किराए की कोख: अब विधवा और तलाकशुदा महिलाएं भी बन सकेंगी मां, कैबिनेट ने नए सरोगेसी बिल को दी मंजूरी

सरोगेसी रेगुलशन बिल, 2020 को मंजूरी मिलने के बाद अब निसंतान भारतीय दंपत्तियों के अलावा विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं को लाभ मिलेगा।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Feb 27, 2020
किराए की कोख: अब विधवा और तलाकशुदा महिलाएं भी बन सकेंगी मां, कैबिनेट ने नए सरोगेसी बिल को दी मंजूरी

सरोगेसी (Surrogacy) यानी किराए की कोख के संबंध ने भारत सरकार ने एक महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को सरोगेसी रेगुलशन बिल, 2020 को मंजूरी दे दी, जिससे एक "इच्छुक" महिला को सरोगेट मां बनने की अनुमति दी जा सकती है और यह प्रस्ताव किया जा सकता है कि इस विधेयक से विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं के अलावा निसंतान दंपत्तियों को भी लाभ होगा।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्यसभा की चयन समिति की सिफारिशों को शामिल करने के बाद कैबिनेट ने सरोगेसी रेगुलशन बिल को मंजूरी दे दी। सरोगेसी रेगुलशन बिल, 2019 को 23 सदस्यीय समिति द्वारा सुझाए गए 15 बड़े बदलावों में "इंफर्टिलिटी" की परिभाषा को शामिल करना भी शामिल है।

surrogacy

जावड़ेकर ने कहा कि विधेयक कामर्शियल सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाने और नैतिकता के आधार पर सरोगेसी की अनुमति देने के उद्देश्य से है।" उन्‍होंने कहा, इससे सरोगेसी के प्रति किराए की कोख के व्‍यापार पर प्रतिबंध लगेगा और इस नए बिल में इसे नैतिक रूप दिया जाएगा। 

वहीं प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद, केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि केवल भारतीय जोड़े ही देश में सरोगेसी का विकल्प चुन सकते हैं। उन्‍होंने कहा, महिलाओं के संतान को जन्म देने के अधिकार के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुला नजरिया रखते हैं। उन्होंने गर्भपात और तकनीकी मदद से गर्भधारण करने को कानूनी रूप देने के लिए सरोगेसी बिल की पैरवी की है।

और क्‍या है इस नए बिल की खासियत? 

विधेयक में राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड और राज्य सरोगेसी बोर्ड और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपयुक्त अधिकारियों की स्थापना करके सरोगेसी को विनियमित करने का प्रस्ताव है। सरोगेट मदर के लिए प्रस्तावित बीमा कवर को अब 16 महीने से बढ़ाकर 36 महीने कर दिया गया है।

नए विधेयक के मुताबिक कोई भी विदेशी नागरिक भारत में सरोगेसी के जरिए बच्चे पैदा नहीं कर सकेगा, यह कानूनी रूप से सही नहीं होगा। इसके अलावा इंडियन सिटीजन कपल, विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के विवाहित दंपत्ति और सिंगल इंडियन महिलाएं कुछ शर्तों के के आधार पर सरोगेसी का फायदा उठा सकेंगी। 

हालांकि सिंगल वुमेन की स्थिति में उनका तलाकशुदा या विधवा जरूरी होगा। विधेयक के अनुसार, महिला की उम्र 35 से 45 साल के बीच होनी चाहिए।

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