Fri Sep 11, 2026 | 08:22 PM IST

Medically Reviewed by Dr Tanima Singhal , Pregnancy Educator & Lactation Consultant

पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन को हराकर इन दो मांओं ने जीती जंग, आपबीती बताते हुए छलके आंसू

पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन एक मानस‍िक स्‍थ‍िति‍ है ज‍िसे अक्‍सर ड‍िलीवरी के बाद मां या प‍िता महसूस करते हैं। पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन को समय पर कंट्रोल कर लेंगे, तो स्‍ट्रेस, एंग्‍जाइटी, मूड स्‍व‍िंग वगैरह से बच सकते हैं। हर सात में से एक मह‍िला को पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन होता है इसल‍िए समय पर इसका इलाज करवाना जरूरी है।

प्रेग्नेंसी, होने वाली मां और प‍िता के ल‍िए एक बेहद अद्भुत पल होता है। नए मेहमान के आने की खुशी में कई बार होने वाली माता-प‍िता यह भूल जाते हैं क‍ि उन्‍हें खुद का भी ख्‍याल रखना है। ड‍िलीवरी के बाद कई बार मां या प‍िता ड‍िप्रेशन का श‍िकार हो जाते हैं, इसे मेड‍िकल भाषा में पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन (Postpartum Depression) कहते हैं। पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन का अगर समय पर इलाज न क‍िया जाए, तो यह लंबे समय में बीमारी का कारण बन सकता है, लाइफ को ड‍िस्‍टर्ब कर सकता है और र‍िश्‍तों पर भी इसका असर आ सकता है। पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन के लक्षण कई बार महसूस नहीं होते, लेक‍िन इसका असर लंबे समय तक देखने को म‍िल सकता है। इस लेख में हम ऐसी दो मांओं की आपबीती सुनेंगे ज‍िन्‍होंने पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन के ख‍िलाफ जंग जीती।

केस 1:

29 वर्षीय गृहिणी अर्चना साहू रांची की रहने वाली हैं। अर्चना ने 21 अगस्त 2025 को अपने बेटे को जन्‍म द‍िया। जन्‍म के समय तो सब कुछ ठीक था, लेक‍िन जैसे-जैसे दि‍न हफ्ते में बदले, अर्चना को तनाव महसूस होने लगा। उन्‍हें द‍िनभर श‍िशु को स्‍तनपान करवाना अच्‍छा नहीं लगता था ज‍िसके कारण उनकी म‍िल्‍क सप्‍लाई भी कम हो गई थी। अर्चना को बार-बार रोना आता और वह श‍िशु की देखभाल के कारण अन‍िद्रा का सामना भी कर रही थीं। थोड़े द‍िन हालात ऐसे हो गए क‍ि अर्चना ने श‍िशु को पूरी तरह से ब्रेस्‍टफीड करवाना बंद कर द‍िया। अर्चना की मां ने उन्‍हें समझाया और सपोर्ट क‍िया और ब्रेस्‍टफीड‍िंग के ल‍िए एक्‍सपर्ट से मदद मांगने की सलाह दी। ब्रेस्‍टफीड‍िंग की प्रक्र‍िया ठीक होते ही अर्चना ने पोस्‍टपार्टम ड‍िप्र‍ेशन से बाहर आने के ल‍िए खुद को समझाया और पहले जो काम वो बोझ समझकर पूरा कर रही थीं उसे खुशी के साथ करने लगीं। अर्चना ने खुद को समय द‍िया, सुबह वॉक की और हेल्‍दी डाइट ली और इन छोटी-छोटी कोश‍िशों ने अर्चना को ड‍िप्रेशन से बाहर आने में मदद की।

केस 2:

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31 वर्षीय पुणे न‍िवासी प्रतीक्षा जोशी ने 14 अक्‍टूबर 2025 को सी-सेक्‍शन के जर‍िए स्‍वस्‍थ श‍िशु को जन्‍म द‍िया। ड‍िलीवरी के बाद जब प्रतीक्षा घर आईं, तब तक सब कुछ ठीक था, जैसे ही श‍िशु की ज‍िम्‍मेदारी बढ़ी, प्रतीक्षा को ड‍िप्र‍ेशन के लक्षण महसूस होने लगे। अचानक से प्रतीक्षा की डाइट कम हो गई ज‍िसका असर स्‍तनपान पर भी आया। प्रतीक्षा को हर समय च‍िड़च‍िड़ापन महसूस होता था और उन्‍हें यह लगता था क‍ि श‍िशु की परवर‍िश के ल‍िए वह एक सफल मां नहीं बन पाईं। प्रतीक्षा ने डॉक्‍टर से सलाह मांगी, तो डॉक्‍टर ने उन्‍हें हेल्‍दी डाइट लेने की सलाह दी और प्रतीक्षा ने सुबह उठकर योग करना शुरू क‍िया। कुछ ही समय में अंतर नजर आया और प्रतीक्षा को बेहतर महसूस हुआ।

सपोर्ट, भरोसा और आराम हैं तीन जरूरी चीजें 

Dr. Tanima Singhal, Lactation Expert, Ma-Si Care Clinic, Lucknow ने बताया क‍ि कई मांओं को पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन होता है, लेक‍िन वह क‍िसी से कहती नहीं हैं। वह अकेला महसूस करती हैं।ब्रेस्‍टफीउ‍िंग की द‍िक्‍कतें अक्‍सर पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन में तकलीफ को दोगुना कर देती हैं। इसका बुरा असर मां की मेंटल हेल्थ पर होता है। नई मां को सपोर्ट, भरोसा और आराम करने से काफी फर्क पड़ता है।

पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन से बाहर आने के ल‍िए ये कदम उठाएं

  • अगर पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन से बाहर आना है, तो सबसे पहले आपको यह स्‍वीकार करना होगा क‍ि आप इस समस्‍या से जूझ रहे हैं और आपको मदद की जरूरत है।
  • डॉक्‍टर से म‍िलें और उन्‍हें अपनी स्‍थ‍ित‍ि के बारे में बताएं। सीबीटी थेरेपी या एंटीड‍िप्रेसेंट दवाओं की मदद से ड‍िप्रेशन का इलाज क‍िया जा सकता है।
  • नींद की कमी से पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन से बाहर आना मुश्‍क‍िल होगा इसल‍िए सबसे पहले नींद को प्राथमि‍कता दें और रोज कम से कम सात से आठ घंटे सोएं।
  • खुद के ल‍िए कुछ वक्‍त न‍िकालना जरूरी है। अपने ल‍िए समय न‍िकालें और इस दौरान एक्‍सरसाइज या योग करें, वॉक पर जाएं और अपनी हॉबी को वक्‍त दें।
  • ड‍िलीवरी के बाद शरीर को पोषण की जरूरत होती है इसल‍िए डाइट में प्रोटीन, आयरन, ओमेगा 3 वगैरह को शाम‍िल करें।

न‍िष्‍कर्ष:

पोस्‍टपार्टम ड‍िप्रेशन एक मेड‍िकल कंडीशन है ज‍िसमें ड‍िलीवरी के बाद मां या प‍िता ड‍िप्र‍ेशन का श‍िकार हो जाते हैं। इससे बाहर आने के ल‍िए आराम, सपोर्ट और हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल जीना जरूरी है।

इस लेख को ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों के साथ शेयर करें ताक‍ि पोस्‍टपार्टम ड‍िप्र‍ेशन से बचा जा सके और लोगों को इसके प्रत‍ि जागरूक करने में मदद म‍िले।

Photo Credit: Pratiksha Joshi

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Yashaswi Mathur
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    Published By : Yashaswi Mathur
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