महिलाओं को ज्यादा होती है सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर, मौसम बदलने पर उदासी और डिप्रेशन हैं इसके लक्षण

अगर आप भी मौसम बदलने पर उदास या बीमार पड़ जाती हैं, तो आप सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर का शिकार हो सकती हैं।

Written by: Updated at: Nov 06, 2022 17:00 IST
महिलाओं को ज्यादा होती है सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर, मौसम बदलने पर उदासी और डिप्रेशन हैं इसके लक्षण

सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर का मतलब होता है मौसम में बदलाव के दौरान समस्याएं महसूस करना। कई लोग मौसम बदलने के बाद उदास और बीमार महसूस करते हैं। मौसम में बदलाव के बाद उन्हें खांसी, जुकाम, ठंड गर्म आदि होता है। ऐसे ही मौसम बदलते में कुछ लोग डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। ये समस्या किसी को कभी भी हो सकती है। लेकिन ज्यादतर ये समस्या महिलाओं में देखने को मिलती है। आइए विस्तार से जानते हैं क्लाउडनाइन हॉस्पिटल की सीनियर कंसलटेंट गायनेकोलॉजिस्ट डॉ रितु सेठी से कि सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर की चपेट में क्यों आती हैं महिलाएं? क्या हैं इसके कारण, लक्षण और इलाज?

सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर क्यों होता है?

डॉक्टर का ऐसा मानना है कि महिलाओं में सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर हार्मोनल परिवर्तनों से संबंधित हो सकता है क्योंकि महिलाओं में हार्मोन चेंज होते रहते हैं। बता दें वैसे पतझड़ और सर्दी के मौसम में सूरज (Sun) की रोशन कम होती है, जिस कारण मस्तिष्क कम सेरोटोनिन(मूड को कन्ट्रोल करने वाले दिमाग के मार्गों से जुड़ा एक रसायन) बना पाता है । जिस वजह से कई महिलाओं में थकान, डिप्रेशन और वजन बढ़ने के लक्षणों के साथ डिप्रेशन की भावना पैदा होती है।

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सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर के लक्षण

सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर के लक्षण सर्दी की शुरुआत में शुरू हो सकते हैं । धीरे-धीरे सर्दी का मौसम खत्म होने पर इसके लक्षण कम हो सकते हैं। बताते चलें कि सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर दो प्रकार के होते हैं, विंटर-पैटर्न और समर-पैटर्न। इनके लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं।

  • स्लीप पैटर्न में बदलाव होने के साथ ही नींद न आने की समस्या
  • एनर्जी की कमी
  • ध्यान लगाने में परेशानी
  • आत्महत्या के विचार आने की समस्या
  • कार्य में मन न लगना
  • अकेले रहना
  • पूरा दिन थकान महसूस होना
  • ज्यादा भूख लगना
  • फिजिकल एक्टिविटी में कमी आना
  • वजन का बढ़ना
seasonal affective disorder

सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर के कारण

पुरुषों की तुलना में सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर महिलाओं को होता है क्योंकि 18 से 30 वर्ष की आयु के बीच महिलाओं में कई प्रकार के चेंज आते हैं। जैसे पीरियड से जुड़े हार्मोंस में बदलाव आना और प्रेग्नेंसी के दौरान या उसके के बाद कई तरह के हार्मोनल बदलाव आना। साथ ही कई महिलाएं कई वजहों से सूरज की रोशनी नहीं ले पाती हैं। सूर्य की रोशनी के संपर्क में कम आने से बायोलॉजिकल वॉच प्रभावित होता है और इससे नींद और मूड स्विंग से जुड़े हार्मोन्स के उत्पादन पर असर पड़ता है। 

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सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर का इलाज 

सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर का इलाज आपके लक्षणों पर डिपेंड होता है। बताते चलें इसका इलाज दवाओं और थेरेपी से किया जा सकता है। इसके इलाज में डॉक्टर आपके साथ कॉग्नेटिव बिहेवियर थेरेपी का इस्तेमाल करते हैं। बता दें बिहेवियर थेरेपी सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर वाले लोगों को नेगेटिव सोच के बजाय पॉजिटिव सोच और गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करती है। साथ ही इसके इलाज के लिए डॉक्टर अच्छी डाइट, एक स्वस्थ जीवनशैली, नियमित व्यायाम और धूप लेने के लिए भी कहते हैं । इसके साथ विटामिन डी की खुराक का उपयोग किया जाता है।

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