क्यों फायदेमंद है जमीन पर बैठकर खाना? न्यूट्रीशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने बताए 'सुखासन' में बैठकर खाने के लाभ

भारत में अभी भी कई परिवार जमीन पर बैठ कर खाना खाते हैं। आइए जानते हैं क्यों ये आदत आ भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Jan 29, 2020Updated at: Aug 13, 2021
क्यों फायदेमंद है जमीन पर बैठकर खाना? न्यूट्रीशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने बताए 'सुखासन' में बैठकर खाने के लाभ

योग केवल चटाई पर एक कुछ खास मुद्राओं में ही बैठकर किया जा सकता है, तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है। आप बहुत से काम को करते वक्त इसे अपनी कुछ मुद्राओं को सही करके योग कर सकते हैं। यहां तक कि जब आप अपना भोजन कर रहे हों, तब भी आप इस प्राचीन प्रथा का लाभ उठा सकते हैं। वहीं आज के व्यस्त जीवन में हमारी डेस्क जॉब्स हमें फर्श पर बैठने और हमारा भोजन करने से रोकती हैं, जो पाचन तंत्र से जुड़ी कई सारी परेशानियों का कारण हो सकती है। ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति को सुखासन मुद्रा में बैठकर ही भोजन करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि ये न केवल भोजन को बेहतर तरीके से पचाने में मदद करता है, बल्कि आपकी चपलता में भी सुधार करता है। हाल ही में सेलिब्रिटी पोषण विशेषज्ञ रुजुता दिवेकर ने अपने इंस्टाग्राम पर इसले जुड़ा एक पोस्ट डाला है। आइए जानते हैं कि सुखासन मुद्रा में बैठकर भोजन करने के लाभ क्या है।

Inside_traditional eating

जमीन पर बैठकर खाना खाने के फायदे-Benefits of Sitting on the Floor while Eating

रुजुता दिवेकर के अनुसार, ''जब हम केवल एक सुपरफूड पर या उस एक व्यायाम कार्यक्रम का अनुसरण करते हैं, तो ये छोटी चीजें ही वक्त के साथ हमारे अच्छे स्वास्थ्य का नेतृत्व करते हैं"। उन्होंने अपने इंस्टा पोस्ट में लिखा है कि ऐसा ही एक छोटा, लेकिन दैनिक अभ्यास है बैठकर खाना। रुजुता ने बैठकर भोजन करने के लाभ भी बताएं हैं। जैसे

  • -बैठकर खाना एक बेहतर मुद्रा की अनुमति देता है क्योंकि आपकी रीढ़ गठबंधन और कंधे को चौकोर बनाता है।
  • -इससे खाने के कार्य पर ध्यान दिया जा सकता है और ये ध्यान में सुधार अधिक खाने से रोकता है।
  • -इस तरह बैठ कर खाने से पेट में बेहतर रक्त प्रवाह और सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे विटामिन बी 12, वीट डी का बेहतर पाचन हो पाता है। 
  • - शरीर को युवा और मोबाइल रखता है, शरीर की ताकत और स्थिरता को बनाए रखता है।
Inside_sukhasana

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नीचे बैठने के अलावा, अपने हाथों से खाएं। परंपरागत रूप से, खाने को हवन माना जाता है, जो आपके पेट में पाचन अग्नि को भोजन की पेशकश करता है। इसलिए, आप जो भोजन खाते हैं, वह आपके हाथों और पेट के लिए दिल से होना चाहिए। इसके अलावा, जैसा कि आप पहले से ही जानते हैं, भोजन करते समय कोई गैजेट का इस्तेमाल न करें। वहीं इस पोस्ट में उन्होंने इस करने का तरीका भी बताया है। वहीं रीढ़ को सीधा रखना शुरू में कठिन हो सकता है क्योंकि हम में से अधिकांश को अपनी रीढ़ के सहारे बैठने की आदत होती है (पढ़ाई करते समय, ऑफिस में, टीवी देखते हुए आदि)। नियमित अभ्यास बिना किसी सहारे के सीधे बैठने का एक आसान तरीका है। यह हमारी पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और किसी भी तरह के पीठ दर्द या पीठ की बीमारी को रोकता है।

    • सप्ताह 1 - कुर्सी पर अपने पैर क्रॉस करें और बैठें।
    • सप्ताह 2 - प्रत्येक वैकल्पिक दिन, अपने पैरों के क्रॉस को बदलें और बैठें
    • सप्ताह 3 - रोज भोजन के लिए फर्श पर बैठना शुरू करें (क्रॉस के साथ यह आसान है)
    • सप्ताह 4 - हर दिन इसे करते रहें।
    • सप्ताह 5 - एक भोजन से लेकर सभी मुख्य भोजन के लिए फर्श पर बैठना।
 
 
 
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Week 3 guideline – Sit in sukhasana when eating The main theme of the #12week2020 is reviving our age-old health and well-being practices. A lot of times we feel that health is built by eating that one superfood or following that one exercise program, etc. But it’s the small things that we do daily that come together over a period of time and lead to good health. This is exactly what our elders did. One such small, but daily practice was to sit down and eat. Why? There are many benefits of this - • Allows for an improved posture as your spine is aligned and the shoulders square. • Improves focus and attention to the act of eating and prevents overeating • Better blood flow to the stomach and improved assimilation of micro-nutrients like vitamin B12, Vit D, etc. • Keeps the body young and mobile, retains lower body strength and stability In addition to sitting down, eat with your hands. Traditionally, eating is considered to be a Havan, an offering of food to the digestive fire in your stomach. So, the food that you eat must be with your hands and the offering heartfelt. Also, as you already know, no gadgets while eating. How? Here’s a weekly plan - Week 1 - Cross your legs on the chair and sit. Week 2 - every alternate day, change the cross of your legs and sit Week 3 - start sitting down on the floor for one meal everyday (with the cross that is easier) Week 4 - sit down every day, and alternate the cross of your legs daily. Week 5 - build it from one meal to sitting down on the floor for all main meals. Note – If you are not able to sit on the chair with both legs up, you can start with one leg up on the chair at a time, slowly building to both legs up. P.S - The ability to sit down is also a predictor of our overall health and fitness. Try the sitting rising test (https://en.wikipedia.org/wiki/Sitting-rising_test) and share your score in this week’s form (score range is 0-10, details online). Fill the week 2 form here - link in bio. Video in story.

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सुखासन मुद्रा में बैठकर भोजन करने के अन्य लाभ

  • -यह उन लोगों के लिए प्रभावी माना जाता है जिनके शरीर में अकड़न होती है।
  • - यह टखनों, घुटनों और कूल्हे के जोड़ों में लचीलापन बनाने में मदद करता है।
  • -यह एकाग्रता में सुधार करने में मदद करता है, जो प्रभावी ध्यान प्रथाओं के लिए आवश्यक है।

सुखासन से जुड़ी अन्य बातें

    • -सुखासन पद्मासन जैसी लंबी अवधि तक ध्यान मुद्रा करने के बाद शरीर को आराम देने में मदद करता है।
    • - इसे 'आसान मुद्रा' कहा जाता है, लेकिन लंबी अवधि के लिए मुद्रा बनाए रखना मुश्किल माना जाता है क्योंकि पूरे शरीर का वजन केवल नितंबों द्वारा समर्थित होता है।

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