कोरोना नहीं बल्कि इस बीमारी से रोज मरते हैं 4000 लोग, गंदगी और भीड़भाड़ वाली जगह पर फैलता है ये रोग

WHO New Recommendations To Prevent Tuberculosis: डब्लूएचओ के मुताबिक, रोजाना 4 हजार लोग टीबी के कारण अपनी जान गंवाते हैं।

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaUpdated at: Mar 24, 2020 12:51 IST
कोरोना नहीं बल्कि इस बीमारी से रोज मरते हैं 4000 लोग, गंदगी और भीड़भाड़ वाली जगह पर फैलता है ये रोग

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के नए  दिशा-निर्देश दुनिया भर के देशों को टीबी रोग के संक्रमण से पीड़ित लोगों को निवारक उपचार देकर टीबी को रोकने के प्रयासों में तेजी लाने में मदद करेंगे और उन्हें बीमार होने से बचाएंगे। विश्व की एक चौथाई आबादी के टीबी बैक्टीरिया से संक्रमित होने का अनुमान है। ये लोग न तो बीमार हैं और न ही संक्रामक। हालांकि, इन्हें टीबी रोग होने का अधिक खतरा है, विशेष रूप से कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को। इन लोगों को टीबी निवारक उपचार देकर न केवल इन्हें बीमार होने से बचाया जा सकता है बल्कि लोगों में फैलने के खतरे में भी कमी लाई जा सकती है। विश्व टीबी दिवस 2020 के मौके पर ये जान लेना बेहद जरूरी है कि यह बीमारी दुनियाभर में संक्रमण से होने वाली मौतों में शीर्ष पर बनी हुई है। 2018 में दुनिया भर में टीबी से करीब 1 करोड़ लोग बीमार हुए और 15 लाख लोगों ने इस बीमारी से अपनी जान गंवाई। डब्लूएचओ के मुताबिक, रोजाना 4 हजार लोग टीबी के कारण अपनी जान गंवाते हैं और 30000 लोग इसकी चपेट में आते हैं।

कोरोना ने बताया लोग कितने कमजोर 

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसुस का कहना है कि कोरोना ने एक बात जग जाहिर कर दी है कि फेफड़े के रोग और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग कितना कमजोर हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया 2030 तक टीबी को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके लिए रोकथाम में सुधार करना बेहद महत्वपूर्ण है। लाखों लोगों को टीबी की बीमारी की शुरुआत को रोकने और इससे अपने जीवन को बचाने के लिए निवारक उपचार में सक्षम होने की आवश्यकता है।”

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बड़े पैमाने पर हुई टीबी की अनदेखी

डॉ. टेड्रोस ने विश्वभर में फैले  टीबी सहित COVID-19 जैसे स्वास्थ्य प्रकोपों के दौरान दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के प्रयासों को जारी रखने के महत्व पर जोर दिया है। इतना ही नहीं टीबी और अन्य प्रमुख संक्रामक रोगों का मुकाबला करने के लिए पहले से मौजूद कार्यक्रम COVID-19 को रोकने के प्रयासों को अधिक प्रभावी और तीव्र बनाने के लिए भी काम आ रहे हैं। हालांकि इन प्रयासों से 2018 में टीबी के मुद्दे पर हुई संयुक्त राष्ट्र की उच्च-स्तरीय बैठक में निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में कुछ प्रगति जरूर दर्ज की गई है लेकिन टीबी निवारक उपचार की बड़े पैमाने पर उपेक्षा की गई है। 

उन्होंने बताया कि वैश्विक स्वास्थ्य संगठन 2022 तक कम से कम 2.40 करोड़ सक्रिय टीबी के मामलों और 60 लाख एचआईवी से पीड़ित मरीजों तक निवारक उपचार की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि आज तक इस लक्ष्य का कुछ ही हिस्सा हासिल किया जा चुका है, जिसमें विश्व भर के 430,000 मामले शामिल हैं। इतना ही नहीं 2018 में केवल 18 लाख लोगों को ही टीबी निवारक उपचार मिल पाया था।

टीबी मौत का सबसे बड़ा कारण

डब्लूएचओ के मुताबिक, एचआईवी से पीड़ित लोगों में टीबी मौत का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। टीबी की रोकथाम और जीवन को बचाने के लिए टीबी निवारक उपचार एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी के साथ सहक्रियाशील रूप से काम करता है। सरकारें, स्वास्थ्य सेवाएं, भागीदारी, पार्टनर और सिविल सोसायटी द्वारा किए गए प्रयास लक्षित स्तर तक टीबी निवारक उपचार की पहुंच बढ़ाने के लिए आवश्यक होगा। 

डब्लूएचओ के नए दिशानिर्देश टीबी निवारक उपचार तक पहुंच को बढ़ाने के लिए कई नए दृष्टिकोण सुझाते हैं:

डब्ल्यूएचओ, टीबी रोगियों के घरेलू संपर्कों, एचआईवी से ग्रस्त लोगों, कमजोर इम्यूनिटी वाले अन्य लोगों व भीड़भाड़ वाले स्थानों पर रहने वाली अधिक जोखिम भरी आबादी में बड़े पैमाने पर टीबी निवारक उपचार की सिफारिश करता है।

डब्ल्यूएचओ सक्रिय टीबी के लिए चल रहे प्रयासों में टीबी निवारक उपचार सेवाओं के एकीकरण की सिफारिश करता है। टीबी रोगियों के सभी घरेलू संपर्कों और एचआईवी से पीड़ित लोगों में सक्रिय टीबी की जांच करने की सलाह दी जाती है। अगर सक्रिय टीबी को खत्म किया जा सकता है तो उनका टीबी निवारक उपचार शुरू किया जाना चाहिए।

डब्ल्यूएचओ यॆं भी सिफाारिश करता है कि टीबी संक्रमण के लिए जांच या तो ट्यूबरकुलिन त्वचा परीक्षण या फिर इंटरफेरॉन-गामा रिलीज़ एसे (IGRA) का उपयोग किया जाए। ये दोनों जांच लोगों में टीबी निवारक उपचार से फायदा पहुंचाने वाली किरण हैं, लेकिन उपचार के दायरे को बढ़ाने में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं बननी चाहिए। एचआईवी से पीड़ित लोगों और 5 साल से कम उम्र के बच्चों में टीबी निवारक उपचार शुरू करने से पहले टीबी संक्रमण के लिए परीक्षण की आवश्यकता नहीं है जैसे कि सक्रिय टीबी वाले लोगों के संपर्क में होती हैं।

डब्ल्यूएचओ 6 महीने तक रोजाना आइसोनियाजिड के इस्तेमाल के अलावा निवारक उपचार के लिए नए छोटे विकल्पों की सिफारिश करता है। 

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सभी सरकारों को मिलकर काम करने की जरूरत 

डब्लूएचओ के ग्लोबल टीबी प्रोग्राम की निदेशक डॉ. तेरेज़ा कासेवा ने इस मौके पर कहा कि, “विश्व भर के लोग विश्व टीबी दिवस मनाने के लिए एक साथ आते हैं। डब्ल्यूएचओ सभी सरकारों, प्रभावित समुदायों, नागरिक समाज संगठनों, स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं, पार्टनरों, भागीदारों और उद्योग जगत को एकजुट करने और विशेष रूप से टीबी निवारक उपचार के जरिए टीबी प्रतिक्रिया को बढ़ाने का आह्वान कर रहा है। संगठन का मकसद है कि टीबी को रोकने में कोई भी पीछे न रहे।  ”  

उन्होंने कहा कि WHO के नए दिशा-निर्देश लाखों लोगों के लिए तेजी से नए उपकरणों तक पहुंचने और निवारक उपचार के लिए सुरक्षित विकल्प दिखाता है। अब वक्त आ गया है कि सभी मिलकर काम करें।"

टीबी निवारक उपचार एक किफायती विकल्प है,  जो परिवारों को गरीबी में जाने से रोक सकता है और पूरे समुदायों के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को संरक्षित कर सकता है। डब्ल्यूएचओ का अनुमान है कि जैसे ही नई और सुरक्षित दवाएं बाजारों में आती हैं, और जैसे-जैसे कीमतें गिरती हैं, यह लाखों लोगों के जीवन को बचाने के लिए एक उच्च-लागत प्रभावी तरीका बन जाएगा। 

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