प्रेगनेंसी में ब्लड इंफेक्शन (सेप्सिस) हो सकता है खतरनाक, जानें इसके 9 लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के खून में इन्फेक्शन यानी सेप्सिस का सामना करना पड़ सकता है। जाने इसके लक्षण, कारण और बचाव...

Garima Garg
Written by: Garima GargUpdated at: Aug 11, 2021 13:19 IST
प्रेगनेंसी में ब्लड इंफेक्शन (सेप्सिस) हो सकता है खतरनाक, जानें इसके 9 लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

प्रेगनेंसी के दौरान अकसर महिलाएं शरीर में हो रहे कई बदलावों से गुजरती हैं। उन्हें इस अवस्था में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बता दें कि ऐसी ही एक समस्या है जो गर्भवती महिलाओं को हो सकती है। उसका नाम है शरीर में खून में इन्फेक्शन होना, इसे सेप्सिस के नाम से भी जाना जाता है। जब शरीर में संक्रमण एक चेन के रूप में रिएक्शन शुरू करता तो और ऐसे समय में अगर सही समय पर उपचार न कराया जाए तो यह संक्रमण टिशू डैमेज, ऑर्गन फैलियर आदि की समस्या पैदा कर सकता है, जिसके कारण व्यक्ति की जान भी जा सकती है। जिन लोगों की इम्युनिटी सिस्टम बेहद कमजोर होती है वह इस समस्या से ज्यादा ग्रस्त रह सकते हैं। बता दें कि गर्भावस्था के दौरान भी यह समस्या हो सकती है। आज का हमारा लेख भी इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि गर्भावस्था के दौरान खून में इन्फेक्शन होने के क्या क्या लक्षण हैं। साथ ही कारण और उपचार भी जानेंगे। पढ़ते हैं आगे...

ध्यान दें कि जो गर्भावस्था के दौरान किसी व्यक्ति को खून में इन्फेक्शन होता है तो उसके मुख्य 3 चरण होते हैं, इन चरणों से समस्या की गंभीरता का पता लगाया जा सकता है। अगर पहले चरण की बात करें तो पहला चरण होता है सेप्सिस यानी जिसमें इम्यून सिस्टम रक्त वाहिकाओं में किसी तरीके का रासायनिक पदार्थ छोड़ता है और पूरे शरीर में सूजन पैदा करता है। इसके बाद आता है सेवियर सेप्सिस, ये ऑर्गन फैलियर और ऑर्गन डिस्फंक्शन के रूप में दिखता है। वहीं तीसरा चरण होता है सेप्टिक शॉक, सेप्टिक शॉक बेहद ही गंभीर परिस्थिति होती है जब शरीर का संक्रमण गंभीर निम्न रक्तचाप की वजह बन जाता है। 

गर्भावस्था के दौरान खून में इन्फेक्शन होने के लक्षण

बता दें कि जब गर्भावस्था के दौरान महिलाएं इस समस्या से ग्रस्त होती है तो उन्हें निम्न लक्षण नजर आ सकते हैं-

1 - महिलाओं को मतली की समस्या पैदा होना।

2 - महिलाओं की दिल की धड़कन का तेज चलना।

3 - जब गर्भावस्था के दौरान ये समस्या होती तो महिलाएं तेज तेज सांस लेना शुरू कर देती हैं या उनकी सांस फूलना शुरू हो जाती है।

4 - जब महिलाएं इस समस्या से ग्रस्त होती है तो उनके पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना शुरू हो जाता है।

5 - इस समस्या के दौरान महिलाओं की योनि से गुलाबी रंग का डिस्चार्ज आ सकता है।

6 - इस समस्या से ग्रस्त गर्भवती महिलाएं तेज बुखार से पीड़ित रह सकती हैं।

7 - योनि से रक्तस्राव की समस्या भी हो सकती है।

8 - महिलाएं सिर दर्द की समस्या से भी ग्रस्त हो सकती हैं।

9 - महिलाओं की बॉडी का टेंपरेचर भी बदल सकता है।

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गर्भावस्था के दौरान खून में इन्फेक्शन होने के कारण

बता दें कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में काफी बदलाव आते हैं ऐसे में महिलाएं शरीर में होने वाले नकारात्मक बदलावों को सामान्य समझकर उन्हें अनदेखा कर देती हैं और वो आगे चलकर गंभीर समस्या का रूप ले सकते हैं। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान होने वाले बदलावों के बारे में तुरंत डॉक्टर को बताएं। जब महिलाएं पेट, किडनी या मूत्राशय से संबंधित संक्रमण का शिकार होती हैं तब उन्हें ये समस्या हो सकती है। इससे अलग महिलाएं बैक्टीरियल संक्रमण, जननांग पथ से जुड़ी संक्रमण या निमोनिया जैसे संक्रमण का शिकार होती हैं तब भी उन्हें ये समस्या हो सकती है। इसके अलावा यदि महिलाओं को किसी प्रकार की चोट या घाव लगा है तो वह घाव आगे चलकर संक्रमण का रूप ले सकता है।

गर्भावस्था के दौरान खून में इन्फेक्शन से बचाव

1 - महिलाओं का अपने आसपास सफाई बनाए रखनी चाहिए और साफ पानी का प्रयोग करना चाहिए।

2 - महिलाओं को जरूरी टीकाकरण करवाना चाहिए।

3 - गर्भावस्था के दौरान समय पर दवाई लेनी जरूरी है।

4 - गर्भावस्था के दौरान संतुलित खाना लेना जरूरी है।

5 - महिलाएं अगर किसी भी प्रकार की तकलीफ महसूस करती हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

6 - अगर महिलाओं को किसी प्रकार की चोट लगी है या वह किसी घाव से परेशान हैं तो तुरंत उस घाव को भरने के लिए किस दवा का प्रयोग क। इसके लिए आप डॉक्टर की सलाह भी ले सकते हैं।

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बता दें कि डॉक्टर इस समस्या का परीक्षण करने के लिए सबसे पहले मौखिक रूप से जांच करते हैं। उसके बाद वे खून में इंफेक्शन में लक्षणों के आधार पर ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट या फिजिकल एग्जामिनेशन आदि करवाने की सलाह देते हैं। इससे अलग डॉक्टर शरीर में संक्रमण का सोर्स पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, एक्स-रे आदि की मदद भी लेते हैं। वहीं जब इंफेक्शन का पता चलता है तो इसके उपचार के लिए डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने की सलाह देते हैं। वही ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखने के लिए वेंटिलेशन भी एक विकल्प होता है। बता दे सर्जरी के माध्यम से भी पेल्विस एरिया में अगर कोई पस है तो उसे निकाला जा सकता है। इससे अलग कुछ और भी तरीके होते हैं जिससे डॉ़क्टर मरीजों का उपचार करते हैं और उन्हें ठीक करने की कोशिश करते हैं। 

नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि गर्भावस्था के दौरान अगर खून में इन्फेक्शन हो जाए तो यह बेहद गंभीर समस्या हो सकती है। इ सके कारण जान पर भी खतरा हो सकता है। इस लेख में समस्या से संबंधित लक्षणों का जिक्र किया गया है। ऐसे में इसके लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा ऊपर बताए गए बचाव को गर्भावस्था के दौरान अपनाना चाहिए। महिलाओं का अपने आस-पास साफ सफाई रखना बेहद जरूरी है। ऐसा करने से महिलाएं कई तरह के संक्रमण से बच सकती हैं। वहीं संतुलित आहार भी बेहद जररूी है। लेकिन अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले एक बार गर्भवती महिलाओं को एक्सपर्ट की सलाह जरूर लेनी चाहिए। किसी के कहने पर अपनी दिनचर्या में बदलाव न करें। ध्यान रहे कि अगर आपको किसी भी तरीके की तकलीफ महसूस होती है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

 इस लेख में इस्तेमाल की जानें वाली फोटोज़ Freepik से ली गई हैं।

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