प्रेगनेंसी में निमोनिया होने के 6 कारण, लक्षण, खतरे और बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

गर्भावस्था के दौरान निमोनिया होने से मां और बच्चे की सेहत पर क्या नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जानते हैं इसके लक्षण, कारण और उपचार...

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Aug 05, 2021Updated at: Aug 05, 2021
प्रेगनेंसी में निमोनिया होने के 6 कारण, लक्षण, खतरे और बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

निमोनिया बीमारी एक ऐसी बीमारी है, जिससे सभी परिचित हैं। ये समस्या फेफड़ों से संबंधित  है। जी हां, निमोनिया एक इंफेक्शन होता है जो दोनों फेफड़ों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर देता है। जब किसी व्यक्ति को निमोनिया होता है तो उसके कारण फेफड़ों में श्वसन मार्ग के माध्यम से तरल पदार्थ या पस भरने लगता है। बता दें जब ये समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है तो फेफड़ों के कार्यों को प्रभावित कर सकती है। लेकिन सवाल यह है कि प्रेगनेंसी के दौरान निमोनिया होना कितना खतरनाक है? आज का हमारा लेख भी इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे की प्रेगनेंसी के दौरान निमोनिया होने के क्या कारण हैं। साथ ही इसके लक्षण और बचाव भी जानेंगे। पढ़ते हैं आगे...

प्रेगनेंसी के दौरान निमोनिया होने के लक्षण

प्रेगनेंसी के दौरान यदि किसी महिला को निमोनिया होता है तो निम्न लक्षण नजर आ सकते हैं-

1 - जल्दी जल्दी सांस लेना या फिर सांस लेने में तकलीफ महसूस करना

2 - अधिक खांसी आना

3 - अधिक बलगम आना

4 - महिलाओं को सांस लेने के दौरान कुछ आवाज सुनाई देना या घरघराहट महसूस करना

5 - छाती में दर्द होना।

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प्रेगनेंसी में निमोनिया होने कारण

प्रेगनेंसी के दौरान निमोनिया किसी संक्रमित व्यक्ति के माध्यम से फैल सकता है। जब संक्रमित के मुंह, नाक से ड्रॉपलेट्स निकलते हैं और महिलाएं तरल बूंदों के संपर्क में आती हैं तो वह सांस की राह तक पहुंच जाती हैं और गर्भवती महिलाओं को संक्रमित कर सकती हैं। इसके अलावा जब महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान निमोनिया हो जाता है तो उसके पीछे निम्न कारण हो सकते हैं-

1 - मलेरिया के कारण महिलाएं समस्या से ग्रस्त हो सकती हैं।

2 - जब गले नाक और फेफड़ों को प्रभावित करने वाला वायरस इनफेक्शन इनफ्लुएंजा होता है तब भी ये समस्या हो सकती है।

3 - जब किसी व्यक्ति को वेरीसेला जोस्टर वायरस यानी चिकन पॉक्स के कारण होने वाला वायरस हो जाता है तब ये समस्या हो सकती है।

4 - देश में हो रहे कोरोनावायरस के कारण भी प्रेगनेंसी के दौरान निमोनिया हो सकता है।

5 - फेफड़ों से जुड़ा एक विकार है जो बैक्टीरिया के कारण होता है इस विकार का नाम है ट्यूबरक्लोसिस।

6 - सांस तंत्रिका को प्रभावित करने वाला वायरस रेस्पिरेट्री सिनसाइटिकल वायरस होता है तब भी ये समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान हुई निमोनिया की पहचान कैसे की जाती है?

यदि किसी महिला को प्रेगनेंसी के दौरान निमोनिया के लक्षण नजर आ रहे हैं तो डॉक्टर निम्न तरीकों से पता लगाते हैं-

1 - छाती के एक्स-रे के माध्यम से फेफड़ों में इंफेक्शन के प्रभाव को देखते हैं।

2 - ब्लड टेस्ट के माध्यम से खून में इन्फेक्शन का पता लगाते हैं।

3 - जब फेफड़ों पर इंफेक्शन के प्रभाव हो देखा जाता है तो उसके लिए चेस्ट अल्ट्रासाउंड की मदद ली जाती है।

4 - इससे अलग डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री के माध्यम से भी निमोनिया का पता लगाते हैं।

5 - दूसरी तरह धड़कन सुनने वाला यंत्र स्टैथोस्कोप के माध्यम से भी सीने की आवाज को सुना जा सकता है।

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प्रेगनेंसी के दौरान निमोनिया से होने वाली जटिलताएं-

जब गर्भवती महिलाएं निमोनिया का शिकार होती हैं तो कई जटिलताएं बढ़ जाती हैं। वे हार्ट फेल, किडनी फेल, जोड़ों में दर्द, सूजन की समस्या यानी गठिया, हृदय की भीतरी दीवार की सूजन यानी एंडोकार्डिटिस, रीढ़ और दिमाग की परत से संबंधित सूजन मेनिनजाइटिस आदि समस्याएं हो सकती हैं। वहीं इसके कारण बच्चे (भ्रूण) पर भी प्रभाव पड़ सकता है, जैसे- कम वजन के साथ जन्म लेना, प्रीमेच्योर डिलीवरी, सांस लेने में दिक्कत आदि समस्याएं हो सकती हैं।

गर्भावस्था के दौरान निमोनिया से बचाव

1 - धूम्रपान ना करना

2 - किसी व्यक्ति के खांसने, छींकते वक्त रुमाल का इस्तेमाल करें।

3 - पब्लिक प्लेस में किसी स्थान को सोते वक्त सैनिटाइज करना।

4  - अपने आसपास सफाई रखना।

5 - जब किसी बीमार व्यक्ति के पास जाएं तो मास्क आदि का प्रयोग करें या व्यक्ति को छूने की कोशिश ना करें।

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गर्भावस्था के दौरान निमोनिया से बचने के घरेलू उपाय

1 - अगर किसी महिलाओं को गर्भावस्था के निमोनिया से बचाव करना है तो वह हल्दी के उपयोग से समस्या को दूर कर सकती हैं। बता दें हल्दी इम्यून सिस्टम को बढ़ाता है और साथ ही यह गर्भावस्था के दौरान खाने में भी सुरक्षित है। ऐसे में गर्भावस्था में हल्दी वाला दूध सेहत के लिए बेहद उपयोगी है।

2 - गर्भावस्था के दौरान लहसुन के उपयोग से भी समस्या को दूर किया जा सकता है। हालांकि गर्भावस्था में लहसुन खाना चाहिए या नहीं इसके लिए एक्सपर्ट की सलाह जरूरी है।

3 - शहद निमोनिया से राहत दिलाने में उपयोगी है। शहद के अंदर एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं जो गर्भावस्था के दौरान निमोनिया के होने से बचाव करने में उपयोगी है।

4 - अदरक के उपयोग से गर्भावस्था के दौरान निमोनिया से बचा जा सकता है।

5 - चुकंदर का रस गर्भावस्था के दौरान होने वाली इस समस्या से बचा जा सकता है ऐसे में गर्भावस्था के दौरान का सेवन करें।

नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि गर्भावस्था के दौरान निमोनिया होने पर मां और बच्चे दोनों की सेहत पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में इस समस्या को समय रहते ठीक करना जरूरी है। बता दें कि इस समस्या से बच्चे की जान को भी खतरा हो सकता है। ऐसे में लापरवाही सही नहीं है। ऐसे में डॉक्टर से इलाज कराना जरूरी है। जैसे ही ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें तो माएं तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और अपना चेकअप कराएं। ध्यान दें कि डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान इलाज के तौर पर कुछ दवाइयों का सेवन करने की सलाह देते हैं। वहीं वे कुछ टेस्ट के माध्यम से पता लगाकर निमोनिया को एंटीवायरल इंजेक्शन के माध्यम से भी ठीक करने की कोशिश करते हैं। गर्भावस्था में फंगल इन्फेक्शन के कारण भी समस्या हो सकती है ऐसे में दवा के माध्यम से इस समस्या को भी दूर करते हैं।

इस लेख में इस्तेमाल की जानें वाली फोटोज़ Freepik से ली गई हैं।

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