स्लिप डिस्क क्या है? डॉक्टर से जानें इस समस्या के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के टिप्स

स्लिप डिस्क की समस्या होने पर क्या-क्या परेशानी होती है, इसका ट्रीटमेंट क्या है सहित अन्य जानकारी के लिए जानें डॉक्टरी सलाह। पढ़ें ये आर्टिकल।

Satish Singh
Written by: Satish SinghPublished at: Oct 01, 2021
स्लिप डिस्क क्या है? डॉक्टर से जानें इस समस्या के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के टिप्स

आज के दौर में भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण लोगों में स्लिप डिस्क की बीमारी देखने को मिल रही है। इस बीमारी के कारण लोगों को कई प्रकार की दिक्कत होती है। सबसे अधिक परेशानी उन्हें लंबे समय पर बैठने व काम करने में होता है, पीठ में दर्द, गर्दन में दर्द होता है। आइए आज के इस आर्टिकल में हम जमशेदपुर के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एके बर्नवाल से बात करते हैं और जानने की कोशिश करेंगे इस बीमारी का लक्षण, बचाव और ट्रीटमेंट। अधिक जानने के लिए पढ़ें ये आर्टिकल। 

स्लिप डिस्क क्या है

डॉक्टर बताते हैं कि स्लिप डिस्क को कई लोग साइटिका भी कहते हैं। इस बीमारी के होने पर मरीज की रीढ़ की हड्डी के बीच में एक डिस्क या फिर जेल होता है, उसे डिस्क कहते हैं। यदि ये किन्हीं कारणों से स्लिप हो जाए यानि अपनी जगह से हट जाए तो स्लिप डिस्क की समस्या होती है। आम तौर पर डिस्क का काम शॉक अब्जॉर्वर का होता है। यानि इसपर यदि वजन पड़े तो यह भार खुद पर लेता है। हमारे शरीर को बाएं, दाएं या किसी भी ओर झुकने में मदद करता है। बढ़ती उम्र के साथ या फिर चोट लगने के साथ डिस्क का लचीलापन कम होता है, डिस्क में मौजूद पानी-द्रव में कमी आती है।  

Slip Disc

जानें साइटिका किसे कहते हैं

डॉक्टर बताते हैं कि बढ़ते उम्र के कारण या फिर कई बार एक्सीडेंट, चोट व भारी सामान्य उठाने की वजह से डिस्क अपनी जगह से हट जाती है। ऐसे में रीढ़ की हड्डी के बीच से होकर गुजरती नस दबने लगती है। इस नस के दबने से मरीज को काफी दर्द होता है। उसी दर्द को साइटिका कहा जाता है। यह दर्द कुछ मरीजों के पैरों तक जाता है तो कुछ मरीजों के घुटने तक। हिंदी में इस बीमारी का गद्दी खिसकना भी कहा जाता है।

जानें इस बीमारी से कैसे करें बचाव

डॉक्टर बताते हैं कि किसी भी स्पाइनल प्रॉब्लम जैसे स्लिप डिस्क, साइटिका, कमर में दर्द है तो उस स्थिति में रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए आप बैलेंस डाइट अपना सकते हैं, जिसमें पौष्टिक आहार को डाइट में शामिल कर सकते हैं। न्यूट्रीएंट्स लें, विटामिन बी1, बी12 लें, सूर्य की रौशनी में सन बाथ लें ताकि विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में ले सकें। वजन को कंट्रोल में रखें। क्योंकि संभव है कि वजन बढ़ने के साथ स्पाइन खिसक सकती है, आपको चलने फिरने में दिक्कत आ सकती है, झुकने आदि से स्लिप डिस्क की समस्या हो सकती है। इस स्थिति में यु्वाओं में भी इस प्रकार की बीमारी देखने को मिलती है। 

स्लिप डिस्क की बीमारी से बचाव के लिए बरतें ये सावधानी

  • मोटापा कम करें
  • बैलेंस डाइट लें
  • सीढ़ियों पर संभलकर चलें
  • ज्यादा भारी सामान कतई न उठाएं
  • एक्सरसाइज करते रहें
  • अपने शरीर को लचीला बनाएं 

जानें कब लेनी चाहिए डॉक्टरी सलाह

कमर में दर्द आदि समस्या होने पर लोगों को कब लेनी चाहिए डॉक्टरी सलाह, इसके बारे में एक्सपर्ट बताते हैं कि हर कमर दर्द के लिए डॉक्टरी सलाह की आवश्यकता नहीं पड़ती है। लेकिन शरीर में इस प्रकार के लक्षण दिखे तो डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए;

  • कमर दर्द जब आपको होता है, उस स्थिति में आराम करने के बाद भी असर न हो, दर्द बढ़ता ही जाए
  • कमर दर्द कमर से लेकर पैरों तक जाए
  • पैरों में झुनझुनी
  • कोई भी दर्द यदि आपके रोजमर्रा के काम को प्रभावित कर रहा है तो डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए

80 फीसदी मामलों में नहीं पड़ती डॉक्टर की जरूरत

एक्सपर्ट बताते हैं कि 80 फीसदी मामलों में एक्सरसाइज करने से, शरीर अपने आप या फिर कुछ दिनों में दर्द चला जाता है। लेकिन जो दर्द आपको एक सप्ताह से अधिक समय तक परेशान कर रहा है तो उसके लिए आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। 

Back Pain

बीमारी के गंभीर लक्षण

डॉक्टर बताते हैं इस बीमारी में कुछ गंभीर लक्षण यानि रेड फ्लैग्स होते हैं, जिसमें मरीज को जल्द से जल्द डॉक्टरी सलाह की आवश्यकता पड़ती है। लोगों को हमेशा ध्यान रखान चाहिए कि यदि वो साइटिका की बीमारी से जूझ रहे हैं और उनका दर्द बढ़ते ही जा रहा है, यहां तक कि उन्हें पैर रगड़ना पड़ रहा है, एंकल का चलना बंद होना, एंकल का सुन्न होना, यूरीन कंट्रोल करने में दिक्कत आ रही है, पेशाब रुक गई है। इस स्थिति में मरीज की डिस्क काफी ज्यादा दब जाती है, इस कारण रीढ़ की हड्डी से होकर गुजरने वाली नस दबने लगती है। ये सर्जिकल इमरजेंसी होती है। लेकिन ये समस्या बुहत कम लोगों में ही देखने को मिलता है। यदि आपको भी इस प्रकार के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल में जाकर ऑर्थोपेडिक सर्जन से सलाह लेनी चाहिए। 

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बीमारी को नजरअंदाज करने पर ये होती है समस्या

डॉक्टर बताते हैं कि मेडिकल इमरजेंसी में मरीज का ऑपेशन तक करने की नौबत आ सकती है। वहीं यदि कोई इस बीमारी को नजरअंदाज करे तो आगे चलकर मरीज को कई प्रकार के साइड इफेक्ट्स दिखते हैं, जैसे पेशाब करने में समस्या आना या फिर पैर की कमजोरी हमेशा के लिए हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि यदि आपको इस बीमारी के गंभीर लक्षण दिख रहे हैं तो जल्द से जल्द डॉक्टरी सलाह लें व उपचार करवाएं। 

जानें किस उम्र के लोगों होती है ये बीमारी

डॉक्टर बताते हैं कि ये बीमारी आज के समय में बच्चों को छोड़कर हर उम्र के लोगों में देखने को मिल रही है। जैसे-जैसे लोगों की उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे रीढ़ की हड्डी में मौजूद पानी-द्रव कम होने लगता है। इस कारण डिस्क सख्त हो जाती है या फिर इसकी इलास्टिसिटी कम हो जाती है। इस कारण वजन पड़ने पर ये फैल जाती है। तो उम्र के साथ डिस्क का खराब होना बढ़ जाता है। ऐसे में उम्र बढ़ने के साथ लोगों को स्पाइन की दिक्कतें महसूस होती हैं। कुछ मरीज जो मोटापे से ग्रसित हैं, जिनका खानपान ठीक नहीं है, जो ज्यादा जिम करते हैं, वजन उठाने का जिनका ज्यादा काम है उन लोगों में ये बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है। लंबे समय तक एक पॉश्चर में बैठे रहने की वजह से भी युवाओं में ये बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है। 

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जानें डॉक्टर कौन सा टेस्ट कराते हैं, बीमारी का कैसे पता लगाते हैं

डॉक्टर बताते हैं कि वैसे तो जब मरीज हमारे पास आता है तो उसके लक्षणों से बीमारी की पहचान करते हैं, लेकिन बीमारी कंफर्म करने के लिए एमआरआई की जांच करवाते हैं। इससे यह भी पता चलता है कि ये बीमारी कितनी अधिक गंभीर है। ज्यादातर केस में स्पाइन की नस में दबने की वजह से मरीज को दर्द होता है, तबतक वो डॉक्टरी सलाह लेने के लिए आ जाता है। एमआरआई में यदि मरीज की स्थिति ज्यादा गंभीर है तो उस स्थिति में ऑपरेशन कर उपचार किया जाता है। महिलाओं में एक उम्र के बाद उनकी हड्डियों में कमजोरी आती है,  ऑस्टियोपोरोसिस होता है, हड्डियों में से कैल्शियम निकलने लगता है, कमर दर्द होता है उसके लिए एक खास टेस्ट डेक्सास्कैन कराने की सलाह देते हैं। विटामिन डी का टेस्ट करवाते हैं। 

कई लोग ऑपरेशन से डरते हैं, लेकिन सलाह लेना जरूरी

डॉक्टर बताते हैं कि स्लिप डिस्क और साइटिका की बीमारी में एक से 2 फीसदी मरीजों को ही ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। अन्य मरीज लाइफस्टाइल में बदलाव कर, दवा का सेवन कर ठीक हो सकते हैं। इसलिए लोगों को डॉक्टरी सलाह ले कभी भी घबराना नहीं चाहिए। यदि आपको भी अपने शरीर में इस प्रकार के लक्षण दिख रहे हैं तो ऐसे में आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। 

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