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Dengue Rashes: स्किन पर चकत्ते भी हो सकते हैं डेंगू के लक्षण, डॉक्टर से जानें डेंगू रैशेज के लक्षण और इलाज

देश में डेंगू बुखार के मामले तेजी से फैल रहे हैं और मरीजों में डेंगू रैश की समस्या भी हो रही है। एक्सपर्ट डॉक्टर से जानें डेंगू रैशेज के बारे में।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Jul 11, 2022 14:22 IST
Dengue Rashes: स्किन पर चकत्ते भी हो सकते हैं डेंगू के लक्षण, डॉक्टर से जानें डेंगू रैशेज के लक्षण और इलाज

भले ही पिछले तमाम सालों में डेंगू की बीमारी इतनी तेजी के साथ न फैली हो लेकिन इसके मामलों में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। इस साल देशभर में डेंगू बुखार के मामले पिछले कई सालों की तुलना में अधिक आये हैं। इसका सबसे बड़ा कारण डेंगू का नया वैरिएंट DENV-2 माना जा रहा है। डेंगू के नए वैरिएंट को काफी खतरनाक और संक्रामक माना जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि डेंगू के कारण होने वाले बुखार और कोविड की वजह से होने वाले बुखार के लक्षण लगभग समान ही हैं इसलिए चिंता और बढ़ गयी है। डेंगू बुखार से संक्रमित होने पर मरीजों में चेहरे पर दानें और शरीर के कई हिस्सों में चकत्ते (रैशेज) दिखाई देते हैं। डेंगू बुखार के लक्षण के रूप में दिखने वाले रैशेज को कई बार सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं जबकि ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। डेंगू के मरीजों में मैकुलोपापुलर या मैक्यूलर कंफ्लुएंट रैश 3 दिन से लेकर एक हफ्ते तक बने रह सकते हैं। आइये विस्तार से जानते हैं इनके बारे में।

डेंगू रैशेज की समस्या (Rashes in Dengue Fever)

डेंगू बुखार होने पर मरीजों में रैशेज भी हो सकते हैं। दिल्ली के सीताराम भरतिया अस्पताल के जनरल मेडिसिन कंसलटेंट डॉ मयंक के मुताबिक अधिकांश मौसमी संक्रमण में तेज बुखार की वजह से लोग डेंगू बुखार और वायरल बुखार के बीच अंतर नहीं कर पाते हैं। इस स्थिति में आप रैशेज के होने पर डेंगू के बुखार का अंदाजा लगा सकते हैं। डेंगू मच्छरों के काटने से फैलने वाली बीमारी है जिसमें त्वचा पर चकत्ते निकल आते हैं। ये चकत्ते दो बार आते हैं। पहली बार बुखार होने से पहले और दूसरी बार बुखार होने के बाद मरीजों में डेंगू रैशेज के लक्षण दिखाई देते हैं। डेंगू के बुखार में होने वाले इन चकत्तों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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डेंगू रैशेज के लक्षण (Dengue Rashes Symptoms)

डेंगू बुखार पहली बार होने से पहले और दूसरी बार बुखार होने के बाद मरीजों में डेंगू रैश दिखाई देते हैं। सामान्यतः बुखार के 2-3 दिन के भीतर डेंगू रैश (स्किन पर चकत्ते) दिखाई देते हैं। डेंगू बुखार में होने वाले चकत्ते आपके शरीर की पूरी स्किन को कवर कर सकते हैं। डेंगू बुखार की समस्या में चकत्ते होना एक लक्षण या संकेत माना जाता है। ये रैशेज छोटे और लाल रंग के होते हैं। लेकिन जब आप शरीर पर मौजूद इन चकत्तों पर हाथ घुमाएंगे तो ये महसूस नहीं किये जाते हैं। डेंगू रैशेज को पहचानने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • लाल रंग के पिनहेड जैसे चकत्ते।
  • छोटे रैशेज।
  • शुरुआत में चेहरे से लेकर शरीर के काफी हिस्से में चकत्ते।

डेंगू बुखार के लक्षण (Dengue Fever Symptoms)

डेंगू बुखार में दिखने वाले लक्षण मरीजों में अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए कई बार इनके लक्षणों के आधार पर डेंगू या वायरल बुखार के मामलों को अलग करना बहुत मुश्किल हो जाता है। डेंगू के नए वैरिएंट के संक्रमण से मरीजों में ये लक्षण देखे जा सकते हैं।

  • तेज बुखार
  • रक्तस्रावी बुखार 
  • गंभीर सिरदर्द
  • जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
  • मतली, पेट दर्द और दस्त
  • प्लेटलेट्स का तेजी से गिरना
  • आंखों के पीछे दर्द
  • बुखार के दौरान अत्यधिक बेचैनी
  • भूख की कमी
  • तेज सिरदर्द
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • शरीर, जोड़ों व पेट में दर्द होना 
  • शरीर में सूजन होना 
  • त्वचा पर लाल निशान आ जाना
  • डेंगू हेमोरेजिक फीवर
  • पेशाब लाल रंग का आना, काले दस्त आना
  • दौरे आना और बेहोशी छा जाना
  • डेंगू शॉक सिंड्रोम
  • डेंगू के रैशेज में खुजली

डेंगू रैश का इलाज (Dengue Rashes Treatment)

डेंगू बुखार की समस्या में बुखार कम होने पर ही दानें और रैशेज ठीक होने लगते हैं। सामान्यतः 3 से 4 दिन तक मरीजों में रैशेज की समस्या हो सकती है। डेंगू की बीमारी में मरीजों को हमेशा उसके लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए। अगर मरीजों में ये चकत्ते बढ़ रहे हैं तो इसका मतलब है कि मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स की कमी हो रही है। मरीजों में इसकी जटिलता को रोकने के लिए कड़ी निगरानी की जानी चाहिए। डेंगू रैश के इलाज के लिए आपको एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। चिकित्सक मरीजों को डेंगू रैश से बचाव के लिए ये सलाह दे सकते हैं।

  • खुद को हाइड्रेटेड रखें।
  • बुखार उतरते समय शरीर में मौजूद चकत्तों की निगरानी करें।
  • शरीर पर चकत्तों वाली जगह पर लोशन का इस्तेमाल करें।

क्यों होता है डेंगू

डेंगू वायरस चार भिन्न-भिन्न प्रकारों के होते हैं। यदि किसी व्यक्ति को इनमें से किसी एक प्रकार के वायरस का संक्रमण हो जाये तो आमतौर पर उसके पूरे जीवन में वह उस प्रकार के डेंगू वायरस से सुरक्षित रहता है। हालांकि बाकी के तीन प्रकारों से वह कुछ समय के लिये ही सुरक्षित रहता है। यदि उसको इन तीन में से किसी एक प्रकार के वायरस से संक्रमण हो तो उसे गंभीर समस्याएं होने की संभावना काफी अधिक होती है। डेंगू आमतौर पर डेन1, डेन2, डेन3 और डेन4 सरोटाइप का होता है। 1 और 3 सरोटाइप के मुकाबले 2 और 4 सेरोटाइप कम खतरनाक होता है। टाइप 4 डेंगू के लक्ष्णों में शॉक के साथ बुखार और प्लेट्लेट्स में कमी, जबकि टाइप 2 में प्लेट्लेट्स में तीव्र कमी, हाईमोरहैगिक बुखार, अंगों में शिथिलता और डेंगू शॉक सिंडरोम प्रमुख लक्षण हैं। डेंगू की हर किस्म में हीमोरहैगिक बुखार होने का खतरा रहता है, लेकिन टाइप 4 में टाइप 2 के मुकाबले इसकी संभावना कम होती है। डेंगू 2 के वायरस में गंभीर डेंगू होने का खतरा रहता है।

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