मुंह चिढ़ाने, अजीब आवाजें निकालने जैसी कई आदतें होती हैं 'ट्यूरेट सिंड्रोम' का संकेत, जानें इसके बारे में

किसी भी बच्चे या वयस्क में मुहं चिढ़ाने, बार-बार अजीब आवाज निकलने जैसी आदतें होती हैं 'ट्यूरेट सिंड्रोम' का संकेत, जानें इस बीमारी के बारे में।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Aug 26, 2021 14:10 IST
मुंह चिढ़ाने, अजीब आवाजें निकालने जैसी कई आदतें होती हैं 'ट्यूरेट सिंड्रोम' का संकेत, जानें इसके बारे में

आपने किसी व्यक्ति को बार-बार अजीब तरह से मुहं चिढ़ाते हुए या अजीब आवाज निकालते हुए देखा होगा। उस समय शायद आपको लगा हो कि सामने वाला व्यक्ति जो ये हरकतें कर रहा है वो आपको चिढ़ाने के लिए कर रहा हो। लेकिन बार-बार किसी तरह की अनियंत्रित एक्टिविटी करना या मुहं, गले या नाक से अजीब आवाज निकालना एक गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। ज्यादातर लोग इस बीमारी से अनजान हैं लेकिन इस प्रकार की गतिविधि करने वाले व्यक्ति को ट्यूरेट सिंड्रोम (Tourette Syndrome) नामक बीमारी हो सकती है। यह बीमारी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी है जिसमें व्यक्ति का उसकी मसल्स पर कंट्रोल नहीं रहता है। आपमें से कई लोगों ने रानी मुखर्जी की फिल्म हिचकी देखी होगी। दरअसल यह फिल्म भी इसी बीमारी पर आधारित है जिसमें एक्ट्रेस रानी मुखर्जी को ट्यूरेट सिंड्रोम से ग्रसित दिखाया गया है। ट्यूरेट सिंड्रोम एक प्रकार का नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर है जिसमें व्यक्ति ना चाहते हुए भी अजीब तरह की आवाजें निकालता है या ऐसे मूवमेंट करता है। यह बीमारी ज्यादातर बच्चों में होती है लेकिन वयस्क भी इसका शिकार हो सकते हैं। आइये जानते हैं ट्यूरेट सिंड्रोम के कारक, लक्षण और इलाज के बारे में।

क्या है ट्यूरेट सिंड्रोम? (What is Tourette Syndrome?)

तो जैसे कि हमने आपको बताया ट्यूरेट सिंड्रोम तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम से जुड़ा डिसऑर्डर है जिसमें व्यक्ति का उसके मुहं, गले और नाक की मसल्स पर कंट्रोल नहीं रहता है। इस बीमारी में व्यक्ति अचानक टिक्स (अचानक हिलने डुलने या आवाज निकालने की समस्या) का शिकार हो जाता है। टिक्स हिचकी लेने जैसा ही होता है जिसमें आपको अचानक हिचकी, अजीब आवाज या मुहं चिढ़ाने जैसी समस्याएं होती हैं और इसपर आपका कोई कंट्रोल नहीं रहता है। आमतौर पर यह समस्या 2 से 15 साल की उम्र वाले बच्चों को होती है लेकिन इस समस्या का शिकार वयस्क भी हो सकते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ट्यूरेट सिंड्रोम विकसित होने का खतरा अधिक होता है।

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ट्यूरेट सिंड्रोम के लक्षण (Tourette Syndrome Symptoms)

ट्यूरेट सिंड्रोम की समस्या में दिखने वाला सबसे प्रमुख लक्षण टिक्स है। जिन लोगों को ट्यूरेट सिंड्रोम होता है उन्हें अचानक अजीब आवाज निकालने, मुहं बनाने जैसे समस्या हो सकती है। टिक्स के अलावा इस बीमारी में दिखने वाले लक्षण बहुत सामान्य होते हैं जिन पर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता है। इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति में तनाव, थकान और उत्तेजना भी हो सकती है। इस समस्या की शुरुआत बचपन से होती है और बचपन में बच्चों को टिक्स के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। बचपन में अगर यह समस्या ठीक नहीं होती है तो आगे चलकर मरीज में गंभीर लक्षण देखने को मिलते हैं। ट्यूरेट सिंड्रोम में दिखने वाले कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं।

टिक्स की समस्या। 

ये समस्या दो तरह की हो सकती है।

1. मोटर टिक्स 

  • हाथ या सिर मरोड़ना
  • पलक झपकाना
  • अजीब चेहरा बनाना
  • मुहं चिढ़ाना
  • कंधे सिकोड़ना

2. वोकल टिक्स

  • आजीब आवाज निकलना या चिल्लाना
  • अचानक गले से आवाज निकालना
  • खांसना
  • घुरघुराहट की आवाज निकालना
  • सामने वाले व्यक्ति की बात दोहराना
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ट्यूरेट सिंड्रोम के कारण (What Causes Tourette Syndrome?)

ट्यूरेट तंत्रिका तंत्र से जुड़ा एक गंभीर सिंड्रोम है जो मस्तिष्क में मौजूद बेसल गैन्ग्लिया (जो कि शरीर की गतिविधियों को कंट्रोल करता है) को प्रभावित करता है। हालांकि इस बीमारी के सटीक कारण के बारे में वैज्ञानिकों को अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पायी है। इस बीमारी के पीछे तंत्रिका तंत्र में समस्याओं को माना जाता है। आपके जीन भी इस बीमारी में अहम भूमिका निभाते हैं। मस्तिष्क में मौजूद ये रसायन भी ट्यूरेट सिंड्रोम का कारण बन सकते हैं।

ट्यूरेट सिंड्रोम की जांच कैसे की जाती है? (How is Tourette Syndrome Diagnosed?)

अगर आपको या आपके परिवार में किसी भी व्यक्ति को ट्यूरेट सिंड्रोम के लक्षण दिखते हैं तो उसे आप एक न्यूरोलॉजिस्ट चिकित्सक को दिखा सकते हैं। इस बीमारी की स्थिति का पता लगाने के लिए चिकित्सक आपको एमआरआई, सीटी या ईईजी स्कैन आदि की सलाह दे सकते हैं। हालांकि इस बीमारी के इलाज में इन परीक्षणों का विशेष योगदान नहीं होता है। ट्यूरेट सिंड्रोम की जांच के लिए कोई विशेष जान प्रक्रिया नहीं है, इसके लक्षणों के आधार पर इसका इलाज किया जा सकता है। ट्यूरेट सिंड्रोम से प्रभावित व्यक्ति को अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी), नींद से जुड़ी समस्या, मानसिक समस्या और सीखने में अक्षमता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

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ट्यूरेट सिंड्रोम के खतरे (Tourette Syndrome Complications)

ट्यूरेट सिंड्रोम एक नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर है जिसकी वजह से बच्चों या वयस्कों में टिक्स की समस्या हो सकती है। इस समस्या के कारण मरीज को सामजिक और व्यावहारिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। ट्यूरेट सिंड्रोम की वजह से आपको कई मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं। ट्यूरेट सिंड्रोम के प्रमुख खतरे इस प्रकार से हैं।

  • अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी)
  • ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर ((ओसीडी))
  • ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर
  • सीखने में अक्षम होना या डिस्लेक्सिया
  • नींद से जुड़ी गंभीर समस्याएं
  • डिप्रेशन
  • चिंता और अशांति
  • सिरदर्द की समस्या
  • एंगर मैनेजमेंट में दिक्कत

ट्यूरेट सिंड्रोम का इलाज (Tourette Syndrome Treatment)

ट्यूरेट सिंड्रोम में मरीज के लक्षणों के हिसाब से इलाज किया जाता है। अगर मरीज में इस बीमारी के गंभीर लक्षण नहीं है तो उसे इलाज की आवश्यकता नहीं भी हो सकती है। अगर ट्यूरेट सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति में गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे एक्सपर्ट न्यूरोलॉजिस्ट से इलाज कराना चाहिए। इस बीमारी में डॉक्टर आपको बिहेवियरल थेरेपी दे सकता है। इस थेरेपी में मरीज के घरवालों को भी मरीज के साथ कैसे बर्ताव करना है उसकी जानकारी दे सकते हैं। इसके अलावा मरीज को मानसिक समस्याओं से बचाने के लिए भी दवा और थेरेपी दी जाती है। अगर मरीज की स्थिति अधिक गंभीर है तो उसे कुछ जरूरी दवाओं का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

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हमें उम्मीद है कि ट्यूरेट सिंड्रोम को लेकर दी गयी यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। इस बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से मरीज का इलाज जरूर कराएं। शुरुआत में लक्षण दिखते ही इलाज होने से यह बेमारी काफी हद तक ठीक हो जाती है लेकिन जिनका समय पर इलाज नहीं होता है उन्हें यह समस्या आगे चलकर भी हो सकती है। इस लेख में हमने आपको ट्यूरेट सिंड्रोम के कारण, लक्षण, जोखिम और इलाज से जुड़ी जानकारी दी है। इस समस्या से ग्रसित होने पर खुद से किसी भी प्रकार के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लें।

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