Union Budget 2020: शनिवार को पेश होगा देश का बजट, जानें हेल्‍थ सेक्‍टर से क्‍या है लोगों की उम्‍मीदें

Union Budget 2020: 1 फरवरी को वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारमण देश का बजट पेश करेंगी। इस बजट में हेल्‍थ सेक्‍टर के लिए भी कई घोषणाएं की जाएंगी। 

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Jan 31, 2020Updated at: Feb 01, 2020
Union Budget 2020: शनिवार को पेश होगा देश का बजट, जानें हेल्‍थ सेक्‍टर से क्‍या है लोगों की उम्‍मीदें

केंद्रीय बजट 2020 ऐसे समय पर आ रहा है, जब देश बच्चों पर यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन कवरेज के लिए विश्व के अन्य देशों के साथ मिलकर चलने में संघर्ष कर रहा है। हालांकि ये प्रस्तावित है कि सरकार 2025 तक जीडीपी का 2.5 फीसदी हिस्सा हेल्थकेयर पर खर्च करेगी, जो कि 2019 में करीब 1.4 फीसदी के आस-पास ठहरा हुआ है। स्वास्थ्य क्षेत्र को आशा है कि इस बार के केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को भी जगह दी जाएगी। इसके साथ ही टीकाकरण और पोषण की असमानताओं को दूर कर "कोई बच्चा नहीं छूटेगा" लक्ष्य के साथ बच्चों के स्वास्थ्य अंतर को पाटने के लिए बजट में प्रावधान किए जाएंगे।

मिशन इंद्रधनुष 2.0 के लॉन्च के साथ भारत के पास पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर में कमी लाने के अपने लक्ष्य को हासिल करने का अवसर है। इसके साथ ही सरकार को 2030 तक रोकथाम योग्य बाल मृत्यु को समाप्त करने का सतत विकास लक्ष्य प्राप्त करना भी एक बड़ी चुनौती है। हालांकि ऐसा पुराने कागजों के आधार पर टीकाकरण रिकॉर्ड के साथ नहीं किया जा सकता और सिर्फ तकनीक ही इस जरूरी लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकती है।

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हेल्थकेयर सेक्टर की मशहूर कंपनियों में से एक इम्युनिफाई मी हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी के सीईओ नीरज मेहता का कहना है कि सरकार को निजी स्वास्थ्य तकनीक कंपनियों के साथ साझेदारी करनी चाहिए, जो टीकाकरण के अंतर को भरने में मदद कर सकती हैं और और प्रारंभिक बाल स्वास्थ्य के प्रमुख कारकों को मापने और प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी समाधानों को अपनाने की दिशा में धन आवंटित करना चाहिए।

भारत ने 2018 से 2022 के बीच अपने टीकाकरण कार्यक्रम के लिए 52 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है हालांकि इस साल के अंत तक जीएवीआई के समर्थन के समाप्त होने पर भारत को 2022 तक और 18 हजार करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी ताकि 90 फीसदी टीकाकरण दर को प्राप्त किया जा सके।

उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य उसके बच्चों के स्वास्थ्य में निहित है और किसी भी देश को अपने बच्चों के भावी स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाने के लिए पूर्ण टीकाकरण कवरेज के लिए अधिक फंड आवंटित करना शुरू कर देना चाहिए।

हैदराबाद के मैक्सीविजन सुपर स्पेशयालिटी आई हॉस्पिटल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. जीएसके वेलु का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से हेल्थकेयर सेक्टर के लिए केंद्र सरकार का बजटीय आवंटन, उद्योग के विकास को बढ़ावा देने के लिए बहुत उत्साहजनक रहा है क्योंकि हेल्थकेयर भारत में तेजी से बढ़ते सेक्टरों में से एक है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद में स्वस्थ सुधार के लिए बहुत योगदान दे रहा है। हालांकि कुछ चुनौतियां जरूर हैं, जिनपर बजट में ध्यान जरूर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम केंद्रीय सरकार से आगामी बजट 2020 में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह करते हैं।  

सरकार को हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर की रचना पर ध्यान देना चाहिए और देश के टियर 1 व 2 शहरों में प्रारंभिक और सेकेंडरी हेल्थकेयर सर्विसेज को उन्नत बनाने के लिए निवेश करना चाहिए। यह विशेष रूप से भारतीय स्वास्थ्य देखभाल की जरूरतों के लिए विकसित स्वदेशी चिकित्सा प्रौद्योगिकियों का लाभ उठा सकता है, और इस तरह मेक इन इंडिया पहल का समर्थन भी करता है।

मेडिकल उपकरणों के आयात-निर्यात से संबंधित नियामक बाधाओं को हटाने के लिए इस सेक्टर को बजट में विशेष तत्परता की जरूरत है। मेडिकल डिवाइस सेक्टर देश में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। मेडिकल डिवाइसों को खरीदने के लिए भारत की नीतियां अहम भूमिका निभाती हैं। इसके साथ ही मेडिकल डिवाइस की 70 फीसदी आयात निर्भरता बाहर से ही पूरी होती है इसलिए इसपर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

  • प्राथमिक स्वास्थ्य पर बजट आवंटन को बढ़ाया जाना चाहिए और स्वास्थ्य व कल्याण केंद्रों को स्थापित करना चाहिए। ऐसा करने से बीमारियों के भार को कम करने में मदद मिलेगी।
  • सरकार को स्थानीय निर्माण इकाईयों का समर्थन करना चाहिए जैसे कि ऋण पर कम ब्याज दर आदि। इसके साथ ही इस क्षेत्र की देनदारी को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
  • हेल्थकेयर सेक्टर के लिए जीएसटी रेट को भी तार्किक आधार पर उचित बनाया जाना चाहिए।
  • भारत में बने मेडिकल डिवाइस को सरकारी खरीद में प्राथमिकती दी जानी चाहिए। 

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