Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

क्या इंस्टेंट ओट्स वाकई हेल्दी ब्रेकफास्ट है? जानें रिसर्च और एक्सपर्ट क्या कहते हैं

इंस्‍टेंट ओट्स जल्‍दी से खाने के ल‍िए तैयार हो जाते हैं। ये रोल्‍ड ओट्स के मुकाबले पतले होते हैं, पहले से हल्‍के पके हुए होते हैं और इसे खाना भी आसान है इसल‍िए कई लोग इसे हेल्‍दी ब्रेकफास्‍ट का आसान व‍िकल्‍प मानते हैं, लेक‍िन क्‍या यह सेहतमंद भी है? एक्‍सपर्ट और र‍िसर्च से समझते हैं। 

सुबह-सुबह जब काम पर जाने से पहले कुछ बनाने का समय नहीं होता, तो मैं इंस्‍टेंट ओट्स बना लेती हूं, यह नूडल्‍स की तरह बस दो म‍िनट में तैयार हो जाते हैं। खाने में भी स्‍वाद‍िष्‍ट लगते हैं। इसे मैं कभी दूध, तो कभी दल‍िया की तरह पकाकर खाती हूं। जब मैं घर से दूर रहकर जॉब करती थी, तब भी अक्‍सर मैं सुबह की शुरुआत नाश्‍ते में इंस्‍टेंट ओट्स खाकर करती थी। इससे पेट भी जल्‍दी भर जाता है और नूडल्‍स या पास्‍ता से, तो यह बेहतर ही है इसल‍िए इसे सेहतमंद समझकर मेरी तरह कई लोगों की यह पहली पसंद है। ओट्स एक तरह का होल ग्रेन फूड है। इसमें फाइबर और प्रोटीन भी मौजूद होता है। ओट्स मॉर्न‍िंग एनर्जी और वेट लॉस के ल‍िए सबसे ज्‍यादा पसंद किया जाता है। कई लोग रोल्‍ड ओट्स को खाना पसंद करते हैं, तो कुछ लोग इंस्‍टेंट ओट्स को हेल्‍दी ब्रेकफास्‍ट समझकर खा लेते हैं, ले‍क‍िन क्‍या इंस्‍टेंट ओट्स वाकई एक हेल्‍दी व‍िकल्‍प है? इंस्‍टेंट ओट्स जल्‍दी तैयार हो जाते हैं इसल‍िए इसे ज्‍यादातर लोग अपने नाश्‍ते में शाम‍िल करते हैं पर इसके सेहतमंद होने पर सवाल खड़ा होता है। एक्‍सपर्ट और र‍िसर्च की मदद से इस सवाल का जवाब आगे जानते हैं।

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इंस्‍टेंट ओट्स खाने से पेट जल्‍दी भरता है- Instant Oats Keeps You Feel Fuller

National Library Of Medicine की एक स्‍टडी में 48 स्‍वस्‍थ वयस्‍कों को शाम‍िल क‍िया गया। हर व्‍यक्‍त‍ि को अलग-अलग द‍िनों पर अलग-अलग नाश्‍ता द‍िया गया। ज‍िन लोगों को नाश्‍ते में इंस्‍टेंट ओट्स द‍िए गए, उन्‍हें पेट जल्‍दी भरा हुआ महसूस हुआ। इस स्‍टडी में इंस्‍टेंट ओट्स खाने का कोई नुकसान नहीं द‍ेखा गया है।

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इंस्‍टेंट ओट्स ज्‍यादा प्रोसेस्‍ड होते हैं- Instant Oats Are More Processed

Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow ने बताया क‍ि इंस्‍टेंट ओट्स भी रोल्‍ड ओट्स की तरह हेल्‍दी होते हैं। इंस्‍टेंट ओट्स और रोल्‍ड ओट्स की कैलोरी में ज्‍यादा फर्क नहीं होता। 40 ग्राम इंस्‍टेंट ओट्स में करीब 200 कैलोरी होती हैं वहीं रोल्‍ड ओट्स में करीब 150 कैलोरी होती हैं। इंस्‍टेंट ओट्स में फैट और फाइबर तीन ग्राम होता है और रोल्‍ड ओट्स में फैट और फाइबर पांच से छह ग्राम होता है। इंस्‍टेंट ओट्स ज्‍यादा प्रोसेस्‍ड होते हैं और इन्‍हें खाने से शुगर लेवल बढ़ सकता है वहीं दूसरी ओर रोल्‍ड ओट्स कम प्रोसेस्‍ड होते हैं, इनमें फाइबर की मात्रा ज्‍यादा होती है, ये धीरे पचते हैं और इसे खाकर पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है।

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रोल्‍ड ओट्स का ग्‍लाइसेम‍िक इंडेक्‍स कम होता है- Rolled Oats Have Low Glycemic Index

इंस्‍टेंट ओट्स का ग्‍लाइसेम‍िक इंडेक्‍स करीब 80 होता है और ग्‍लाइसेम‍िक लोड करीब 17 होता है। वहीं रोल्‍ड ओट्स की बात करें, तो जीआई 55 होता है और जीएल करीब 11 होता है। यानी डायब‍िट‍िक मरीजों के ल‍िए रोल्‍ड ओट्स ज्‍यादा बेहतर व‍िकल्‍प है क्‍योंक‍ि इसका जीआई, इंस्‍टेंट ओट्स के मुकाबले कम होता है।

न‍िष्‍कर्ष:

इंस्‍टेंट और रोल्‍ड ओट्स दोनों ही सेहत के ल‍िए फायदेमंद हैं, आप दोनों में से क‍िसी का भी सेवन कर सकते हैं। National Library Of Medicine की स्‍टडी कहती है क‍ि इंस्‍टेंट ओट्स खाने से सेहत को कोई नुकसान नहीं होता वहीं न्‍यूट्र‍िशन‍िस्‍ट नेहा स‍िन्‍हा ने बताया क‍ि इंस्‍टेंट ओट्स, रोल्‍ड ओट्स के मुकाबले ज्‍यादा प्रोसेस्‍ड होते हैं और इनका जीआई भी रोल्‍ड ओट्स के मुकाबले ज्‍यादा होता है, इसल‍िए डायब‍िट‍िक मरीजों के ल‍िए रोल्‍ड ओट्स बेहतर हैं और स्‍वस्‍थ लोगों के ल‍िए भी रोल्‍ड ओट्स बेहतर व‍िकल्‍प हैं, हालांक‍ि इंस्‍टेंट ओट्स खाकर भी सेहत पर कोई बुरा असर देखा नहीं जाता है। आप अपनी सुव‍िधा के अनुसार व‍िकल्‍प चुन सकते हैं।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Mar 04, 2026 13:30 IST

    Modified By : Pallavi Kumari
  • Mar 04, 2026 13:30 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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