Low Amniotic Fluid Symptoms Third Trimester In Hindi: एमनियोटिक फ्लूइड एक तरह का तरल पदार्थ है, जिसके अंदर भ्रूण का विकास होता है। गर्भ में पल रहे शिशु के लिए यह एक तरह का सुरक्षा कवच होता है, जो कि उसे तरह की परेशानी से बचाने का काम करता है। एमनियोटिक फ्लूइड की वजह से गर्भ में पल रहे शिशु को किसी तरह संक्रमण नहीं होता और हर तरह के बाहरी पदार्थ से बचा रहता है। इससे यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि एमनियोटिक फ्लूइड कितना महत्वपूर्ण है। प्रेग्नेंसी के दौरान एमनियोटिक फ्लूइड का स्तर संतुलित रहना चाहिए। ध्यान रखें कि यह एक ऐसा तरल पदार्थ है, जिसे क्रिएट या प्रोड्यूस नहीं किया जा सकता है। लेकिन, यह देखने में आता है कि कुछ स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से 9वें महीने में एमनियोटिक फ्लूइड का स्तर कम होने लगता है। यह स्थिति गर्भ में पल रहे शिशु के लिए जानलेवा हो सकती है। इससे बचने के लिए आवश्यक है कि एमनियोटिक फ्लूइड के लक्षणों को जाना जाए। तभी इससे बचाव भी संभव हो सकेगा। यह जानने के लिए हमने वृंदावन और नई दिल्ली स्थित मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर की चिकित्सा निदेशक, स्त्री रोग और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।
नौवें महीने में एमनियोटिक फ्लूइड कम होने के लक्षण- Symptoms Of Low Amniotic Fluid During Third Trimester In Hindi
एमनियोटिक फ्लूइड का लीक होना
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में वजाइनल डिस्चार्ज की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसा हार्मोन में उतार-चढ़ाव के कारण होता है। लेकिन, अगर आखिरी तिमाही में आपको लगे कि योनि से स्राव ज्यादा हो रहा है, तो उसकी कंसिस्टेंसी, रंग और गंध पर ध्यान अवश्य दें। आपको बता दें कि एमनियोटिक फ्लूइड क्लीन होता है और इसमें किसी तरह की गंध नहीं आता है। कभी-कभी एमनियोटिक फ्लूइड के साथ-साथ खून भी आने लगता है। यह सही लक्षण नहीं है। इन पर गौर जरूर करें।
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भ्रूण की गति में कमी
एमनियोटिक फ्लूइड में कमी आने पर भ्रूण की गति में कमी आने लगती है। आमतौर पर 16वें सप्ताह के बाद से शिशु गर्भ में मूवमेंट करने लगता है। लेकिन, अगर आप नोटिस करें कि आखिरी तिमाही में शिशु पहले की तुलना में कम मूवमेंट कर रहा है, तो इसे हल्के में न लें। एमनियोटिक फ्लूइड का स्तर कम होने पर इस तरह की समस्या आती है। ध्यान रखें कि गर्भ में शिशु की मूवमेंट से यह भी पता चलता है कि वह सही दिशा में विकास कर रहा है। उसकी मेंटल-फिजिकल ग्रोथ सही है।
महिला का वजन न बढ़ना
प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही के बाद से महिला का वजन तेजी से बढ़ता है। आखिरी तिमाही तक वजन इतना हो जाता है कि महिला के लिए सहज तरीके से चलने-फिरने में भी दिक्कतें आने लगती है। लेकिन, अगर आखिरी तिमाही में महिला का वजन बढ़ने के बजाय घटने लगे या पूरी तरह स्थिर हो जाए, तो इसे नकारात्मक संकेत समझा जाना चाहिए। इसका मतलब है कि एमनियोटिक फ्लूइड में कमी आ रही है।
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एमनियोटिक फ्लूइड के कम होने से जुड़ी जटिलताएं
आखिरी तिमाही में एमनियोटिक फ्लूइड कम होने पर कई तरह की परेशानियां और जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, जैसे-
- अम्बलीकल कॉर्ड यानी गर्भनाल पर दबाव पड़ सकता है। ध्यान रखें कि यह शिशु तक पोषत तत्वों को पहुंचाने वाला एकमात्र जरिया होता है। एमनियोटिक फ्लूइड में कमी होने से गर्भनाल की कार्यप्रणाली बाधित हो सकती है और शिशु तक पर्याप्त ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स पहुंचने में दिक्कत पैदा हो सकती है।
- आखिरी तिमही में एमनियोटिक फ्लूइड के स्तर में कमी ओने की वजह भ्रूण का विकास बाधित हो सकता है।
- आखिरी तिमाही में एमनियोटिक फ्लूइड के स्तर में कमी के कारण शिशु का लंग्स पूरी तरह डेवेलप नहीं हो पाता है। ऐसे में शिशु को लंग्स से जुड़ी समस्या होने का जोखिम बना रहता है।
- आखिरी तिमाही में एमनियोटिक फ्लूइड के स्तर में कमी के कारण महिला को सी-सेक्शन का जोखिम बढ़ जाता है। यहां तक कि समयपूर्व डिलीवरी की आशंका भी बनी रहती है।
- तीसरी तिमाही में एमनियोटिक फ्लूइड के स्तर में कमी होने पर संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। ध्यान रखें कि संक्रमण होने पर शिशु और मां दोनों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
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