पढ़ते समय सही हो रोशनी, आंखों के लिए खतरनाक हो सकती हैं ये 5 गलतियां

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 22, 2018
Quick Bites

  • कम रोशनी में या लेटकर पढ़ना आंखों के लिए हानिकारक है।
  • रोशनी की कमी से आंखों की पुतलियां फैल जाती हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन वाले ई-रीडर्स भी आंखों के लिए नुकसानदायक हैं।

आंखें हमारे शरीर के सबसे नाजुक और महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं। संवेदनशील और नाजुक होने के कारण आंखों को हमेशा अतिरिक्त देखभाल की जरूरत पड़ती है और थोड़ी सी भी लापरवाही आंखों के लिए खतरनाक हो सकती है। जाने अनजाने हम कुछ ऐसी आदतों को अपना लेते हैं जिसके चलते हमारी आंखों को नुकसान होने लगता हैं। फोन, टैबलेट, टीवी और कंप्यूटर का लगातार इस्तेमाल हमारी आंखों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अगर आपको भी है इनमें से कोई गलत आदत, तो संभल जाएं वर्ना जल्द ही आपकी आंखें खराब हो सकती हैं या आपको धुंधला दिखने और आंखों में दर्द की समस्या हो सकती है।

कम रोशनी में पढ़ना

पढ़ना बहुत अच्छी आदत है मगर पढ़ते समय कमरे में या जहां भी आप पढ़ रहे हैं, वहां पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। कम रोशनी में या लेटकर पढ़ने की आदत भी आंखों की सेहत के लिए हानिकारक होती है। अंधेरे में पढ़ने से आंखों को आगे चलकर नुकसान हो सकता है। क्‍योंकि रोशनी की कमी से आंखों की पुतलियां फैल जाती हैं, जिसका परिणाम होता है, दृष्टि क्षेत्र की गहनता यानी आंख के फोकस में नजदीक और दूर की चीजों के बीच फर्क का कम होना। इसके अलावा लेटकर पढ़ने की आदत भी आपकी आंखों के लिए नुकसानदायक होती है।

स्क्रीन देखते हुए पढ़ना

आजकल लोगों में मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या ई-रीडर पर पढ़ने का भी चलन बढ़ रहा है। इसका कारण है कि इनमें एक साथ ढेर सारी किताबें स्टोर की जा सकती हैं और कहीं भी पढ़ा जा सकता है। मगर आपको बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन वाले तमाम रीडिंग गैजेट्स भी आपकी आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। डॉक्‍टरों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन, जैसे कंप्यूटर, टेबलेट्स और स्‍मार्टफोन से निकालने वाली नीली लाईट सूरज की पराबैंगनी किरणों की तरह हानिकारक हो सकती है। इसके अलावा कंप्यूटर और लैपटॉप के स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी से आंखें खराब होने के साथ-साथ मोतियाबिंद जैसी बीमारी तक हो सकती है। कई लोग इस वजह से अनिद्रा के भी शिकार हो जाते हैं।

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पलकें झपकाना है जरूरी

आपने देखा होगा कि लगातार कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करते रहने से उनमें असहजता, खुजली महसूस होने लगती है। आमतौर पर आंखें एक मिनट में 12-15 बार  झपकती हैं, लेकिन कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करने वाले एक मिनट में केवल 4-5 बार ही आंखों को झपकाते हैं। आंखों को कम झपकाना और अधिक समय तक काम करते रहने से ड्राई आई सिंड्रोम, खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं दूसरी ओर कंप्यूटर पर लगातार काम करने वालों की आंखों से पानी निकलने की समस्या भी हो जाती है क्योंकि आंखें नहीं झपकाने से ल्युब्रिकेंट सही तरीके से आंखों में फैलता नहीं और उससे खुजली होती है और पानी बहता है।

लगातार मोबाइल या कंप्यूटर और लैपटॉप पर काम करना

मोबाइल और कंप्यूटर हमारी आंखों के सीधे संपर्क में रहते हैं, इसलिए सबसे इससे ज्यादा नुकसान आंखों को ही होता है। कंप्यूटर और मोबाइल से अपनी आंखों की दूरी कम होती हैं, जिससे आंखों की मूवमेंट कम होती है। इस कारण लंबे समय तक आंखें एक ही पॉइंट पर फोकस रहती है। मोबाइल और कंप्यूटर अधिक उपयोग करने वाले लोगों में मुख्य समस्या ड्राई आई सिंड्रोम की होती है। इसमें या तो आंखों में नमी कम होने लगती है।

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स्मोकिंग है आंखों के लिए खतरनाक

धूम्रपान करने का असर भी आंखों पर पड़ता है। सिगरेट में लगभग 4000 केमिकल्स मौजूद होते हैं, जो शरीर के भीतर जाकर शरीर के अन्य अंगों के साथ-साथ आंखों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। ज्यादा सिगरेट पीने से आंखों में लाल धब्बे होने के साथ-साथ आंखों से जुड़ी अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है। रेटिना के केंद्र को मैक्युला कहते हैं। हम अपनी आंखों की सीध में जिन चीजों को देखते हैं, उसके लिए मैक्युला जिम्मेदार होता है। उम्र बढ़ने पर खासकर 60 साल की उम्र के बाद मैक्युला की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। लेकिन अगर आप धूम्रपान करते हैं तो मैक्युला की कार्यक्षमता समय से काफी पहले ही कम होकर आपकी आंखें खराब हो जाती हैं।

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