दूध नहीं पचा पाते हैं 'लैक्टोज सेंसिटिव' लोग, जानें Lactose Intolerance का असली कारण और दूध के हेल्दी विकल्प

Lactose Intolerance एक पाचन विकार है जो लैक्टोज को पचाने में असमर्थता के कारण होता है, जो डेयरी उत्पादों में मौजूद मुख्य कार्बोहाइड्रेट है।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Apr 10, 2020Updated at: Apr 10, 2020
दूध नहीं पचा पाते हैं 'लैक्टोज सेंसिटिव' लोग, जानें Lactose Intolerance का असली कारण और दूध के हेल्दी विकल्प

लैक्टोज सेंसिटिव या लैक्टोज असहिष्णुता (Lactose Intolerance) का मतलब है कि शरीर दूध और डेयरी उत्पादों में पाए जाने वाले एक प्रकार के प्राकृतिक शुगर को आसानी से पचा नहीं सकता है। ज्यादातर लोग इसे दूध से एलर्जी को जोड़कर देखते हैं पर ये अलग है। दरअसल लैक्टोज सेंसिटिव होने पर लैक्टोज बड़ी आंत (कोलन) से बिना ठीक से पचे हुए निकलता है और ये गैस, पेट दर्द और सूजन जैसे असहज लक्षणों का कारण बन जाता है। कुछ लोग जो लैक्टोज सेंसिटिव होते हैं वे किसी भी दूध उत्पादों को पचा नहीं पाते हैं। वयस्कों में लैक्टोज सेंसिटिविटी आम है। लैक्टोज-असहिष्णु लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि दूध न पचा पाने के कारण इससे मिलने वाले कैल्शियम से भी वचिंत रह जाते हैं, जिससे हड्डियों के लिए पर्याप्त कैल्शियम प्राप्त करने में मुश्किल आती है और ऐसे लोगों की हड्डियां कमजोर भी हो सकती हैं।

insidedontlikemilk

Lactose Intolerance का क्या कारण है?

लैक्टोज सेंसिटिविटी (Lactose Intolerance) तब होती है जब छोटी आंत लैक्टेज (lactase) नामक एक एंजाइम पर्याप्त तौर पर नहीं बनाती है। दरअसल आपके शरीर को लैक्टेज को तोड़ने या पचाने के लिए लैक्टोज की जरूरत होती है। इस कारण कभी-कभी छोटी आंत पेट की फ्लू जैसी छोटी बीमारी के बाद या सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसे आजीवन रोग के हिस्से के रूप में लैक्टेज बनाना बंद कर देती है। इसके अलावा कभी-कभी छोटी आंत के एक हिस्से को हटाने तक पड़ जाता है, जिसके बाद लैक्टेज बनना पूरी तरह से बंद हो जाता है। इन मामलों में, समस्या स्थायी या अस्थायी हो सकती है। कई मामलों में, नवजात शिशु लैक्टोज-असहिष्णु होते हैं। लेकिन लैक्टोज सेंसिटिविटी के साथ पैदा हुआ व्यक्ति लैक्टोज के साथ कुछ भी नहीं खा या पी सकता है। पर फिर ऐसे लोगों के लिए लैक्टोज के हेल्दी विकल्प क्या हो सकते हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में।

खुद को हेल्दी रखने के बारे में कितने जागरूक हैं आप? खेलें ये क्विज:

Loading...

इसे भी पढ़ें : मां के दूध जैसा लाभकारी है नारियल का दूध, जानें कैसे?

लैक्टोज सेंसिटिव लोगों के लिए हेल्दी विकल्प

6 से 8 घंटे तक फर्मेंटेट हुई दही

दही लैक्टोज सेंसिटिव लोगों के लिए हेल्दी विकल्प है क्योंकि इसमें लैक्टेज की कमी होती है, जिसके कारण लैक्टोज सेंसिटिव लोग इसे आसानी से पचा सकते हैं। वहीं दही इसलिए भी सुरक्षित है क्योंकि दही के किण्वन की प्रक्रिया दूध में मौजूद लैक्टोज की अधिकांश मात्रा को तोड़ देती है और इसे लैक्टेट में परिवर्तित कर देती है जो लैक्टोज की तुलना में पचाने में बहुत आसान है। हालांकि, इसके लिए ध्यान देते वाली बात ये है कि ऐसा दही कम से कम 6 से 8 घंटे तक फर्मेंटट हो नहीं तो वो भी दूध के समान ही ऐसे लोगों को नहीं पचेगा।

insidekajumilk

काजू का दूध

जो लोग दूध को छोड़ नहीं सकते, उनके लिए काजू दूध बहुत अच्छे विकल्प हैं। यह न केवल कैलोरी में कम है, बल्कि विटामिन ई, डी और कैल्शियम की एक अच्छी खुराक भी प्रदान करता है। डेयरी-मुक्त होने की इसकी गुणवत्ता लैक्टोज असहिष्णुता वाले लोगों के लिए दैनिक उपभोग के लिए इसे सुरक्षित बनाती है। आज चाहे तो बादाम और काजू दोनों को साथ में पीसकर भी इसका दूध बना सकते हैं, जो आपके स्वास्थ्य के लिए कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है।

इसे भी पढ़ें : शेफ संजीव कपूर से जानें इम्यूनिटी बूस्टर चाय बनाने की रेसिपी, गले में खराश और सूखी खांसी में भी फायदेमंद

नारियल का दूध

नारियल का दूध, दूध का एक और बेहतरीन विकल्प है। नारियल के दूध का नियमित सेवन न केवल एनीमिया और दिल की बीमारियों को रोक सकता है, बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के स्तर को भी बनाए रखता है। अपने एंटीबायोटिक गुणों के साथ, नारियल का दूध जोड़ों के दर्द और गठिया से पीड़ित लोगों की मदद करता है। इसे कम मात्रा में सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसके सेवन से उच्च स्तर का वजन बढ़ सकता है।

Read more articles on Healthy-Diet in Hindi

Disclaimer