इस रोग के कारण घट जाती है खून में प्लेटलेट्स की संख्या, ये हैं लक्षण और कारण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 04, 2018
Comment

Subscribe for daily wellness inspiration

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • प्लेटलेट्स आपस में चिपककर एक गाढ़ी संरचना बना लेते हैं जिसे ब्लड क्लॉटिंग कहते हैं।
  • खून में प्लेटलेट्स की संख्या कम होने को थ्रोंबोसायटोपेनिया कहते हैं।
  • प्लेटलेट्स हमारे बोन मैरो में बनते हैं।

कई बार कुछ कारणों से आपके खून में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है। शरीर की इसी स्थिति को मेडिकल की भाषा में थ्रोंबोसायटोपेनिया कहते हैं। प्लेटलेट्स ऐसी रंगहीन कोशिकाएं होती हैं जो आपस में चिपककर खून को गाढ़ा करने या जमाने में मदद करती हैं। थ्रोंबोसायटोपेनिया के कारण आपके शरीर को कोई खास परेशानी का अनुभव भले न हो लेकिन ये कई बार खतरनाक हो सकता है। अगर आपके शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या जरूरत से ज्यादा कम है, तो चोट या खरोंच लगने पर खून लगातार निकलता रहेगा और बंद नहीं होगा। दरअसल जब कभी किसी को चोट लगती है और खून निकलना शुरू होता है तो त्वचा के ऊपरी हिस्से पर ये प्लेटलेट्स आपस में चिपककर एक गाढ़ी संरचना बना लेते हैं जिसे ब्लड क्लॉटिंग या खून जमना कहते हैं। इससे शरीर का बाकी ब्लड निकलने से बच जाता है और शरीर को कम से कम तकलीफ होती है।

थ्रोंबोसायटोपेनिया का कारण

 

थ्रोंबोसायटोपेनिया यानि खून में प्लेटलेट्स की संख्या में कमी कई कारणों से हो सकती है। प्लेटलेट्स हमारे बोन मैरो में बनते हैं। बोन मैरो हड्डियों के अंदर कुछ मुलायम टिशूज होती हैं। अगर आपका शरीर पर्याप्त प्लेटलेट्स नहीं बना पा रहा है, तो आपको थ्रोंबोसायटोपेनिया हो सकता है या कई बार ऐसा भी होता है कि बोन मैरो पर्याप्त संख्या में प्लेटलेट्स बनाता है मगर वे बनने के साथ ही किन्हीं कारणों से नष्ट होते रहते हैं।

इसे भी पढ़ें:- मैदा, चीनी और फास्ट फूड्स के ज्यादा सेवन से होता है ये गंभीर रोग

क्यों कम होते हैं प्लेटलेट्स

  • प्लेटलेट्स कम होने का मुख्य कारण बोन मैरो में कोई समस्या हो सकती है। आमतौर पर एप्लास्टिक एनीमिया होने पर बोन मैरो प्रभावित होता है और पर्याप्त प्लेटलेट्स नहीं बना पाता है। कुछ विशेष कैंसर जैसे ल्यूकीमिया, लिम्फोमा आदि के कारण भी बोन मैरो प्रभावित होता है।
  • कई बार प्लेटलेट्स कम करने वाली कुछ अनुवांशिक बीमारियां भी व्यक्ति के शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या में कमी के जिम्मेदार होते हैं।
  • कुछ वायरस जैसे चिकनपॉक्स, मम्प्स, रूबेला, एचआईवी आदि के कारण भी शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है।
  • कई बार कैंसर के इलाज के समय कीमोथैरेपी भी प्लेटलेट्स बनाने वाली सेल्स को नष्ट कर देती है।
  • अगर आपके शरीर का सीधा संपर्क पेस्टिसाइड्स और आर्सेनिक जैसे केमिकल्स से होता है, तो भी आपके शरीर में प्लेटलेट्स बनने की क्रिया प्रभावित हो सकती है।
  • कुछ ऑटोइम्यून डिजीज के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • कुछ विशेष एंटीबायोटिक्स के ज्यादा इस्तेमाल से भी थ्रोंबोसायटोपेनिया हो सकता है।
  • महिलाओं में प्रेगनेंसी के दौरान इस रोग की संभावना बढ़ जाती है।

इसे भी पढ़ें:- मुंह और जबान का सूखना हो सकता है कई बीमारियों का संकेत

 

क्या हैं थ्रोंबोसायटोपेनिया के लक्षण

  • पेशाब के साथ खून आना
  • सिर दर्द की समस्या
  • पीरियड्स के दौरान ज्यादा मात्रा में खून निकलना
  • खून के साथ बैगनी रसायन निकलना
  • त्वचा पर बैगनी या लाल रंग के हल्के स्पॉट्स


इनमें से ज्यादातर लक्षण तभी दिखाई देते हैं जब शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या बहुत ज्यादा कम हो जाती है। आमतौर पर अगर संख्या थोड़ी बहुत कम होती है, तो शरीर को चोट, एक्सीडेंट आदि के समय नुकसान होने की आशंका तो बहुत ज्यादा होती है मगर इसका कोई शारीरिक लक्षण नहीं दिखाई देता है। थ्रोंबोसायटोपेनिया का पता लगाने के लिए खून की जांच और बोन मैरो की जांच करवाई जाती है।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Other Diseases In Hindi

Loading...
Write Comment Read ReviewDisclaimer
Is it Helpful Article?YES1922 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर