जानें क्‍या है न्‍युट्रोपेनिया

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 11, 2016
Comment

Subscribe for daily wellness inspiration

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • न्युट्रोपेनिया, ब्‍लड में होने वाली समस्‍या है।
  • इसमें न्युट्रोफिल की संख्या कम हो जाती है।
  • न्युट्रोफिल्स बोन मैरो के ह्वाइट ब्‍लड सेल्‍स हैं।
  • बोन मैरो के बाहर न्युट्रोफिल का नष्ट होना।

न्युट्रोपेनिया, ब्‍लड में होने वाली ऐसी समस्‍या है, जिसमें ब्‍लड ग्रैनुलोसाइट (granulocyte) में समस्‍या हो जाती हैं, और न्युट्रोफिल की संख्या कम हो जाती है। न्युट्रोफिल, ह्वाइट ब्‍लड सेल्‍स का एक प्रकार हैं, जो शरीर की सुरक्षा के लिए इंफेक्‍शन के खिलाफ लड़ता है।

neutropenia

न्युट्रोपेनिया

न्युट्रोपेनिया उन लोगों में होता है, जिनमें न्यूट्रोफिल नामक सेल्‍स की संख्या असामान्य रूप से कम हो जाती हैं। न्युट्रोफिल्स प्रतिरक्षा प्रणाली में पाये जाने वाले ऐसे सेल्स हैं, जो, हमारे शरीर में बाहर से आकर आक्रमण करने वाले बैक्टीरिया और अन्य जीवों पर आक्रमण कर उन्हें शरीर में पनपने से रोकते हैं।


न्युट्रोफिल्स वह, ह्वाइट ब्‍लड सेल्‍स हैं, जिनका निर्माण बोन मैरो में होता है, और वहां से वह ब्‍लड में मिलकर पूरे शरीर में होते करते हुए संक्रामक बैक्टीरिया से शरीर की रक्षा करते है। शरीर में जहां भी इंफेक्‍शन होता है, यह कोशिकाएं वहां पहुंच कर इंफेक्‍शन फैलाने वाले वायरस को खत्म कर देता हैं। यह सेल्‍स, हमलावर सूक्ष्मजीवों को मारने के लिए एक केमिकल का निर्माण करती हैं, जो इन परजीवियों को खत्म करने का कार्य करता है।


न्युट्रोपेनिया के लक्षण

ज्‍यादातर मामलों में न्युट्रोपेनिया के लक्षण शुरुआत में नजर नहीं आते, इसलिए इसे पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है। किसी को भी इस समस्‍या की जानकारी किसी अन्‍य बीमारी की तरह ब्लड टेस्ट कराने पर होती है। लेकिन कुछ न्युट्रोपेनिया के मरीजों में इंफेक्‍शन के लक्षण नजर आने लगते हैं। लेकिन इस तरह के लक्षण ज्‍यादातर मामलों में तब सामने आते हैं, जब इंफेक्‍शन काफी ज्यादा हो चुका होता है। इस तरह की परेशानी ज्यादातर, म्यूकस मेम्ब्रॉन्स में पनपती है। इसमें मुंह में या त्वचा पर अल्सर, फोड़े, चकत्‍ते जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं या ऐसे घाव जो ठीक होने में बहुत समय लेते हैं।    


न्युट्रोफिल की संख्या बहुत ज्यादा कम हो जाने या बहुत पुराना होने, इन दोनों स्थितियों में यह समस्या और भी ज्यादा घातक हो जाती है। हालांकि किसी भी सामान्य व्यक्ति को इस तरह की समस्या का पता लगना मुश्किल होता है, लेकिन यदि किसी को बार-बार त्वचा या अन्य इंफेक्‍शन हो रहा हो तो उसे एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।


न्युट्रोपेनिया के कुछ कारक

बोन मैरो में न्युट्रोफिल बनने में किसी कारण से कोई समस्या।
बोन मैरो के बाहर न्युट्रोफिल का नष्ट होना
इंफेक्‍शन
पोषक तत्वों की कमी

न्युट्रोफिल के कम बनने के कुछ और कारण भी है जैसे किसी को जन्म से ही बोन मैरो के कार्यों में समस्या होना, रेडिएशन, कीमोथेरेपी। इसके अलावा टीबी, डेंगू बुखार और कई तरह के वायरल इंफेक्‍शन के कारण भी न्युट्रोपेनिया की समस्या हो सकती है।

अगर टेस्‍ट में, किसी व्यक्ति के न्युट्रोफिल की संख्या कम पाई जाती है, तो हो सकता है कि उस व्यक्ति के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद ही उसके न्युट्रोफिल पर आक्रमण कर उन्हें नष्ट कर रही हो। जैसे क्रोनिक डिजीज, रूमेटाइड अर्थराइटिस, लूप्‍स आदि। वहीं कुछ लोगों में, न्युट्रोपेनिया एंटीबायोटिक्स, ब्लड प्रेशर या मानसिक बीमारियों के लिये ली जाने वाली दवाइयां के प्रयोग के कारण भी हो सकती है।


इस लेख से संबंधित किसी प्रकार के सवाल या सुझाव के लिए आप यहां पोस्‍ट/कमेंट कर सकते है।

Image Source : Getty

Read More Articles on Communicable Diseases in Hindi

Write Comment Read ReviewDisclaimer Feedback
Is it Helpful Article?YES1296 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर