पैरों में कमजोरी के प्रमुख कारणों को जानें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 13, 2016
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Quick Bites

  • शहरी लाइफस्टाइल का बुरा असर पैरों पर पड़ता है।
  • घंटो बैठेने से सायटिका की समस्या आम हो गई है।
  • साईटिका बीमारी नहीं बल्कि दर्द का एक लक्षण है।
  • साईटिका नस शरीर की सबसे लंबी नस होती है।

दिन भर कुर्सी पर बैठकर काम करना और बस में खड़े होकर ट्रेवलिंग करने की आदत ने पैरों की नसों में जकड़न पैदा करना शुरू कर दी है। वर्तमान की अनियमित जीवनशैली और गलत-तरीके से उठने-बैठने के कारण साईटिका की बीमारी काफी कॉमन हो गई है। साईटिका की बीमारी की वजह से ही युवाओं के पैर भी कमजोर होने लगे हैं।

कमजोर होते पैरों की समस्या का सामान्य बनने के कारण चिकित्सकों के लिए ये चिंता का विषय बन गया है।

 

पैरों की कमजोरी

अनियमित उठने-बैठने की आदत औऱ दौड़ती-भागती जिंदगी ने नसों को असमय ही बीमार कर दिया है। वर्तमान जीवनशैली का सबसे बुरा असर नसों पर पड़ा है जिससे नसों में ज्यादा दर्द होता है खासकर कमर से लेकर पैर की नसों तक। नसों में दर्द की इस बीमारी को साईटिका कहते हैं।

पैरों में कमजोरी

 

साईटिका बीमारी नहीं

  • साईटिका नसों में दर्द, बीमारी नहीं बल्कि दर्द के लक्षण हैं।
  • साईटिका नस शरीर की सबसे लंबी नस होती है। यह कमर की हड्डी से गुजरती हुई जांघ के पिछले भाग से पैरोँ के पिछले हिस्से तक जाती है। ऐसे में जब इस नस में किसी भी जगह पर सूजन होती है तो पूरे पैरों में असहनीय दर्द होता है। इस स्थिति को ही साईटिका का दर्द कहते हैं।
  • ऐसे में यह समझ लेना जरूरी है कि साईटिका अपने आप में बीमारी नहीं अपितु साईटिका नस में विकार आ जाने की स्थिती है।

 

कब होता है ये

साईटिका का दर्द पैरों के सबसे निचले वाले हिस्से में होता है। साईटिका का दर्द नस में किसी भी प्रकार का दबाव पड़ने या किसी भी तरह के सूजन के कारण होता है। सामान्य तौर पर यह दर्द 50 वर्ष की उम्र के बाद इंसान को होता है। जब इंसान के शरीर की हड्डियों के जोड़ में दबाव पड़ता है तो इन जोड़ों के बीच स्थित चिकनी सतह घिसने लगती है। ऐसे में कई बार जब पैरों पर बहुत अधिक दबाव पड़ता है तो नसों में सूजन आ जाती है जिससे हड्डियों पर बुरा असर पड़ता है जिससे पैरों में असहनीय दर्द होता है।

साईटिका का दर्द अब 30 से अधिक उम्र के लोगों में भी होने लगा है।

इसके लक्षण

  • पैरों में झनझनाहट होती है।
  • पैर के अंगूठे व अंगुलियां सुन्न हो जाती है।
  • पैर बार-बार सुन्न पड़ जाते हैं।
  • इसका लगातार बढ़ते रहने पर यह आंतरिक नसों पर बुरा असर डालना भी शुरू कर देता है।
  • कमर दर्द।
  • जाँघ व पैरों के पिछले हिस्से में दर्द।
  • नसों के फाइबर के अधिक प्रभावित होने पर पैर की उँगलियां हिलाना भी कठिन होता है।
  • दर्द अगर गंभीर हो जाए तो इंसान के लिए चलना व खड़े रहना मुश्किल हो जाता है।
  • पीठ में अकड़न।

 

इसका इलाज

  • जो लोग ऑफिस का काम मतलब कुर्सी पर घंटों बैठकर काम करते हैं उनमें साईटिका के दर्द की समस्या अधिक होती है।
  • बैठे रहने से पैरों की नसों में तनाव पैदा होता है।
  • इसके लिए जरूरी है कि पूरे तरह से आराम करें।
  • समय पर दवाईयां लें और व्यायाम करें।
  • इस दर्द के गंभीर होने पर सर्जरी भी करवानी पड़ जाती है।

 

व्यायाम है उपाय - स्टडी

  • साईटिका के दर्द की परेशानी बढ़ने के कारण इस पर चिकित्सक काफी शोध कर रहे हैं। कई शोध में ये पता चला है कि इस दर्द के उपचार का सबसे कारगर और उपयुक्त तरीका है व्यायाम।
  • वे व्यायाम खासकर लाभकारी है जिनसे नसों में खिंचाव उत्पन्न होता है। क्योंकि व्यायाम के इस तरीके से प्रभावित तंत्रिका तंत्रों पर दबाव पड़ता है जिससे साईटिका की नसों को राहत पहुंचती है।
  • पीठ का व्यायाम भी साईटिका के दर्द से राहत दिलाने में कारगर है।
  • बढ़ती उम्र में साईटिका के दर्द से निजात पाने के लिए और रीढ़ को लचीला बनाने के लिए योग और व्यायाम कें।

 

ये योग हैं लाभदायक

  • साईटिका के दर्द को जड़ से खत्म करने में भुजंगासन, मकरासन, मत्स्यासन, क्रीडासन, वायुमुद्रा और वज्रासन काफी कारगर हैं।
  • वज्रासन इकलौता आसन है जिसमें रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से पर आसानी से ध्यान केन्द्रित किया जा सकता है।

 

इन बातों का खयाल रखें

  • दर्द में अधिक काम करने के बजाय अधिक से अधिक आराम करें। ऊँचे एड़ी के चप्पल - जूते न पहनें।
  • ज्यादा मुलायम गद्दों पर बिल्कुल भी न सोएं। जमीन पर सोने से आराम मिलेगा।
  • पैरों की गर्म पानी से सिकाई करें।
  • वेस्टर्न टॉयलेट का इस्तेमाल करें।

 

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