प्रेगनेंसी के 18 से 21 सप्ताह के बीच कराया जाता है एनॉमली स्कैन, जानें क्यों जरूरी है ये टेस्ट

गर्भावस्था के 18वें सप्ताह से लेकर 21वें सप्ताह के बीच किये जाने वाले अल्ट्रासाउंड टेस्ट को एनॉमली स्कैन कहते हैं, जानें इस टेस्ट से जुड़ी जरूरी बातें।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Oct 08, 2021
प्रेगनेंसी के 18 से 21 सप्ताह के बीच कराया जाता है एनॉमली स्कैन, जानें क्यों जरूरी है ये टेस्ट

प्रेगनेंसी के दौरान मां और बच्चे की सेहत की जांच करने के लिए कई तरह के टेस्ट और स्कैन किये जाते हैं। प्रेगनेंसी के 18वें सप्ताह से 21वें सप्ताह के बीच किये जाने वाले टेस्ट को मिड प्रेगनेंसी टेस्ट के नाम से जाना जाता है। मिड प्रेगनेंसी टेस्ट को मेडिकल साइंस की भाषा में एनॉमली स्कैन (Anomaly Scan) कहा जाता है। एनॉमली स्कैन के द्वारा मां वोम्ब की जांच की जाती है और इसके द्वारा गर्भ में पल रहे बच्चे और मां की सेहत का पता लगाया जाता है। एनॉमली स्कैन के जरिए भ्रूण के लिंग का भी पता लगाया जा सकता है लेकिन आपको बता दें कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग की जांच कराना गैरकानूनी है। मिड प्रेगनेंसी टेस्ट या एनॉमली स्कैन के जरिए आप भ्रूण के शरीर के विकास और उसमें मौजूद दोष के बारे में जान सकते हैं। एनॉमली स्कैन के समय तक गर्भ में पल रहे बच्चे के अंगों का विकास शुरू हो जाता है और ऐसे समय में बच्चे की सेहत और उसके शरीर की जांच करने के लिए यह स्कैन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। आइये विस्तार से जानते हैं इस टेस्ट के बारे में। 

क्या होता है एनॉमली स्कैन? (What Is Anomaly Scan?)

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(image source - freepik.com)

गर्भावस्था के 18 से 21 सप्ताह के बीच यानी मिड प्रेगनेंसी के दौरान यह टेस्ट किया जाता है। यह एक प्रकार का अल्ट्रासाउंड टेस्ट है जिसके जरिए गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत की गहन जांच की जाती है। इस टेस्ट में भ्रूण के शरीर के सभी अंगों की गहराई से जांच होती है। एनॉमली स्कैन में गर्भ में पल रहे बच्चे की प्लेसेंटा की स्थिति का पता लगाते हैं और एमनियोटिक द्रव की मात्रा की जांच करते हैं और उसके शरीर के विकास के बारे में जानकारी ली जाती है। इस अल्ट्रासाउंड जांच में भ्रूण के मस्तिष्क, हृदय, चेहरे, पेट, आंत, किडनी और रीढ़ आदि की विस्तृत जांच होती है। एनॉमली स्कैन के जरिए ही चिकित्सक गर्भ में पल रहे बच्चे की गर्भ नाल और अपरा की स्थिति की भी जांच करते हैं और साथ मां के पेट में बच्चे की हलचल का भी पता लगाया जाता है। अगर इस जांच के दौरान बच्चे की सेहत में कोई गड़बड़ी दिखती है तो चिकित्सक उसका इलाज करते हैं। इस जांच के माध्यम से आप बच्चे की सेहत का सही अंदाजा लगाकर समय रहते उसका निवारण भी कर सकते हैं।

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एनॉमली स्कैन से होती है इन चीजों की जांच (What Does An Anomaly Scan Detect?)

अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ (सोनोग्राफर) द्वारा इस जांच को अंजाम दिया जाता है। इस टेस्ट से बच्चे की पूरी शरीर की जांच की जाती है और उसके स्वास्थ्य की स्थितियों का पता लगाया जाता है। भविष्य में बच्चे को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या न हो इसका भी पता इस टेस्ट के माध्यम से लगाया जाता है। एनॉमली स्कैन या मिड प्रेगनेंसी स्कैन के जरिए बच्चे के शरीर के इन अंगों की गहन जांच की जाती है।

  • बच्चे सिर और मस्तिष्क की जांच।
  • बच्चे के हृदय की जांच।
  • उसके पेट और आंतों की जांच।
  • बच्चे की रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइनल कॉर्ड की जांच।
  • चेहरे और होंठ की जांच।
  • किडनी और मूत्राशय की जांच
  • प्लेसेंटा की स्थिति।
  • बच्चे के मुक्त संचलन के लिए एमनियोटिक द्रव की जांच।
  • इसके अलावा शरीर के कई अंगों की गहन जांच।
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क्यों कराना चाहिए एनॉमली स्कैन? (Reason To Have Anomaly Test)

एनॉमली स्कैन के जरिए पेट में पल रहे बच्चे की सेहत से जुड़ी छोटी से छोटी समस्याओं की जांच की जाती है। कई बार इस जांच के दौरान कुछ ऐसी सस्याओं के बारे में पता चलता है जो भविष्य में होने वाली समस्याओं का कारण बन सकती हैं। ऐसे में इस जांच के बाद डॉक्टर उन समस्याओं के निदान के लिए इलाज कर सकता है। मिड प्रेगनेंसी स्कैन या एनॉमली स्कैन जांच इन कारणों से जरूर करानी चाहिए।

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  • गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य की स्थिति जानने के लिए।
  • गर्भ में पल रहे बच्चे जुड़वां हैं या नहीं इसकी जांच के लिए।
  • बच्चे में जन्मदोष की स्थिति का पता लगाने के लिए।
  • बच्चे के शरीर के अंगों के विकास की स्थिति के बारे में जानकारी लेने के लिए।
  • गुणसूत्र संबंधी समस्याओं की संभावना को जानने के लिए।

कितना सटीक होता है एनॉमली स्कैन? (Anomaly Scan Accuracy)

स्वास्थ्य की स्थितियों का पता लगाने के लिए की जाने वाली कोई भी स्क्रीनिंग 100 प्रतिशत सटीक नहीं हो सकती है। हां जांच के बाद चिकित्सक को शरीर में उत्पन्न हो रही समस्याओं के बारे में जानकारी जरूर जुटा सकते हैं। एनॉमली स्कैन के जरिए भी गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास और उसके शरीर के अंगों की स्थिति के बारे में पता लगाया जाता है। इस स्क्रीनिंग के जरिए मिलने वाली जानकारी के आधार पर चिकित्सक यह बता सकते हैं कि आपके गर्भ में पल रहा बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है या नहीं। हालांकि कुछ कारणों से टेस्ट के बाद भी बच्चे में कुछ समस्याएं हो सकती हैं। इस टेस्ट के जरिए इन चीजों पर फोकस किया जाता है। 

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एनॉमली स्कैन से किन स्थितियों का पता लगाया जा सकता है? (Which Abnormalities Can Be Seen On The Anomaly Scan?)

एनॉमली स्कैन या मिड प्रेगनेंसी टेस्ट के जरिए सोनोग्राफर गर्भ में पल रहे बच्चे के शरीर में इन चीजों का पता लगा सकते हैं।

  • सिर और मस्तिष्क के बारे में  98 प्रतिशत तक जानकारी।
  • चेहरे और होंठ की 75 प्रतिशत जानकारी।
  • अंगों के विकास के बारे में 60 प्रतिशत सटीक जानकारी।
  • रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं के बारे में 90 प्रतिशत तक की जानकारी।
  • किडनी से जुड़ी समस्याओं के बारे में 84 प्रतिशत तक जानकारी।
  • हृदय की प्रमुख समस्याओं के बारे में 50 प्रतिशत जानकारी।

आमतौर पर एनॉमली स्कैन या मिड प्रेगनेंसी टेस्ट कराना अनिवार्य नहीं होता है लेकिन डॉक्टर इसकी सलाह गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति का पता लगाने के लिए देते हैं। इस टेस्ट के माध्यम से आपको गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति और उसके स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इसके अलावा बच्चे में भविष्य में होने वाली समस्याओं का अंदाजा भी इस टेस्ट के माध्यम से लगाया जा सकता है। यह लगभग 20 मिनट में होने वाला एक अल्ट्रासाउंड टेस्ट है जिसमें सोनोग्राफर अल्ट्रासाउंड प्रोब या ट्रासड्यूसर को पेट पर घुमाकर गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति की जांच करते हैं। इसे एक जोखिम रहित प्रक्रिया माना जाता है। एनॉमली स्कैन के बाद अगर बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं तो उसे बेहतर ढंग से समझने के लिए चिकित्सक कुछ और जांच की सलाह दे सकते हैं। अगर बच्चे के शरीर में किसी भी तरह की समस्या का पता चलता है तो उसके लिए चिकित्सक मौजूद उपचार विकल्पों का सहारा लेते हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर बच्चे के जन्म के बाद उसका इलाज शुरू कर सकते हैं। एनॉमली स्कैन या मिड प्रेगनेंसी टेस्ट से जुड़ी अन्य बातों की जानकारी के लिए आप एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह ले सकती हैं।

(main image source - theofy.world)

Reference:

https://www.nhsinform.scot/healthy-living/screening/pregnancy/mid-pregnancy-scan-fetal-anomaly-scan

https://www.nhs.uk/conditions/pregnancy-and-baby/20-week-scan/

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