World Parkinson’s Day 2021: पार्किंसंस रोगियों के लिए फायदेमंद हैं ये 4 थेरेपी, डॉक्टर से जानें इनके बारे में

वैसे तो पार्किंसस रोग का अभी तक कोई इलाज नहीं है। लेकिन इन चार थेरेपी की मदद से मरीज में इसके लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 

 
Anju Rawat
Written by: Anju RawatUpdated at: Apr 11, 2021 09:30 IST
World Parkinson’s Day 2021: पार्किंसंस रोगियों के लिए फायदेमंद हैं ये 4 थेरेपी, डॉक्टर से जानें इनके बारे में

आज विश्व पार्किंसस दिवस है। क्या आप पार्किंसस रोग से परिचित हैं? पार्किंसस मस्तिष्क में होने वाला एक रोग है। इसके होने पर व्यक्ति में धीरे-धीरे लक्षण पैदा होते हैं और इससे रोगी की गतिविधियां प्रभावित होने लगती हैं। समय के साथ-साथ इसके लक्षण भी बढ़ते जाते हैं। वैसे तो अभी तक इसका कोई इलाज नहीं है लेकिन दवाईयों से, डाइट पर ध्यान देकर और फिजियोथेरेपी से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है। पार्किंसस में मरीज को शरीर का संतुलन बनाने में, हंसने और पलकें झपकाने में, बोलने और लिखने में समस्या होती है। लेकिन जैसे-जैसे यह समस्या बढ़ती जाती है पार्किंसन के रोगियों में चिंता, अवसाद, पागलपन, संज्ञानात्मक बधिरता, नींद का व्यवहार विकार जैसे मानसिक लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। लेकिन इसके इन लक्षणों को कुछ थेरेपी के मदद से कम किया जा सकता है। एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर रुचि शर्मा बताती हैं कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है लेकिन हम चाहें तो इसमें दिखाई देने वाले लक्षण जैसे चिंता, डिप्रेशन को कुछ थेरेपी की मदद से कम किया जा सकता है। 

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1) कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी या संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (Cognitive Behavioural Therapy)

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी सबसे आम और लोकप्रिय थेरेपी में से एक है। इसका इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है। यह थेरेपी डिप्रेशन (Depression), एंग्जायटी (Anxiety) और ओसीडी (OCD) में फायदेमंद होती है। इसके अलावा किसी चीज की लत लगने पर भी यह थेरेपी काम आती है। यह थेरेपी चिकित्सा अनुभूति जैसे विचार (Thoughts), धारणाएं (Assumptions) और व्यवहार जैसे शारीरिक प्रतिक्रियाएं (Body Reactions), शारीरिक परिवर्तन (Physioloical Changes), किसी घटना पर प्रतिक्रिया (Reactions to Events) दोनों में ही लाभकारी होती है। इसके उपचार की अवधि इसके लक्षणों, व्यक्ति की जरूरतों पर निर्भर करता है। इसमें 8-12 सेशन की जरूरत होती है।

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2) इंटरपर्सनल थेरेपी (Interpersonal Therapy)

इंटरपर्सनल थेरेपी मुख्य रूप से वैवाहिक संघर्ष (Marital Conflicts), रिश्ते में मुद्दों (Relationship Issues), दुख (Sadness), नुकसान (Loss), परिवार (Family) और संघर्ष के मुद्दों का इलाज और समाधान के लिए उपयोगी है। यह थेरेपी संचार पैटर्न (Communication Patterns), भूमिका संघर्ष (Role Conflicts) और खुद के बारे में धारणाओं (Perceptions about Self) को टारगेट करती है। इस थेरेपी को तीन चरणों में चिकित्सा की सामान्य लंबाई 12-16 सत्र है। 

3) स्वीकृति और प्रतिबद्धता थेरेपी (Acceptance and Commitment Therapy)

यह एक नई थेरेपी है। इसे व्यक्ति की व्यक्तिगत मूल्य प्रणाली पर ध्यान केंद्रित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए किया जाता है। समस्या के निवारण के लिए इस थेरेपी में मेटाफोर्स (Metaphors) का उपयोग किया जाता है।

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4) डायलेक्टिकल बिहेवियर थेरेपी (Dialectical Behaviour Therapy)

शुरू में डायलेक्टिकल बिहेवियर थेरेपी का इस्तेमाल आत्म-हानि या भावनात्मक रूप से अस्थिर व्यक्तित्व वाले (emotionally unstable personality), उच्च जोखिम वाले रोगियों के इलाज के लिए किया गया था। लेकिन वर्तमान में इसका इस्तेमाल खाने के विकार (eating disorders), चिंता विकार (anxiety disorders) और किशोर व्यवहार के मुद्दों (adolescent behaviour issues) के साथ किया जाता है। यह व्यक्ति को संकट प्रबंधन करने और किसी की भावनाओं को नियंत्रित करने और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

ये थेरेपी भी है फायदेमंद (These Therapies Are Also Good)

संगीत सुनना (Listening to music)

यह जरूरी नहीं है कि इसमें हमेशा सॉफ्ट म्यूजिक ही सुने जाएं। आपको जो गाने पसंद हो, जो आपने दिल को सुकून देते हो या फिर जो गाने आपको उत्साहित करते हैं। आप ऐसे संगीत को सुन सकते हैं। ये आपके मानसिक स्वास्थ्य पर अच्छा काम करेगी।

कला अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में (Art as a medium of expression)

कला एक खूबसूरत पेंटिंग से लेकर मिट्टी से बनी गेंद तक कुछ भी हो सकती है। जिसमें भी आपको आनंद आए वही कला अच्छी होती है। कला आपके गुस्से को शांत करता है और आपको शांत स्वभाव का बनाता है। कला को अपने जीवन का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए। 

मूवमेंट (Movement)

जब भी आप दुखी महसूस करते हैं या खुश नहीं होते हैं तो किसी भी तरह की मूवमेंट कर सकते हैं। इसमें चलना, डांस करना, एक्सरसाइज करना और आटा गूंधना शामिल हो सकता है। इससे एंडोर्फिन रिलीज होता है, जो व्यक्ति को खुश रखने में मदद करता है।

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स्व-शांत (Self-Soothe) 

अपने हाथों, पैरों को रगड़ना और खुद को गले लगाने से आपको सुकून महसूस होता है। आप संकटपूर्ण समय के दौरान आराम और सुरक्षा की प्रदान कर सकते हैं। 

एक्यूपंक्चर (Acupuncture,)

अरोमाथेरेपी, योग और ध्यान चिकित्सा के कुछ अन्य वैकल्पिक रूप हैं। इनका प्रयोग मानसिक शांति बनाए रखने के लिए किया जाता है। 

पार्किंसन रोगियों के लिए ये थेरेपी काम की हो सकती है। इनसे पार्किंसन के लक्षणों को कम किया जा सकता है, जिससे मरीज को राहत मिलती है।

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