कानिका कपूर का 5वीं बार कोरोना का टेस्‍ट आया पॉजिटिव, जानिए बार-बार क्‍यों होती है जांच

COVID-19: कनिका कपूर का पांचवी बार कोरोना टेस्‍ट पॉजिटिव आया है। ऐसे में लोगों के मन एक सवाल उठ रहे हैं कि बार-बार टेस्‍ट क्‍यों किए जाते हैं।

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Apr 01, 2020
कानिका कपूर का 5वीं बार कोरोना का टेस्‍ट आया पॉजिटिव, जानिए बार-बार क्‍यों होती है जांच

लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) में भर्ती, बॉलीवुड गायिका कनिका कपूर में लगातार पांचवीं बार कोरोनो वायरस टेस्‍ट पॉजिटिव आया है। पिछले दस दिन में 5 कोरोना टेस्‍ट हो चुके हैं। जानकारी के मुताबिक 48 घंटे के बाद उनका छठवीं बार टेस्‍ट होगा।  

गौरतलब है कि, कनिका कपूर 9 मार्च को लंदन की यात्रा से लौटने के बाद बिना जांच के कई पार्टियां अटेंड की और कई लाइव कंसर्ट में हिस्‍सा लिया था जिसके चलने उन्‍हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। पिछले 20 दिनों से वह लखनऊ के पीजीआई में भर्ती हैं। डॉक्‍टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।

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कनिका के डॉक्‍टर ने क्‍या कहा? 

जैसा कि मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि भले ही कनिका के अब तक के पाचों टेस्ट पॉजीटिव आए हों, लेकिन उनकी तबियत स्थिर है। दरअसल, गायिका की रिपोर्ट सामने आने के बाद उनकी सेहत को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलने लगी जिसके कारण पीजीआई के डायरेक्टर को सामने आना पड़ा। डायरेक्‍टर डॉ. धीमन के मुताबिक, कनिका ठीक हैं और रिकवर कर रही हैं। हम उनका टेस्ट नेगेटिव आने का इंतजार कर रहे हैं। टेस्ट नेगेटिव आते ही उन्हें 2-3 हफ्ते बाद छुट्टी दे दी जाएगी। 

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कोरोना मरीज के लिए क्‍यों जरूरी है बार-बार टेस्‍ट

कोरोना वायरस वैश्विक महामारी है जिसका इलाज अभी भी नहीं मिला है। दुनिया भर के वैज्ञानिक और डॉक्टर COVID-19 वायरस के लिए एक टीका विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। दुनिया में 3 लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं जबकि भारत में लगभग 1700 सकारात्मक मामलों के साथ लोगों में दहशत का माहौल है। ऐसे में इसकी पहचान करने के लिए टेस्टिंग ज्‍यादा जरूरी है।

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एक व्यक्ति जिसमें कोरोनो वायरस के पॉजिटिव टेस्‍ट आते हैं। उनका हर 48 घंटे में लगातार दो बार परीक्षण किया जाता है जब तक कि लगातार दो परिणाम नकारात्मक नहीं आते। दो रिपोर्ट यह सुनिश्चित करती हैं कि व्यक्ति आखिरकार COVID-19 से मुक्‍त हो चुका है। इससे दूसरे लोगों में वायरस के फैलने का खतरा कम हो जाता है। इसलिए, संक्रमित रोगी को केवल तभी छुट्टी दी जा सकती है जब तक जांच रिपोर्ट दो बार निगेटिव न आ जाए। तब तक, वह डॉक्टरों द्वारा बारीकी से निगरानी की जाती है।

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