'दूसरा दिमाग' क्यों कहा जाता है आंतों को, आपको पता होने चाहिए ये 6 फैक्ट्स

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 05, 2018
Quick Bites

  • आंतों को दूसरा दिमाग क्यों कहते हैं, ये फैक्ट्स पढ़कर हैरान रह जाएंगे।
  • कुदरत की अनोखी और सबसे छोटी केमिकल फैक्ट्री हैं हमारी आंतें।
  • आंतों में होते हैं अरबों माइक्रोब्स, जो हमारे खाने को पचाने में मदद करते हैं।

क्या आप जानते हैं की मनुष्य की आंतों को 'दूसरा दिमाग' कहा जाता है। जी हां, आपको जानकर हैरानी होगी मगर हम सबके दिमाग और आंतों में कई ऐसी बाते हैं, जो समान हैं और दोनों एक दूसरे से बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं। दरअसल हमारे दिमाग की ही तरह हमारे आंतों में भी ढेर सारी तंत्रिका कोशिकाएं (नर्व सेल्स) होती हैं। इनकी जटिलता और काम के आधार पर ही वैज्ञानिक आंतों को 'दूसरा दिमाग' कहते हैं। दिमाग और आंतों के बारे में कई ऐसी मजेदार बाते हैं, जिन्हें जानकर आपके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहेगा। आइए आपको बताते हैं आंतों और दिमाग से जुड़े कुछ फैक्ट्स।

आपकी आंतों का अलग 'नर्वस सिस्टम' होता है

जिस प्रकार का कंप्यूटर में सीपीयू के द्वारा सभी कार्य संपन्न होते हैं, उसी प्रकार शरीर का भी एक सीपीयू होता है, जिसे नर्वस सिस्टम कहते हैं।  यह बात आप जानते हैं कि हमारा शरीर नर्वस सिस्टम के द्वारा चलता है। मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि आपकी आंतों को काम करने के लिए दिमाग के निर्देशों की जरूरत नहीं होती है और न ही दिमाग का इस पर कोई कंट्रोल होता है क्योंकि उनका अपना अलग तंत्रिका तंत्र होता है। आंतों के इस नर्वस सिस्टम को आंतरिक तंत्रिका तंत्र कहते हैं।

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आंतें है कुदरत की अनोखी छोटी सी 'केमिकल फैक्ट्री'

ये कुदरत का कमाल ही है कि हमारी आंतें इतने छोटे से स्थान में एक बड़ी 'केमिकल फैक्ट्री' जैसा काम करती हैं। दरअसल  आंतों की दीवारें खास कोशिकाओं से बनी होती हैं, जो यह जान लेती हैं कि आपने जो खाना खाया है, उसे पचाने के लिए किस प्रकार के रसायन की जरूरत होगी। जब आंत यह जान लेती है, तो आंतों का तंत्रिका तंत्र उस खास एन्जाइम का चुनाव करता है, जो आपका खाना पचाने के लिए जरूरी होता है। आश्चर्य की बात है कि आंतें यह भी ध्यान रखती हैं कि आपने खाने के दौरान कौन सा तत्व कितनी मात्रा में लिया है, और वो इसी आधार पर एंजाइम का चुनाव करती हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता मुख्यतः आंतों पर निर्भर करती है

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आपकी रोग प्रतिरोधक प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम की 70 प्रतिशत कोशिकाएं आंतों में होती हैं। यानी आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादातर आंतों पर निर्भर करती है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति की आंतों में कोई समस्या या कोई रोग होता है, तो व्यक्ति की इम्यूनिटी कम हो जाती है और वो बीमारियों का शिकार जल्दी और आसानी से बन जाता है।

आंतों में होते हैं अरबों छोटे जीवाणु

हमारे खाने को पचाने से लेकर शरीर को ऊर्जा देने का काम ऐसे छोटे-छोटे जीव करते हैं, जिनके बारे में आपको पता भी नहीं चलता है। जी हां, हम सबकी आंतों में हजारों या लाखों नहीं, बल्कि अरबों की संख्या में माइक्रोब्स होते हैं, जो पाचन की क्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और भोजन से ऊर्जा अलग कर पूरे शरीर में पहुंचाने में मदद करते हैं। ये छोटे माइक्रोब्स आपके द्वारा खाए हुए भोजन के सहारे जीते हैं। यह भी आश्चर्य है कि इन माइक्रोब्स का स्वास्थ्य ठीक रखने की जिम्मेदारी आपकी है। अगर इनका स्वास्थ्य खराब हुआ, तो आपका स्वास्थ्य भी खराब हो जाएगा। जब आप मल त्याग करते हैं, तो इसका 40-50 प्रतिशत हिस्सा बैक्टीरिया होता है। ये बैक्टीरिया जब आंतों में होते हैं, तो फायदेमंद होते हैं मगर मल के साथ बाहर निकलने के बाद आपको बीमार बना सकते हैं।

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तनाव का असर पड़ता है आंतों पर

ये बात सच है कि आंतों का अलग तंत्रिका तंत्र होता है, जिससे ये मस्तिष्क से संचालित नहीं होते हैं। मगर आंतों का मस्तिष्क से संबंध जरूर होता है। इसलिए जब कभी आप तनाव में होते हैं, तो आपके पाचन पर बुरा प्रभाव पड़ता है क्योंकि तनाव या बीमारी के कारण आंतों में पाए जाने माइक्रोब्स पर असर पड़ता है। इसलिए अगर अगली बार आपका पेट साफ न हो या आंतों से जुड़ी कोई समस्या हो, तो देखिएगा कहीं ये किसी तनाव या मानसिक परेशानी के कारण तो नहीं है।

आंतों में होती हैं करोड़ों तंत्रिकाएं

आंतों का तंत्रिका तंत्र दिमाग जितना जटिल तो नहीं होता, मगर फिर भी ये बहुत ज्यादा पेचीदा होता है। अनुमान के मुताबिक इंसानों के आंतों के तंत्रिका तंत्र में करीब 20 से 60 करोड़ तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं। तंत्रिका कोशिकाओं का यह पेचीदा जाल हमारे पाचन तंत्र में होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जो काम आंतों के तंत्रिका तंत्र में होते हैं, वे काम अगर हमारे दिमाग को करने होते, तो इसके लिए बहुत-सी नसों की जरूरत पड़ती।

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