क्या करें जब बच्चा डॉक्टर से डरने लगे

अगर आपका बच्चा डॉक्टर के पास जाने से डरता है तो उसके इस डर को निकालने के लिए कुछ खास कदम उठाने की जरूरत है। बच्चों के मन से डॉक्टर का डर निकालने के लिए खेल-खेल में डॉक्टर के बारे में बताएं जानिए कैसे।

Anubha Tripathi
परवरिश के तरीकेWritten by: Anubha TripathiPublished at: Aug 01, 2014
क्या करें जब बच्चा डॉक्टर से डरने लगे

कोई भी बच्चा डॉक्टर के पास जाना पसंद नहीं करता है। उन्हें डॉक्टर के पास जाने के नाम से डर लगता है। इसमें कोई आशर्चय की बात नहीं है क्योंकि बच्चे अक्सर परिवार के बाहर के सदस्य के पास जाने से डरते हैं डॉक्टर भी उन्हीं में से एक होता है। हम यहां आपको कुछ ऐसे टिप्स देते हैं जो बच्चों के मन से डॉक्टर के पास जाने के डर को दूर कर सकते हैं।

when your child afraid from doctor in hindi

माता-पिता का साथ रहना जरूरी है

कई बार माता-पिता को बच्चे की देखभाल के लिए उनके दादा-दादी या किसी अन्य की जरूरत होती है। ऐसे में वो ही बच्चों को डॉक्टर के पास भी ले जाते हैं। लेकिन अगर पहली या दूसरी बार बच्चा माता-पिता के साथ डॉक्टर के पास जाता है तो वो थोड़ा सहज महसूस करता है। इसके पीछे एक वजह यह भी है कि जब बच्चे के माता-पिता डॉक्टर के साथ ( जो कि एक अनजान इंसान ) सहज है तो बच्चा भी उनके साथ खुद को सुरक्षित महसूस करता है।


डॉक्टर का खेल खेलें

अपने बच्चों को डॉक्टर के पास ले जाने से पहले उन्हें इस बारे में बताएं। बच्चों के लिए एक खिलौने वाली डॉक्टर किट लें और सफेद लैब कोट लें। इसके बाद बच्चों के साथ डॉक्टर और मरीज का खेल खेलें। बच्चे को मरीज और खुद को डॉक्टर बनाएं। बच्चों को मुंह खोलने, जीभ निकालने, तेज सांस लेने आदि के लिए कहें। इस तरह आप बच्चों को खेल खेल में डॉक्टर के बारे में बता सकते हैं।  

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डर को दूर करें

बच्चों जब डॉक्टर के पास जाने से मना करे तो उसे कभी यह ना कहें 'डरो मत', 'कुछ नहीं होगा', 'रो मत'। इसकी जगह उनसे कहें कि आप जानते हैं कि डॉक्टर के पास उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लगता लेकिन यह दो मिनट का काम है हम तुरंत वापस आ जाएंगे। उन्हें आश्वस्त करें कि आप पूरा टाइम उनके साथ ही रहेंगे। ज्यादातर बच्चे इंजेकशन के डर से डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते हैं। ऐसे में जब तक आप कंफर्म ना हो तब तक बच्चों से कभी यह ना कहें कि तुम्हें इंजेकशन नहीं लगेगा।   

सहज महसूस कराएं


बच्चों को अलग बेड पर लिटा कर चेकअप करने से अच्छा है कि माता-पिता की गोद में ही बच्चों का चेकअप करें। बच्चों को माता-पिता से अलग ना करें। अपने माता-पिता की गोद में बच्चा काफी सहज महसूस करता है। इसके अलावा जब डॉक्टर उन्हें छूता है चेकअप के लिए तो काफी असुरक्षित हो जाते हैं लेकिन जब वह माता-पिता के पास रहते हैं तो उन्हें यकीन होता है कि वो पूरी तरह सुरक्षित हैं।

 

बच्चों के मन से डॉक्टर का डर निकालने के लिए ये टिप्स आपके काफी काम आ सकते हैं। 

 

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