खत्म करता है। साथ ही लिवर के सूजन को कम करके आपकी परेशानियों को कम करता है। लिवर में सूजन होने पर किसी आयुर्वेदाचार्य की सलाह पर गंध प्रसारिणी की पत्तियों का सेवन करें। इससे आपको काफी लाभ मिल सकता है।

इसके अलावा अगर आप गंध प्रसारिणी की पत्तियों का साग बनाकर नहीं खाना चाहते हैं, तो इसका सेवन अन्य तरीकों से भी कर सकते हैं। जैसे- गंध प्रसारिणी की 3 से 4 ग्राम पत्तियां या फिर जड़ लें। अब इसे करीब 200 से 300 मिली लीटर पानी में उबालें। अब पानी आधा बच जाए, तो इसे छानकर पिएं। इससे पेट और लीवर की समस्याओं से राहत मिलेगा।

3. अर्थराइटिस के रोगियों के लिए है असरकारी

आयुर्वेदाचार्य का कहना है कि गंध प्रसारिणी की पत्तियों का साग बनाकर खाने से अर्थराइटिस में होने वाली परेशानियों को भी दूर किया जा सकता है। अगर आपके पैरों में सूजन या फिर ज्वॉइंट्स में दर्द है, तो दिन में 2 से 3 बार गंध प्रसारिणी के साग का सेवन करें। इससे अर्थराइटिस की समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकता है। 

4. घुटने के दर्द से राहत

अगर आपके घुटनों या फिर पैरों के ज्वाइंट में दर्द हो रहा है, तो गंध प्रसारिणी की पत्तियों से तैयार साग का सेवन करें। इसके अलावा आप इसकी पत्तियों को कुचलकर इसका पेस्ट तैयार कर सकते हैं। इस पेस्ट को हल्का सा गर्म करके अपने प्रभावित स्थान पर लगाएं। इससे घुटनों और ज्वाइंट्स में हो रहे दर्द से राहत मिल सकता है। 

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5. घाव और चोट से दिलाए राहत

अगर आपके हाथ-पैरों या फिर शरीर के किसी भी हिस्से में घाव या चोट लगा हुआ है, तो गंध प्रसारिणी की पत्तियां आपके लिए लाभकारी हो सकती हैं। इसके लिए सबसे पहले नीम और गंध प्रसारिणी की पत्तियों को बराबर मात्रा में लें। अब इन्हें पानी में अच्छे से उबालें। इसके बाद उबले हुए पानी से अपने घाव या फिर चोट लगे हुए स्थान को साफ करें। इससे आपके घाव या चोट लगे हुए स्थान पर सूजन नहीं होगी। साथ ही आपका घाव जल्दी भर जाएगा।

आयुर्वेद में गंध प्रसारिणी का विशेष महत्व है। लेकिन ध्यान रखें कि इनकी पत्तियों का सेवन एक्सपर्ट की सलाहनुसार ही करें। अगर आपको किसी तरह की परेशानी हो, तो एक्सपर्ट की राय लेने से पहले इसका इस्तेमाल करने से बचें।

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