World Parkinson's Day 2025: जानें क्या है इस दिन का इतिहास और महत्व

पार्किंसंस रोग के कारण व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। ऐसे में हर साल 11 अप्रैल को वर्ल्ड पार्किंसंस डे मनाया जाता है, आइए जानते हैं इस दिन का महत्व और इतिहास के बारे में 
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World Parkinson's Day 2025: जानें क्या है इस दिन का इतिहास और महत्व


World Parkinson's Day 2025: पार्किंसंस डिजीज (Parkinson's Disease) एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो दिमाग के कुछ हिस्सों में न्यूरॉन्स के नुकसान का कारण बनते हैं, जिससे व्यक्ति की गति में कमी आ जाती है और अन्य कई शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती है। पार्किसंस रोग से पीड़ित व्यक्ति की स्थिति समय के साथ और ज्यादा खराब होने लगती है। यह बीमारी दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करती है, जो गति को कंट्रोल करता है। पार्किंसंस रोग दिमाग में डोपामाइन नाम के केमिकल के लेवल में कमी आ जाती है, जिससे व्यक्ति के चलने की स्पीड धीमी हो जाती है, संतुलन बनाए रखने में मुश्किल होती है और मांसपेशियों में अकड़न की समस्या भी बढ़ जाती है। पार्किसंस को लेकर लोगों में आज भी जागरूकता की कमी है। ऐसे में हर साल 11 अप्रैल को वर्ल्ड पार्किंसंस डे मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व और इतिहास के बारे में-

विश्व पार्किंसंस दिवस का इतिहास - World Parkinson's Day 2025 History in Hindi

वर्ल्ड पार्किंसंस डे की शुरुआत 1997 में यूरोपियन पार्किंसन डिजीज एसोसिएशन (EPDA) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मिलकर की थी। इस दिन को मनाने के लिए 11 अप्रैल की तारीख को तय किया गया है क्योंकि इस दिन डॉ. जेम्स पार्किंसन का जन्मदिन मनाया जाता है। डॉ. जेम्स पार्किसन ने "An Essay on the Shaking Palsy" नाम के लेख के माध्यम से इस बीमारी को सबसे पहले पहचाना गया था। तब से यह दिन हर साल दुनिया भर में सेमिनार, वॉकाथॉन, जागरूकता अभियान और सोशल मीडिया कार्यक्रमों के जरिए मनाया जाता है।

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विश्व पार्किंसंस दिवस का महत्व - Significance Of World Parkinson's Day in Hindi

इस बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, जैसे हाथ-पांव में कंपन, स्पीड में कमी, संतुलन की कमी आदि। ऐसे में अधिकतर लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। इसलिए यह दिन लोगों को इन संकेतों को पहचानने और इस बीमारी के प्रति जागरुक करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह बीमारी सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। ऐसे में मरीजों को भावनात्मक और सामाजिक सहारे की जरूरत होती है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि हमें अपने आस-पास के ऐसे लोगों के साथ सहानुभूति और सहयोग देना चाहिए, जो इस बीमारी से पीड़ित हैं। पार्किंसंस बीमारी का आज के समय में कोई स्थायी इलाज नहीं है, बल्कि सिर्फ इसके लक्षणों को कम करने के उपाय किए जा सकते हैं।

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World Parkinson's Day

विश्व पार्किंसंस दिवस का प्रतीक - Symbol Of World Parkinson's Day in Hindi

साल 2005 में 9वें विश्व पार्किंसंस रोग दिवस सम्मेलन में लाल ट्यूलिप को पार्किंसंस रोग का वैश्विक प्रतीक के रूप में अपनाया गया। यह फूल पार्किंसंस से पीड़ित लोगों के लिए आशा, शक्ति और एकजुटता का प्रतिनिधित्व करता है। डच बागवानी विशेषज्ञ जे.डब्ल्यू.एस. वैन डेर वेरल्ड द्वारा विकसित एक विशेष ट्यूलिप कल्टीवेटर जो खुद पार्किंसंस रोग से पीड़ित से उनसे इस फूल को अपनाने का विचार अपनाया गया। उन्होंने 1817 में पहली बार इस बीमारी के बारे में बताने वाले अंग्रेजी डॉक्टर के सम्मान में ट्यूलिप का नाम "डॉ. जेम्स पार्किंसन" रखा। इसलिए इस दिन विश्व पार्किंसंस दिवस पर लाल ट्यूलिप का बहुत महत्व होता है।

 

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