Sat Oct 17, 2026 | 05:43 AM IST

Doctor Verified

OMH Exclusive: सियाचिन की बर्फीली हवाओं में जवानों के कान और गला कैसे काम करते हैं? डॉ. मेजर राजेश भारद्वाज की जुबानी

ENT Problems In Soldiers In India: सैनिकों के जीवन में कभी उन्हें जमीन पर रहना होता है, तो कभी ऊंचे पहाड़ों पर, लेकिन जब बात सियाचिन जैसी बर्फीली हवाओं के बीच रहने की आती है, तो वहां रहने वाले सैनिकों के नाक, कान और गले की कंडीशन कैसी होती है और कैसे वे इन दिक्कतों का सामना करते हैं, यह जानने के लिए हमने डॉ. मेजर राजेश भारद्वाज से बात की, जिन्होंने अपना पूरा कार्यकाल सियाचिन में ही बिताया है।
OMH Exclusive: सियाचिन की बर्फीली हवाओं में जवानों के कान और गला कैसे काम करते हैं? डॉ. मेजर राजेश भारद्वाज की जुबानीOMH Exclusive: सियाचिन की बर्फीली हवाओं में जवानों के कान और गला कैसे काम करते हैं? डॉ. मेजर राजेश भारद्वाज की जुबानी

ENT Problems In Soldiers In India: सैनिकों की जिंदगी बहुत ही मुश्किल होती है और जो सैनिक सियाचिन ग्लेशियर में रहकर भारतीय सीमा की रक्षा करते हैं, उनके लिए जीवन और भी कठिन हो जाता है। दरअसल, सियाचिन को दुनिया का सबसे ऊंचा और मुश्किलों भरा युद्धक्षेत्र कहा जाता है क्योंकि यहां लड़ाई सिर्फ दुश्मन से नहीं होती, बल्कि सैनिकों का शरीर हर पल मौसम, ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी से जूझता है। इस जंग में सबसे पहले असर पड़ता है नाक, कान और गले पर। इस दौरान सैनिक अपने नाक, गले और कान का कैसे ख्याल रखते हैं और किन चुनौतियों से उन्हें गुजरना पड़ता है, इन सभी विषयों पर हमने डॉ. मेजर राजेश भारद्वाज (Dr. Major Rajesh Bhardwaj, ENT Specialist, Medfirst Healthcare) से बात की। उन्होंने भारतीय सेना में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर सियाचिन में पूरा टेन्योर बिताया है और साल 1984 में हुए ऑपरेशन मेघदूत का हिस्सा भी रहे हैं। फिलहाल डॉ. मेजर राजेश भारद्वाज MedFirst Healthcare में ENT Specialist हैं।

सैनिकों की सेहत से जुड़े सवाल और जवाब  

सवाल: डॉ. भारद्वाज, सियाचिन जैसे इलाके में नाक का नेचुरल फिल्टर सिस्टम फेल क्यों हो जाता है?

डॉ. मेजर राजेश भारद्वाज कहते हैं, “नाक का काम होता है हवा को फिल्टर करना, गर्म करना और उसमें नमी जोड़ना, लेकिन सियाचिन जैसी जगहों पर हवा इतनी ठंडी और इतनी सूखी होती है कि नाक की यह क्षमता सीमित पड़ जाती है। वहां की हवा में नमी लगभग नहीं के बराबर होती है। ऐसे में नाक पूरी तरह हवा को ह्यूमिडिफाई नहीं कर पाती और म्यूकोसल लाइनिंग सूखने लगती है। यही कारण है कि ग्लेशियर में नाक का नेचुरल फिल्टर सिस्टम फेल होने लगता है।”

quote of dr rajesh on nose bleeding in hindiquote of dr rajesh on nose bleeding in hindi

यह भी पढ़ें- बहती नाक और एलर्जी से छुटकारा पाने के नेचुरल तरीके जानें डॉक्टर से

सवाल: नाक का फिल्टर काम नहीं करता, तो क्या इसी वजह से सैनिकों की नाक से खून बहना आम है?

Harvard Health में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बहुत ज्यादा ऊंचाई पर रहने वाले 10 में से 6 लोगों को नाक से खून आने की समस्या हो सकती है। इसका मुख्य कारण हवा में सूखापन होता है। कुछ ऐसा ही डॉ. मेजर राजेश ने कहा,  “जी हां, सैनिकों की नाक से खून बहना आम है क्योंकि हाई एल्टीट्यूड पर नाक से खून बहना सिर्फ नाक में चोट लगना नहीं होता, बल्कि पूरा शरीर जिस स्ट्रेस से गुजरता है, उसका असर नाक की नसों पर पड़ता है। दरअसल, ऑक्सीजन की कमी के कारण पल्स रेट और सांस लेने की दर बढ़ जाती है। इससे ब्लड प्रेशर हल्का सा ऊपर जाता है और नाक के नाजुक ब्लड वेसल्स पर दबाव बढ़ जाता है। साथ ही बहुत ज्यादा सूखापन नाक की परत को कमजोर कर देती है, जिससे खून बहना आसान हो जाता है।”

सवाल: ठंड से बचने के लिए सैनिक फेस मास्क और कवर लगाते हैं। क्या ये कवर ENT की बीमारियां बढ़ा सकते हैं?

डॉ. भारद्वाज कहते हैं, “अगर मास्क लंबे समय तक बिना साफ किए इस्तेमाल किए जाएं, तो हां इससे ENT की बीमारियां बढ़ सकती हैं। दरअसल, मास्क में नमी और कुछ हद तक कार्बन डाइऑक्साइड फंस सकती है। इससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है। इसीलिए सेना में साफ-सफाई और नियमित स्टेरलाइजेशन पर जोर दिया जाता है।”

सवाल: क्या इतनी सूखी हवा से सैनिकों को परमानेंट नुकसान भी हो सकता है?

इस बारे में डॉ. भारद्वाज ने कहा कि अगर एक्सपोजर बहुत लंबा हो, यानी एक से दो महीने से ज्यादा हो और इस समय सैनिकों को सही सेफ्टी न मिले, तो म्यूकोसा को नुकसान हो सकता है। हालांकि Laryngopharyngitis Sicca जैसी क्रोनिक कंडीशन्स बहुत ही रेयर होती है और अभी तक बड़े स्तर पर रिपोर्ट नहीं हुई हैं। इसलिए इस पर और ज्यादा रिसर्च करने की जरूरत है।

सवाल: यह तो बात हुई नाक की, इस कड़ाके की ठंड में बोन-ड्राई एयर गले और फेफड़ों को कैसे नुकसान पहुंचाती है?

डॉ. भारद्वाज कहते हैं, “दरअसल, सियाचिन जैसी ऊंची पहाड़ियों में हवा में हाइड्रेशन बिल्कुल नहीं होती। नाक की भी नमी रखने की अपनी एक सीमा होती है और जब हवा जरूरत से ज्यादा सूखी हो जाती है, तो सूखी हवा गले और फेफड़े को नुकसान पहुंचाने लगती है। इससे गले में जलन, लगातार सूखी खांसी की समस्या और सांस लेने में परेशानी होने लगती है। सैनिकों को भी इन समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है।”

quote of dr rajesh on medical checkup in hindiquote of dr rajesh on medical checkup in hindi

यह भी पढ़ें- गले की खराश और खांसी से हैं परेशान, घर पर बनाएं ये आयुर्वेदिक गोली

सवाल: क्या साइनुसाइटिस या कान की सर्जरी वाले सैनिकों के लिए सियाचिन ज्यादा रिस्की होता है?

इस बारे में डॉ. भारद्वाज कहते हैं कि क्रोनिक साइनुसाइटिस सियाचिन जैसे हाई एल्टीट्यूड पर सैनिकों को परेशान कर सकता है। ग्लेशियर में प्रेशर चेंज और ठंड कान की पुरानी समस्याओं को भी बढ़ा सकती है। हालांकि, जिन्हें ये समस्या होती है, उन सैनिकों को भी सियाचिन में रखा जाता है, लेकिन उनकी काफी कड़ी मॉनिटिरिंग होती है, ताकि किसी भी तरह की गंभीरता से बचा जा सके।

सवाल: किन लोगों को सियाचिन जैसी जगहों पर नहीं भेजा जाता?

डॉ. भारद्वाज कहते हैं, “जिन सैनिकों का अनकंट्रोल्ड हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट की बीमारियां, अस्थमा, पेट के अल्सर और गंभीर एसिडिटी वाले लोगों को हाई एल्टीट्यूड पर नहीं भेजना चाहिए। जो सैनिक इम्यूनोसप्रेसेंट दवाइयों पर होते हैं, पहले फ्रॉस्टबाइट की हिस्ट्री होती है या किसी भी तरह की एक्टिव इंफेक्शन होती है, उनकी बीमारी सियाचिन जैसी जगहों पर जाने से गंभीर हो सकती है। इसलिए ऐसी मुश्किल जगहों पर जाने से पहले सैनिकों का मेडिकल चेकअप बहुत कड़े तरीके से किया जाता है।”

सवाल: क्या सैनिकों को ENT सेल्फ-मॉनिटरिंग की ट्रेनिंग दी जाती है?

इसका जवाब देते हुए डॉ. भारद्वाज कहते हैं कि जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि भारतीय सेना में सभी सैनिकों का रेगुलर मेडिकल चेकअप होता है। जो सैनिक फायरिंग असाइनमेंट पर होते हैं, उनके खासतौर पर ऑडियोग्राम और हियरिंग टेस्ट किए जाते हैं, ताकि किसी भी तरह की समस्या का पहले से ही पता चल जाए। सैनिकों के मेडिकल चेकअप हर लेवल पर होता है और उनकी ट्रेनिंग भी बहुत स्ट्रिक्ट होती है, ताकि वे ऐसी मुश्किल जगहों पर सर्वाइव कर सकें।

डॉ. मेजर राजेश भारद्वाज के मुताबिक, सियाचिन जैसे ग्लेशियर वाले इलाकों में ENT चेकअप बहुत ही महत्वपूर्ण है और इसके साथ-साथ सैनिकों की कार्डियक हेल्थ, रेस्पिरेटरी सिस्टम, हीमोडायनामिक स्टेबिलिटी और मेंटल हेल्थ का भी ध्यान रखना बहुत जरूरी है और सैनिकों के हर मेडिकल पहलू पर पूरा ध्यान दिया जाता है ताकि सैनिकों को किसी भी तरह की कोई दिक्कत न हो।

Read Next

→ उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और खराब हवा मिलकर कर रहे लोगों को बीमार, बचाव के लिए ध्यान रखें ये 8 बातें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jan 16, 2026 18:47 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jan 16, 2026 18:47 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jan 16, 2026 18:47 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jan 16, 2026 18:47 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jan 16, 2026 18:47 IST

    Published By : Aneesh Rawat