पूरी तरह मिथ हैं नींद से जुड़ी ये 5 बातें, डॉक्टर्स ने भी ठहराया गलत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 26, 2018
Quick Bites

  • अच्छी नींद का अहसास न सिर्फ हमें फ्रेश महसूस कराता है।
  • एक अच्छी सेहत के लिए नींद की बहुत बड़ी भूमिका होती है।
  • दुनियाभर में 10 करोड़ लोग नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं।

एक अच्छी सेहत के लिए नींद की बहुत बड़ी भूमिका होती है। अच्छी नींद का अहसास न सिर्फ हमें फ्रेश महसूस कराता है। बल्कि हम इससे शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से स्वस्थ रहते हैं। एक रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि दुनियाभर में 10 करोड़ लोग स्लीप एप्निआ यानी अच्छी नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक लोग तो इस बीमारी से ही अनजान हैं और 30 प्रतिशत लोग नींद लेते भी हैं तो उसे नियमित नहीं बना पाते हैं। आज हम आपको नींद से जुड़े कुछ ऐसे मिथ बता रहे हैं जिन पर भूलकर भी विश्वास नहीं करना चाहिए।

मिथ : रोजाना 8 घंटे की नींद लेना जरूरी होता है।

सच्चाई : अक्सर हम ये सुनते हैं कि हर व्यक्ति को रोजाना कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। जबकि मनोचिकित्सकों का कहना है कि यह जरूरी नहीं है कि सेहतमंद रहने के लिए आठ घंटे की नींद ली जाए। नींद की समय सीमा व्यक्ति की उम्र और शरीर टाइप पर निर्भर करती है। यदि कोई व्यक्ति 6 से 9 घंटे की नींद ले रहा है तो वह स्वस्थ है और आगे भी स्वस्थ रह सकता है।

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मिथ : कम सोने वाले अक्सर तनाव में रहते हैं।

सच्चाई : कम सोने वाले लोग तनावग्रस्त रहें यह जरूरी नहीं है। डॉक्टर्स का मानना है कि ज्यादा सोना भी कभी कभार तनाव और सिर दर्द का कारण बनता है।

मिथ : वीकेंड में ज्यादा सोकर हफ्ते भर की थकान मिट जाती है।

सच्चाई : अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं कि वीकेंड में जी भर सो लेने से आप हफ्तेभर की थकान को मिटा सकते हैं तो बता दें कि ये सिर्फ एक मिथ है। मनोचिकित्सकों के अनुसार आज की जीवनशैली में हमारा यह रवैया बॉडी क्लॉक को बुरी तरह प्रभावित करता है जो सेहत के लिए कतई ठीक नहीं। इससे शरीर में दर्द और अन्य रोगों के होने का खतरा रहता है।

मिथ : ज्यादा कॉफी पीने और नींद का कोई संबंध नहं है।

सच्चाई : ज्यादा कॉफी पीना पूरी तरह से नींद को प्रभावित करता है। यदि आप दिनभर आॅफिस में बैठकर 5 से 6 कप कॉफी पीते हैं तो निश्चित रूप से आपकी रात की नींद प्रभावित होगी। कॉफी में मौजूद कैफीन के कण रक्त में 12 घंटों तक बने रहते हैं। जो नींद को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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मिथ : अच्छी नींद का संकेत हैं खर्राटे

सच्चाई : जो लोग जोर जोर से खर्राटे लेते हैं जरूरी नहीं है कि वह अच्छी और चैन की नींद भी लेते हैं। खर्राटे का मतलब अच्छी नींद नहीं बल्कि नाक के छिद्र के सॉफ्ट टिशू में होने वाला कंपन या मस्तिष्क को पूरी तरह ऑक्सीजन न मिल पाने की स्थिति होती है। इसलिए ऐसे मिथों से बिल्कुल दूर रहें।

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