साइनस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण और उपाय

साइनस के कारण व्यक्ति को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है ऐसे में अगर शुरुआत में ही सतर्कता बरती जाए तो इसे फैलने से रोका जा सकता है।

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Jan 04, 2021Updated at: Jan 04, 2021
साइनस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण और उपाय

किसी को सिर दर्द हो रहा है या किसी को ठंड लग रही है तो यह एक आम बीमारी के लक्षण हो सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनके ये लक्षण भी किसी गंभीर बीमारी को पैदा कर सकते हैं। उस गंभीर बीमारी का नाम है साइनसाइटिस। जी हां, इसके लक्षणों में भी सर्दी, जुखाम, सिरदर्द आदि आते हैं। यह नाक के आसपास सूजन पैदा कर देती है। बता दें कि यह समस्या किसी भी संक्रमण के कारण हो सकती है। किसी बच्चे को दर्द हो रहा है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि किसी व्यक्ति को साइनसाइटिस है या नहीं। आज इस लेक के माध्यम से जानते हैं कि इसके लक्षण क्या होते हैं? इसके कारण क्या हैं? पढ़ते हैं आगे... 

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साइनस के प्रकार (types of sinus)

बता दें कि साइनस चार प्रकार के होते हैं। पहला तीव्र साइनस संक्रमण, कम तीव्र साइनस संक्रमण, क्रॉनिक साइनस संक्रमण, रिकरेंट साइनसाइटिस। बता दें कि तीव्र साइनस संक्रमण जो एक शरीर में कम से कम 30 दिन या उससे कम समय तक रहता है। वहीं कम तीव्र साइनस संक्रमण 1 महीने से ज्यादा समय तक या 3 महीने तक भी किसी शरीर में रह सकता है। क्रॉनिक साइनस संक्रमण 3 महीने से ज्यादा समय तक रह सकता है। वहीं रीकरेंट साइनसाइटिस सीधे वायरस संक्रमण से होता है। जो कम तीव्र साइनस संक्रमण और क्रॉनिक साइनस संक्रमण का इलाज अच्छे से ना हो पाने के कारण पैदा होता है। वैसे तो यह साइनस लोगों में कम पाया जाता है लेकिन यह बार-बार होने वाला साइनोसाइटिस होता है।

साइनस के लक्षण (symptoms of sinus)

साइनस के लक्षण निम्न प्रकार है-

1- खाने का स्वाद या किसी भी गंध को सही सेना पर रख पाना।

2- नाक बंद होने के कारण सांस लेने में तकलीफ महसूस करना।

3- कानों में दर्द महसूस करना

4- दांतों में दर्द या ऊपरी जबड़े में दर्द महसूस करना

5- रात में खांसी होना

6- गले में खराश होना

7- मुंह से बदबू का आना

8- चिड़चिड़ापन महसूस करना या थकान महसूस होना

9- उल्टी काजी मत लाना

ध्यान दें कि क्रॉनिक साइनस और एक्यूट साइनस के लक्षण एक समान होते हैं लेकिन क्रॉनिक साइनस के लक्षण अधिक समय तक दिखाई देते हैं। वही एक्टिव साइनस कम समय के लिए होता है। एक्यूट साइनस में व्यक्ति को बुखार हो सकता है लेकिन क्रॉनिक साइनस में बुखार लक्षण नजर नहीं आते हैं।

 डॉक्टर के पास कब जाएं

 तेज बुखार होने पर, सर में ज्यादा दर्द महसूस करने पर, आंखों के आसपास की त्वचा के लाल पड़ जाने पर, सूजन महसूस करने पर, देखने में परेशानी होने पर, गर्दन में अकड़न होने पर या तेज बुखार होने पर डॉक्टर को तुरंत दिखाएं।

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साइनस के कारण(causes of sinus)

साइनस के पीछे अनेक कारण छिपे होते हैं ऐसे में मुख्य कारणों की बात की जाए तो नाक में तरल पदार्थ का इकट्ठा हो जाना सबसे बड़ा कारण होता है इसके अलावा निम्न कारण यह भी हैं- 

1- प्रदूषण के कारण बलगम बढ़ना

2- बैक्टीरिया के कारण

3- किसी वायरस के कारण

4- नाक में रोगाणुओं के पैदा होने पर नाक के गले में सूजन के कारण।

5- जैसे कि किसी भी व्यक्ति बीमारी का शिकार हो जाता है तो उसकी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिसके कारण भी साइनस हो सकता है।

6- जानवरों के बाल, धूल, मिट्टी आदि से एलर्जी के कारण।

7- जिस व्यक्ति की नाक की हड्डी टेढ़ी हो या नाक की अंदरूनी बनावट ठीक ना हो उसे भी साइनस की बीमारी हो सकती है।

8- अधिक धूम्रपान करने वाले लोगों को साइनस हो सकता है।

9- दांत में संक्रमण के कारण भी साइनस की परेशानी देखी गई है।

जो लोग अस्थमा से ग्रस्त होते हैं वे भी साइनस के शिकार हो सकते हैं।

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साइनस से बचाव (precautions of sinus)

डॉक्टर एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई आदि की मदद से इस समस्या की जांच करते हैं। इसके अलावा भी शारीरिक परीक्षण जैसे कि नाक के लाल हो जाने, सूजन आ जाने, बलगम, पस या गाल आदि को छूकर आंखों के आसपास और गालों में सूजन आदि से भी साइनस का पता लगाते हैं। जब शुरुआती तौर पर यह ठीक नहीं होता है तब सीटी स्कैन और एमआरआई की मदद ली जाती है। वहीं अगर किसी गर्भवती महिला को साइनस हो जाए तो उसके लिए अल्ट्रासाउंड का प्रयोग किया जाता है।

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साइनस का इलाज (treatment of sinus)

साइनस का इलाज निम्न तरीकों से किया जाता है-

1- चेहरे पर गर्म पानी की भाप लेने से साइनस दूर हो सकता है।

2- बलगम को निकालने से साइनस को दूर किया जाता है।

3- दर्द और दबाव को कम करने किया जाता है।

4- सर्दियों में बाहर निकलन से पहले मास्क का प्रयोग करें।

5- नाक, आंख या कान आदि को छूने से पहले  अपने हाथों को जरूर धोएं।   

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