स्लीप एपनिया का एक बड़ा कारण है जीभ की चर्बी का बढ़ना, जानें क्या है ये स्लीप डिसऑर्डर और इसका उपचार

क्या आप रात में जोर से खर्राटे लेते हैं और सुबह उठते ही सिरदर्द का अनुभव करते हैं? अगर हां, तो आप शायद स्लीप एपनिया से पीड़ित हो सकते हैं।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Feb 28, 2020
स्लीप एपनिया का एक बड़ा कारण है जीभ की चर्बी का बढ़ना, जानें क्या है ये स्लीप डिसऑर्डर और इसका उपचार

स्लीप एपनिया (Sleep Apnea),जो कि एक स्लीपिंग डिसऑर्डर है, इसे लेकर हाल ही में शोध बताता कि आपके जीभ का मोटापा या टंग फैट इसे बढ़ा सकता है। दरअसल अमेरिकन जर्नल ऑफ साइंस रेस्पिरेटरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन (American Journal of Respiratory and Critical Care Medicine) में प्रकाशित एक शोध में बताया गया है कि कैसे जीभ का मोटापा कम करने से स्लीप एपनिया से बचा जा सकता है। बता दें कि ये बीमारी ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) नींद और सांस से जुड़ा एक विकार है, जिसमें गले की मांसपेशियां नींद के दौरान वायुमार्ग को खुला रखने में विफल रहती हैं। इसके परिणामस्वरूप सांस लेने में बार-बार रुकावट आती है और साथ ही तेज खर्राटे और दिन के समय नींद खराब होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

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क्या कहता है शोध 

हाल ही में आया शोध दरअसल जीभ की चर्बी से जुड़े परेशानियों पर किया जा रहा था। शोधकर्ताओं ने इसे दौरान पाया कि कैसे जीभ पर जमा होने वाला फैट भी इसे प्रभावित करता है। शोध में बताया गया है कि कम ही लोग जानते हैं कि जीभ शरीर की चर्बी को नुकसान पहुंचाती है। इससे पहले, 2014 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया था कि स्लीप एपनिया वाले लोगों में आमतौर पर अधिक वसा ऊतक के साथ बड़ी जीभ होती है। इस साल, एक अन्य अध्ययन में जीभ की चर्बी के नुकसान और मरीजों के लक्षणों में सुधार के बीच सीधा संबंध बताया गया है। शोध के लेखक पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय प्रमुख वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. रिचर्ड श्वाब की मानें, तो "ज्यादातर लोग जीभ की चर्बी के बारे में नहीं सोच रहे होते हैं और लगातार नींद में हो रही इस परेशानी की दवा लेते हैं। जब यह स्लीप एपनिया की बात आती है, तो जीभ की शारीरिक रचना महत्वपूर्ण हो सकती है।

ओएसए अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के अनुसार, अनुमानित 25 मिलियन अमेरिकियों को ये बीमारी प्रभावित कर रही है। यह देखने के लिए कि क्या ट्रिमर जीभ इसे ठीक कर सकती है, तो उनकी टीम ने 67 ओएसए रोगियों का अध्ययन किया, जो मोटे थे और वजन घटाने से गुजर रहे थे। फिर इन लोगों का वजन घटाने से पहले और बाद में की गई एमआरआई की गया और तब बारीक विवरणों का खुलासा हुआ कि कैसे जीभ की चर्बी के नुकसान और रोगियों के लक्षणों में सुधार के बीच सीधा संबंध था। वजन कम करने वाले लोगों ने कुछ जबड़े और वायुमार्ग की मांसपेशियों में भी कमी दिखाई और इस तरह एपनिया के लक्षणों में सुधार होने के संकेत मिले।

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क्या है स्लीप एपनिया (Sleep Apnea)?

यह एक नींद से जुड़ा विकार है, जिसमें सोते समय आपकी सांस थोड़ी देर के लिए रुक जाती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इस वजह से, आप सांस के लिए हांफ सकते हैं और कभी-कभी, अपने स्वयं के खर्राटों की तेज आवाज के कारण जाग सकते हैं। इस स्थिति के लक्षणों में नींद के दौरान कई तरह के लक्षण दिख सकते हैं, जैसे

  • हांफना
  • चिड़चिड़ापन
  • सुबह सिरदर्द
  • अनिद्रा
  • दिन के दौरान नींद की भावना शामिल है। 

अगर समय पर इलाज नहीं किया जाता है, तो स्लीप एपनिया के कारण थकान, उच्च रक्तचाप, चयापचय संबंधी विकार, टाइप 2 मधुमेह, लिवर की समस्या आदि हो सकती है। इसके अलावा, यह स्थिति आपके साथी को नींद से वंचित करके रिश्ते की समस्या भी पैदा कर सकती है।

स्लीप एपनिया से बचने के घरेलू उपाय

वजन कम रखने की कोशिश करें

इससे पहले, विभिन्न अध्ययनों ने साबित किया है कि मोटापा वायुमार्ग बाधा के आपके जोखिम को बढ़ा सकता है। अतिरिक्त वजन आपके नाक मार्ग को संकीर्ण कर सकता है। इससे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है और नींद में खलल पड़ सकता है। इसे वजन कम करने या संतुलित रखने की कोशिश करें।

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योग करें

जैसा कि हम सभी जानते हैं, योग एक पुरानी व्यायाम तकनीक है जिसमें मूल रूप से श्वास शामिल है। योग में, आप कैसे सांस लेते हैं यह बेहद महत्वपूर्ण है और सकारात्मक प्रभाव उस पर निर्भर करते हैं। दैनिक आधार पर योग में लिप्त होने से आपकी ऊर्जा का स्तर बढ़ सकता है। यह नींद की गड़बड़ी का इलाज करने में मदद कर सकता है और आपके दिल की सेहत को भी बढ़ा सकता है। जैसा कि पहले बताया गया है, स्लीप एपनिया के पीछे दिल की समस्याएं एक बड़ा कारण हैं।

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पीठ के बल न सोएं

ओटो-राइनो-लैरींगोलॉजी और हेड एंड नेक के यूरोपीय अभिलेखागार में प्रकाशित 2006 के एक अध्ययन के अनुसार, आधे से अधिक स्लीप एपनिया मामले गलत सोने की स्थिति के कारण होते हैं। क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि आपकी पीठ के बल सोना वास्तव में आपकी स्थिति को और खराब कर सकता है। यह आपके वायुमार्ग को अवरुद्ध कर सकता है और खर्राटों के एपिसोड को बढ़ा सकता है। सीधे तरह से सोने की कोशिश करें। यह आपको कुछ हद तक मदद कर सकता है।

धूम्रपान या शराब न पिएं

जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, सकारात्मक जीवन शैली में परिवर्तन आपके समग्र स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं। इसमें आपके सोने और सांस लेने के पैटर्न शामिल हैं। जहां तक शराब का शरीर पर प्रभाव का सवाल है, यह वास्तव में गले की मांसपेशियों को नुकसान पहंचा सकता है, जो आपकी सांस को नियंत्रित करती हैं। यह वही है जो नींद और खर्राटों को भी बढ़ाता है।

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