एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के कारण फेफड़े जा सकते हैं शॉक में, जानें इस बीमारी के बारे में

एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम फेफड़ों में होने वाली एक गंभीर बीमारी है जो कोरोनावायरस संक्रमण , सेप्सिस और कई अन्य समस्याओं के कारण होती है।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Aug 24, 2021Updated at: Aug 24, 2021
एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के कारण फेफड़े जा सकते हैं शॉक में, जानें इस बीमारी के बारे में

कोरोनावायरस महामारी के बाद कई प्रकार की नई बीमारियों के बारे में सुनने को मिल रहा है। गुलियन बेरी सिंड्रोम, ब्लैक फंगस के बाद तमाम लोग कोरोना से संक्रमित होने के दौरान फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर समस्या का शिकार हुए हैं। फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी 'एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम' को गंभीर बीमारी माना जाता है। इस बीमारी के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत से लेकर चलने फिरने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यह बीमारी इतनी घातक है कि इसकी वजह से फेफड़े शॉक (सदमे) में जा सकते हैं। एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के कारण आपके दिल की धड़कन भी अनियमित हो सकती है। डॉक्टर्स इस बीमारी को मेडिकल इमरजेंसी मानते हैं और इसके लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाने की सलाह देते हैं। आइये जानते हैं फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के बारे में।

क्या है एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम? (What is Acute Respiratory Distress Syndrome?)

एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम यानी एआरडीएस फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। इस समस्या में फेफड़ों के अंदर मौजूद लिक्विड फेफड़े के वायुकोष में चला जाता है, जिसके कारण मरीज के फेफड़ों में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है और आपके ब्लड सर्कुलेशन में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है। इस समस्या के कारण आपके शरीर के सभी अंगों तक उचित मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है जिसकी वजह से ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम ज्यादातर गंभीर रूप से बीमार लोगों में देखा जाता है। इस समस्या के कारण मरीज को सांस लेने में तकलीफ, खड़े होने या चलने फिरने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इस बीमारी को एक्यूट लंग इंजरी या शॉक लंग के नाम से भी जाना जाता है।

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एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के कारण (What Causes Acute Respiratory Distress Syndrome?)

एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम फेफड़ों में होने वाली गंभीर बीमारी है जिसे शॉक लंग भी कहा जाता है। इस समस्या में फेफड़ों के वायुमार्ग में लिक्विड इकठ्ठा हो जाता है जिसकी वजह से मरीज को सांस लेने में तकलीफ समेत फेफड़ों और शरीर से जुड़ी कई अन्य समस्या हो सकती है। यह बीमारी मुख्य रूप से सेप्सिस जैसे रोगों के कारण होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सेप्सिस संक्रमण की स्थिति में शरीर के अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। यह समस्या फेफड़ों को भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त करती है जो कि एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम का कारण बनता है। इस समस्या के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं।

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  • सेप्सिस संक्रमण के कारण एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम।
  • निमोनिया की समस्या भी एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम का कारण होती है।
  • ड्रग की टॉक्सिसिटी या फिर ओवरडोज की वजह से भी ARDS की समस्या हो सकती है।
  • प्रदूषित हवा में सांस लेने की वजह से भी एआरडीएस का खतरा रहता है।
  • सिर या छाती पर लगी गंभीर चोट की वजह से भी यह स्थिति पैदा हो सकती है।
  • कोरोनावायरस में भी फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचता है जिसकी वजह से कोविड संक्रमित मरीजों में यह समस्या देखी गयी है।
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एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के लक्षण (Acute Respiratory Distress Syndrome Symptoms)

एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम की समस्या में फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। फेफड़ों के वायुमार्ग में लिक्विड इकठ्ठा होने की वजह से मरीज को सांस लेने में तकलीफ, हांफना, दिल की धड़कन का अनियमित होना समेत कई अन्य समस्याएं होती हैं। इस बीमारी में दिखने वाले कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं।

एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम का इलाज (Acute Respiratory Distress Syndrome Treatment)

एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम की समस्या ज्यादातर लोगों में गंभीर बीमारी से ग्रसित होने की स्थिति में होती है। आमतौर पर यह समस्या अस्पताल में भर्ती लोगों में देखी गयी है। इस बीमारी का पता चलने पर डॉक्टर हायर एंटीबायोटिक्स और बीपी को संतुलित करने वाली दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। 55 साल से अधिक उम्र वाले लोग जिन्हें डायबिटीज, किडनी की बीमारी, लिवर से जुड़ी समस्या या अस्थमा व कैंसर है उन्हें एक्सपर्ट पल्मनोलॉजिस्ट चिकित्सक से समय-समय पर सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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